प्रतीक ने हिंदी और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में अपनी सिनेमैटोग्राफी के जरिए कहानियों को जीवंत किया है। उनकी कला हर फ्रेम में भावनाओं को उकेरती है, जो दर्शकों को कहानी के करीब ले जाती है। प्रतीक की यात्रा जुनून, मेहनत, और कला के प्रति समर्पण की कहानी है। आइए, उनकी सिनेमैटोग्राफी की दुनिया को पांच चरणों में समझते हैं।
प्रतीक शाह का जीवन और शिक्षा : कला
प्रतीक शाह का जन्म डलास, टेक्सास में हुआ, जहां उन्होंने कम उम्र में ही फोटोग्राफी और विज़ुअल कला के प्रति रुचि दिखाई। उन्होंने वॉशिंगटन डीसी के कॉर्कोरन कॉलेज ऑफ आर्ट एंड डिज़ाइन से फाइन आर्ट फोटोग्राफी में बीएफए हासिल किया। इस दौरान, उन्होंने फोटोग्राफी की तकनीकी और रचनात्मक बारीकियां सीखीं, जो बाद में उनकी सिनेमैटोग्राफी की रीढ़ बनीं। इसके बाद, उन्होंने लॉस एंजिल्स के यूसीएलए से सिनेमैटोग्राफी में एमएफए पूरा किया। यूसीएलए में उनकी पढ़ाई ने उन्हें कहानी को दृश्यों के माध्यम से व्यक्त करने की कला सिखाई। प्रतीक ने अपने करियर की शुरुआत द वॉशिंगटन पोस्ट और द वॉशिंगटन टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों के लिए मल्टीमीडिया प्रोजेक्ट्स पर काम करके की। उनकी मल्टीमीडिया कला को नेशनल प्रेस फोटोग्राफर्स एसोसिएशन ने कई पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस शुरुआती अनुभव ने प्रतीक को सिनेमैटोग्राफी की दुनिया में एक मजबूत आधार दिया।

प्रतीक शाह सिनेमैटोग्राफी पहला कदम ;
प्रतीक ने 2013 में फिल्म आफ्टर द रिवर के साथ सिनेमैटोग्राफर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। इस फिल्म ने उनकी प्रतिभा को दुनिया के सामने लाया और उन्हें फिल्म उद्योग में पहचान दिलाई। इसके बाद, उन्होंने जुबली (2023), सीटीआरएल, और होमबाउंड जैसी परियोजनाओं पर काम किया। होमबाउंड ने 2025 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में खूब वाहवाही बटोरी, जहां प्रतीक की सिनेमैटोग्राफी ने कहानी को एक नया आयाम दिया। इस फिल्म में उनके द्वारा रचे गए जीवंत रंगों और भावनात्मक दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रतीक की शुरुआती परियोजनाओं ने यह साबित किया कि वे तकनीकी कौशल के साथ-साथ कहानी को दृश्यों में ढालने की कला में भी माहिर हैं।

प्रतीक शाह की सिनेमैटोग्राफी का मूल मंत्र है कहानी को विज़ुअल रूप में जीवंत करना। वे लाइटिंग, कैमरा मूवमेंट, और रंगों का उपयोग इस तरह करते हैं कि प्रत्येक फ्रेम कहानी का हिस्सा बन जाता है। जुबली में उनके ब्लैक-एंड-व्हाइट दृश्यों ने कहानी की उदासीनता और गहराई को उभारा, जबकि होमबाउंड में जीवंत रंगों ने किरदारों की भावनात्मक यात्रा को और प्रभावशाली बनाया। प्रतीक कहते हैं, “मेरा काम सिर्फ दृश्यों को कैप्चर करना नहीं, बल्कि कहानी की आत्मा को दर्शकों तक पहुंचाना है।” उनकी यह प्रतिभा उन्हें 2023 में जुबली के लिए आईडब्ल्यूएम डिजिटल अवॉर्ड फॉर बेस्ट सिनेमैटोग्राफी दिला चुकी है। उनकी सिनेमैटोग्राफी में तकनीक और कला का संतुलन उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जो हर प्रोजेक्ट में नजर आता है।
चुनौतियां और विवाद: एक सबक ( pratik shah)
प्रतीक शाह का करियर चुनौतियों से अछूता नहीं रहा। हाल ही में, कुछ फिल्ममेकर्स ने उन पर अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए, जिसके बाद उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया। धर्मा प्रोडक्शंस, जिसने होमबाउंड का निर्माण किया, ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल के दौरान कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई। यह विवाद उनकी पेशेवर उपलब्धियों को पूरी तरह परिभाषित नहीं करता, लेकिन यह फिल्म उद्योग में जवाबदेही और पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करता है। प्रतीक ने इस मामले पर कम सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी, लेकिन उनकी कला और काम के प्रति समर्पण उनकी छवि को बनाए रखता है। यह चरण हमें सिखाता है कि सफलता के साथ चुनौतियां आना स्वाभाविक है,
भविष्य और प्रेरणा: सिनेमा का नया स्वरूप ( प्रतीक शाह )
प्रतीक शाह की सिनेमैटोग्राफी न केवल तकनीकी रूप से उत्कृष्ट है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी गहरी और प्रभावशाली है। उनकी हर परियोजना दर्शकों को एक ऐसी दुनिया में ले जाती है, जहां प्रत्येक फ्रेम एक कहानी कहता है। वर्तमान में, वे नई परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं, जिनका सिनेमा प्रेमी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। प्रतीक की यात्रा उन युवा सिनेमैटोग्राफर्स के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं। वे कहते हैं, “हर कहानी एक नया कैनवास है, और मेरा काम उस कैनवास पर रंग भरना है।” उनकी यह सोच उन्हें सिनेमैटोग्राफी की दुनिया में और आगे ले जाएगी। प्रतीक की कला हमें सिखाती है कि जुनून और मेहनत से असाधारण परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

प्रतीक शाह की सिनेमैटोग्राफी की यात्रा तकनीक, कला, और जुनून का एक अनूठा संगम है। उनकी फिल्में, जैसे जुबली और होमबाउंड, उनकी प्रतिभा का जीता-जागता उदाहरण हैं। चुनौतियों के बावजूद, वे अपनी कला के प्रति समर्पित हैं और सिनेमा की दुनिया में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। प्रतीक शाह का नाम आज सिनेमैटोग्राफी में एक चमकते सितारे की तरह है। उनकी आने वाली परियोजनाएं निश्चित रूप से दर्शकों को और अधिक प्रेरित करेंगी और सिनेमा की दुनिया में एक नया अध्याय जोड़ेंगी। उनकी कहानी हमें यह विश्वास दिलाती है कि सपने, मेहनत, और रचनात्मकता के साथ कुछ भी असंभव नहीं है।