भारत में 10 साल में 34.51 करोड़ बढ़ी मुसलमानों की आबादी: तथ्य, आंकड़े और विश्लेषण

भारत में 10 साल में 34.51 करोड़ बढ़ी मुसलमानों की आबादी: तथ्य, आंकड़े और विश्लेषण

पिछले दशक में भारत में मुस्लिम आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। प्यू रिसर्च सेंटर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2010 से 2020 तक मुस्लिम जनसंख्या में 34.51 करोड़ की वृद्धि हुई है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली धार्मिक आबादी में से एक है।

मुस्लिम आबादी वृद्धि के प्रमुख आंकड़े

प्यू रिसर्च सेंटर और अन्य विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर, निम्नलिखित आंकड़े इस वृद्धि को समझने में मदद करते हैं:

1. वैश्विक संदर्भ में मुस्लिम आबादी

  • 2010 की स्थिति: 2010 में वैश्विक मुस्लिम आबादी लगभग 159.97 करोड़ थी, जो विश्व की कुल आबादी का 23.9% थी।
  • 2020 तक वृद्धि: 2020 तक यह आंकड़ा बढ़कर 200 करोड़ हो गया, जो वैश्विक आबादी का 25.6% है। इस दौरान मुस्लिम जनसंख्या में 34.7 करोड़ की वृद्धि हुई, जिसमें भारत का योगदान 34.51 करोड़ बताया गया है।
  • वृद्धि दर: मुस्लिम आबादी में 21% की वृद्धि हुई, जो वैश्विक औसत जनसंख्या वृद्धि दर (10%) से दोगुनी है।

2. भारत में मुस्लिम आबादी

  • 2011 की जनगणना: 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में मुस्लिम आबादी 17.22 करोड़ थी, जो देश की कुल आबादी का 14.2% थी।
  • 2023 का अनुमान: टेक्निकल ग्रुप ऑन पॉपुलेशन प्रोजेक्शन की जुलाई 2020 की रिपोर्ट के आधार पर, 2023 में मुस्लिम आबादी 19.75 करोड़ होने का अनुमान था।
  • 2025 की स्थिति: प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, 2020 तक भारत में मुस्लिम आबादी 20 करोड़ को पार कर चुकी थी, और 34.51 करोड़ की वृद्धि का दावा हालिया रिपोर्टों में किया गया है। यह आंकड़ा 2050 तक 31.1 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।

3. प्रमुख राज्यों में मुस्लिम आबादी

  • पश्चिम बंगाल: 9.1 करोड़ की कुल जनसंख्या में 27% (लगभग 2.46 करोड़) मुसलमान हैं।
  • असम: 3.1 करोड़ की जनसंख्या में 34% (लगभग 1 करोड़) मुसलमान हैं।
  • केरल: 3.5 करोड़ की जनसंख्या में 26.56% (लगभग 90 लाख) मुसलमान हैं।
  • उत्तर प्रदेश और बिहार: इन राज्यों में भी मुस्लिम आबादी का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भारत की कुल मुस्लिम जनसंख्या में योगदान देता है।

मुस्लिम आबादी वृद्धि के कारण

1. उच्च प्रजनन दर

  • प्रजनन दर: 2015-2020 के आंकड़ों के अनुसार, एक मुस्लिम महिला औसतन 2.9 बच्चे जन्म देती है, जबकि गैर-मुस्लिम महिलाओं के लिए यह दर 2.2 है।
  • युवा आबादी: 2010 में भारतीय मुसलमानों की औसत आयु 22 वर्ष थी, जबकि हिंदुओं की 26 वर्ष और ईसाइयों की 28 वर्ष थी। यह युवा आबादी उच्च जन्म दर को बढ़ावा देती है।

2. ऐतिहासिक और सामाजिक कारक

  • ऐतिहासिक प्रवास: केरल और असम जैसे राज्यों में अरब व्यापारियों और ऐतिहासिक प्रवास के कारण मुस्लिम आबादी की मजबूत उपस्थिति रही है।
  • विभाजन का प्रभाव: 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन और बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) से निकटता ने पश्चिम बंगाल और असम में मुस्लिम आबादी को प्रभावित किया।

3. शहरीकरण और शिक्षा

  • साक्षरता दर: 2021-22 के पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के अनुसार, 7 वर्ष और उससे अधिक आयु के मुसलमानों में साक्षरता दर 77.7% है।
  • श्रम बल भागीदारी: मुस्लिम आबादी में श्रम बल भागीदारी दर 35.1% है, जो आर्थिक रूप से सक्रिय जनसंख्या को दर्शाता है।
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मिथक और हकीकत

1. मिथक: मुस्लिम आबादी हिंदुओं को पीछे छोड़ देगी

  • हकीकत: दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर राजीव रंजन गिरि और अन्य विशेषज्ञों के अनुसार, गणितीय मॉडल्स (जैसे पॉलीनॉमियल ग्रोथ मॉडल) दर्शाते हैं कि अगले 1,000 वर्षों में भी मुस्लिम आबादी हिंदुओं को पीछे नहीं छोड़ सकती। 2021 में हिंदू आबादी 115.9 करोड़ थी, जबकि मुस्लिम आबादी 21.3 करोड़ थी।
  • वृद्धि दर में कमी: 1991-2001 के बीच मुस्लिम आबादी की दशकीय वृद्धि दर 29.3% थी, जो 2001-2011 के बीच 24.6% हो गई। हिंदुओं की वृद्धि दर भी 20% से घटकर 16.8% हुई।

2. मिथक: मुस्लिम आबादी अनियंत्रित रूप से बढ़ रही है

  • हकीकत: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS) 2019 के अनुसार, मुस्लिम महिलाओं की प्रजनन दर में पिछले दो दशकों में हिंदुओं की तुलना में अधिक गिरावट आई है।
  • स्थिरता: 2011 की जनगणना के अनुसार, मुस्लिम आबादी का अनुपात 14.2% था, और 2023 में भी यह अनुपात स्थिर रहने का अनुमान है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

  • शिक्षा और रोजगार: मुस्लिम समुदाय में साक्षरता और श्रम बल भागीदारी बढ़ रही है, जो सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देता है।
  • स्वच्छता और संसाधन: 2020-21 के एकाधिक संकेतक सर्वेक्षण के अनुसार, 94.9% मुस्लिम आबादी को स्वच्छ पेयजल और 97.2% को बेहतर शौचालय सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
  • वैश्विक स्थिति: 2050 तक भारत में मुस्लिम आबादी 31.1 करोड़ होने का अनुमान है, जो इंडोनेशिया को पीछे छोड़कर दुनिया में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश बन सकता है।
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भविष्य के अनुमान

  • 2050 तक स्थिति: प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, 2050 तक भारत की मुस्लिम आबादी 31.1 करोड़ तक पहुंच सकती है, जो वैश्विक मुस्लिम जनसंख्या का 11% होगी।
  • हिंदू आबादी: उसी अवधि में हिंदू आबादी 130 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है, जो भारत की कुल जनसंख्या का 76.7% होगी।
  • वैश्विक प्रभाव: 2060 तक वैश्विक मुस्लिम आबादी 300 करोड़ के करीब पहुंच सकती है, जो ईसाई आबादी (300 करोड़) के बराबर होगी।

निष्कर्ष

पिछले 10 वर्षों में भारत में मुस्लिम आबादी में 34.51 करोड़ की वृद्धि का दावा प्यू रिसर्च सेंटर और हालिया X पोस्ट्स में किया गया है, लेकिन यह आंकड़ा भारत के संदर्भ में अतिशयोक्तिपूर्ण प्रतीत होता है। 2011 की जनगणना और 2023 के अनुमानों के आधार पर, भारत में मुस्लिम आबादी 17.22 करोड़ से बढ़कर 19.75 करोड़ हुई, और 2020 तक यह 20 करोड़ को पार कर चुकी थी।

उच्च प्रजनन दर, युवा आबादी, और ऐतिहासिक कारकों ने इस वृद्धि में योगदान दिया है। हालांकि, प्रजनन दर में कमी और स्थिर जनसंख्या अनुपात दर्शाते हैं कि यह वृद्धि अनियंत्रित नहीं है। भारत में धार्मिक विविधता को समझने और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए तथ्यों पर आधारित चर्चा आवश्यक है।

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  • flasahsamachar

    मैं संजना डोंगरे, हिंदी ब्लॉगर और कंटेंट क्रिएटर हूं। पिछले 5 सालों से टेक्नोलॉजी, डिजिटल मार्केटिंग और न्यूज़ पर 700+ आर्टिकल्स लिखे हैं। मेरा उद्देश्य है पाठकों तक सरल व भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना।

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