दिल्ली में चार मंजिला इमारत ढहने का हादसा: कई लोग मलबे में फंसे, बचाव कार्य जारी
दिल्ली के सीलमपुर इलाके में शनिवार सुबह एक भयावह हादसा हुआ, जब जनता मजदूर कॉलोनी में एक चार मंजिला इमारत अचानक ढह गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया, क्योंकि मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। दिल्ली अग्निशमन विभाग और पुलिस ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया, जिसमें अब तक 3-4 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
दिल्ली हादसे का विवरण
12 जुलाई 2025 को सुबह करीब 7 बजे, उत्तर-पूर्वी दिल्ली के वेलकम क्षेत्र में स्थित जनता मजदूर कॉलोनी की गली नंबर 5 में एक चार मंजिला इमारत (ग्राउंड-प्लस-थ्री) अचानक भरभराकर गिर गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत में 8-10 लोग रहते थे, जिनमें तीन बच्चे और तीन महिलाएं शामिल थे। हादसे के समय इमारत में मौजूद कई लोग मलबे में दब गए। कुछ समाचारों के अनुसार, मलबे में 12 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
दिल्ली अग्निशमन सेवा (Delhi Fire Service) के प्रमुख अतुल गर्ग ने बताया कि सुबह 7 बजे हादसे की सूचना मिलते ही सात दमकल गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। बचाव कार्य में पुलिस, स्थानीय लोग, और आपातकालीन सेवाएं शामिल हैं, जो मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।
दिल्ली बचाव कार्य की स्थिति
बचाव अभियान तीव्र गति से चल रहा है। अब तक 3-4 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकालकर नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, अभी भी कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। स्थानीय लोगों ने भी बचाव कार्य में सहयोग किया, और कुछ ने मलबा हटाने में मदद की। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि इमारत के गिरने से पहले एक जोरदार आवाज सुनाई दी, जिसके बाद धूल और धुआं चारों ओर फैल गया।
अतिरिक्त डीसीपी संदीप लामा ने कहा, “हादसे की सूचना सुबह 7:15 बजे मिली। यह एक तीन-चार मंजिला इमारत थी, जिसमें मतलूब परिवार के सदस्य रहते थे। बचाव कार्य जारी है, और हम जल्द से जल्द सभी लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रहे हैं।”

दिल्ली हादसे का संभावित कारण
इमारत के ढहने का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है। हालांकि, स्थानीय लोगों और कुछ समाचारों ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के जनकपुरी वेस्ट-आरके आश्रम मार्ग कॉरिडोर के लिए चल रहे टनलिंग कार्य को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। कुछ निवासियों का दावा है कि क्षेत्र में मेट्रो निर्माण के कारण कई इमारतों में दरारें आ चुकी हैं।
हालांकि, DMRC ने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र की कई इमारतों को पहले ही असुरक्षित घोषित किया गया था, और 12 जून 2025 को इमारत मालिकों को खाली करने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। DMRC ने यह भी कहा कि टनलिंग शुरू होने से पहले ही इन इमारतों को खाली करा लिया गया था, और सुरक्षा के लिए सबसॉइल ग्राउटिंग और बाहरी सपोर्ट जैसे उपाय किए गए थे।
हाल के अन्य हादसे
यह हादसा दिल्ली में हाल के दिनों में इमारत ढहने की दूसरी बड़ी घटना है। शुक्रवार को, उत्तरी दिल्ली के सदर बाजार में एक तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत ढहने से 45 वर्षीय मनोज शर्मा की मृत्यु हो गई थी। इस घटना में भी DMRC के टनलिंग कार्य को संभावित कारण माना गया था, जिसके बाद DMRC ने मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की थी।
इसके अलावा, अप्रैल 2025 में मुस्तफाबाद में एक छह मंजिला निर्माणाधीन इमारत के ढहने से 11 लोगों की मौत हो गई थी, और सितंबर 2024 में करोल बाग में एक इमारत के गिरने से 14-15 लोगों को बचाया गया था।
हादसे सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) (लापरवाही से मृत्यु) और 290 (इमारतों के निर्माण या मरम्मत में लापरवाही) के तहत एक FIR दर्ज की है। जांच शुरू कर दी गई है ताकि हादसे के कारणों का पता लगाया जा सके।
दिल्ली सरकार ने अभी तक इस हादसे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन करोल बाग हादसे में सरकार ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों के लिए सहायता राशि की घोषणा की थी। इस हादसे में भी ऐसी सहायता की उम्मीद की जा रही है।

सुरक्षा और भविष्य के लिए कदम
दिल्ली में बार-बार इमारत ढहने की घटनाएं चिंता का विषय बन रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी और असुरक्षित इमारतों की पहचान, समय पर रखरखाव, और सख्त निर्माण नियमों का पालन इस तरह के हादसों को रोकने के लिए जरूरी है। इसके अलावा, मेट्रो जैसे बड़े निर्माण कार्यों के दौरान आसपास की इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और सख्त उपायों की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
सीलमपुर में चार मंजिला इमारत का ढहना एक दुखद घटना है, जिसने कई परिवारों को प्रभावित किया है। बचाव कार्य अभी भी जारी हैं, और प्रशासन मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा और निर्माण कार्यों के प्रभाव पर सवाल उठाए हैं। हमारी संवेदनाएं प्रभावित परिवारों के साथ हैं, और हम उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।