जोनिता गांधी ने कनाडा में नस्लीय धमकाने पर खुलकर बात की ‘वे मुझे गॉडज़िला कहते थे’। बॉलीवुड की मशहूर प्लेबैक सिंगर जोनिता गांधी ने हाल ही में अपने बचपन में कनाडा में झेले गए नस्लीय भेदभाव और धमकाने (बुलिंग) के बारे में खुलासा किया। हौटेर्फ्लाई के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके चेहरे के बालों (फेशियल हेयर) के कारण उन्हें स्कूल में क्रूर ताने सुनने पड़ते थे। जोनिता ने कहा, “मुझे मेरे चेहरे के बालों के लिए बहुत सारे नस्लीय कमेंट्स मिलते थे। वे मुझे गॉडज़िला कहते थे, और मेरी क्लास के पंजाबी लड़के भी मेरा मजाक उड़ाते थे।”

जोनिता गांधी की कहानी
दिल्ली में जन्मी और कनाडा में पली-बढ़ी जोनिता ने बताया कि स्कूल में उन्हें न सिर्फ नस्लीय टिप्पणियों का सामना करना पड़ा, बल्कि उनकी अपनी ही पंजाबी कम्युनिटी के लोग भी उन्हें बाहरी समझते थे। इन तानों ने उनके आत्मविश्वास को बहुत ठेस पहुंचाई। उन्होंने कहा, “मैं सोचती थी कि मैं बदसूरत हूं और मुझे कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
जोनिता ने खुलासा किया कि इन अनुभवों ने उनके बॉडी इमेज पर गहरा असर डाला। उन्होंने बताया, “मुझे लगता था कि मेरे चेहरे के साइडलॉक्स के कारण मैं कभी आकर्षक नहीं हो सकती। मैं सोचती थी कि मेरी जिंदगी में कभी प्यार या अंतरंग रिश्ते नहीं होंगे।”
संगीत ने दी ताकत: जोनिता ने बताया कि संगीत उनके लिए एक आश्रय स्थल बन गया। यूट्यूब पर बॉलीवुड गानों के कवर बनाकर उन्होंने अपनी पहचान बनाई, जिससे उन्हें आत्मविश्वास मिला। उनके गाने जैसे “पानी दा रंग” और “तुम ही हो” ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया।
कनाडा में नाम कमाने के बाद जोनिता भारत आईं, जहां उन्हें एक नए तरह के पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “भारत में लोग मुझे ‘फिरंग’ समझकर गलत धारणाएं बनाते थे। लेकिन मैंने ऐसे लोगों से मुलाकात की जिन्होंने मेरी प्रतिभा को सम्मान दिया और मुझे सशक्त महसूस कराया।”

जोनिता गांधी का करियर
जोनिता ने 2013 में “चेन्नई एक्सप्रेस” के साथ बॉलीवुड में डेब्यू किया और तब से उन्होंने “द ब्रेकअप सॉन्ग”, “व्हाट झुमका”, और “दिल का टेलीफोन” जैसे हिट गाने गाए। वह 16 मिलियन मासिक श्रोताओं के साथ 91 नॉर्थ रिकॉर्ड्स की पहली महिला आर्टिस्ट हैं। 2024 में उनकी पहली सोलो ईपी “लव लाइक दैट” रिलीज हुई, जो उनकी भारत और कनाडा की सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाती है।

जोनिता गांधी की कहानी का प्रेरणादायक संदेश
जोनिता की कहानी नस्लीय भेदभाव और आत्म-संदेह से उबरकर आत्मविश्वास और सफलता की ओर बढ़ने की मिसाल है। उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा, “मैं अब अपनी जड़ों को गर्व के साथ अपनाती हूं और अपनी कहानी को सेलिब्रेट करती हूं।” उनकी यह यात्रा उन सभी के लिए प्रेरणा है जो अपने आप को स्वीकार करने और अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।