रिटायर्ड वैज्ञानिक से 1.29 करोड़ की ठगी: फर्जी CBI अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट, यूपी STF ने 4 को दबोचा
उत्तर प्रदेश के बरेली में एक रिटायर्ड वैज्ञानिक को फर्जी CBI अधिकारियों ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए 1.29 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया। इस सनसनीखेज मामले में यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह घटना डिजिटल अरेस्ट स्कैम के बढ़ते खतरे को उजागर करती है, जिसमें साइबर अपराधी सरकारी अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग कर लोगों को डराते हैं। इस लेख में हम इस मामले के विवरण, जांच की स्थिति, और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक नया साइबर अपराध है, जिसमें ठग वीडियो या ऑडियो कॉल के जरिए खुद को CBI, पुलिस, या TRAI जैसे सरकारी अधिकारियों के रूप में पेश करते हैं। वे पीड़ितों को डराने के लिए फर्जी वारंट, जाली दस्तावेज, और धमकियां देते हैं, जिससे पीड़ित अपनी बचत को ठगों के खातों में स्थानांतरित कर देते हैं। इस मामले में, रिटायर्ड वैज्ञानिक को मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोपों में फंसाने की धमकी दी गई थी।
घटना का विवरण
17 जून 2025 को, भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) से रिटायर्ड 72 वर्षीय वैज्ञानिक डॉ. शुकदेव नंदी को एक व्हाट्सएप कॉल प्राप्त हुई। कॉलर ने खुद को बेंगलुरु सिटी पुलिस का अधिकारी बताया और दावा किया कि वैज्ञानिक का आधार कार्ड मानव तस्करी और जॉब फ्रॉड से जुड़े सिम कार्ड प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल हुआ है। कॉलर के व्हाट्सएप डीपी पर पुलिस का लोगो था, जिसने कॉल को विश्वसनीय बनाया।

इसके बाद, वैज्ञानिक को एक अन्य फर्जी CBI अधिकारी “दया नायक” से जोड़ा गया, जिसने उन्हें डिजिटल अरेस्ट में होने की धमकी दी। तीन दिनों तक, ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए वैज्ञानिक को मानसिक दबाव में रखा और उनकी बचत को “ऑडिट” के लिए कई खातों में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया। कुल मिलाकर, वैज्ञानिक ने 1.29 करोड़ रुपये ठगों को ट्रांसफर कर दिए। 26 जून को धोखाधड़ी का एहसास होने पर उन्होंने बरेली के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की।
यूपी STF की कार्रवाई
यूपी STF ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5 जुलाई 2025 को लखनऊ के गोमतीनगर से चार आरोपियों—श्याम कुमार, राजनीश द्विवेदी, सुधीर कुमार चौरसिया, और महेंद्र प्रताप सिंह (उर्फ चंदन सिंह)—को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि ये ठग वाराणसी से संचालित एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे, जो क्रिप्टोकरेंसी (USDT) के जरिए अवैध धन को लॉन्डर करते थे। पुलिस ने उनके पास से मोबाइल फोन, ATM कार्ड, और चेकबुक बरामद किए। मास्टरमाइंड “अंकित” और “दीपक” की तलाश जारी है।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम का बढ़ता खतरा
यह पहला मामला नहीं है। 2025 में डिजिटल अरेस्ट स्कैम के कई मामले सामने आए हैं:
- मुंबई: एक रिटायर्ड पैथोलॉजिस्ट और उनकी बहन से 46 लाख रुपये की ठगी।
- पटना: एक रिटायर्ड प्रोफेसर से 48 घंटे में 3.07 करोड़ रुपये की ठगी।
- नोएडा: रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी से 1 करोड़ रुपये की ठगी।
- हैदराबाद: रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी से 8 लाख रुपये की ठगी।
ये मामले दर्शाते हैं कि साइबर ठग विशेष रूप से बुजुर्गों और रिटायर्ड पेशेवरों को निशाना बना रहे हैं, जो धमकियों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

बचाव के उपाय
इस तरह के स्कैम से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतें:
- अनजान कॉल्स पर भरोसा न करें: कोई भी सरकारी एजेंसी जैसे CBI या पुलिस डिजिटल अरेस्ट के लिए व्हाट्सएप या फोन कॉल का उपयोग नहीं करती।
- दस्तावेजों की जांच: किसी भी वारंट या पत्र की प्रामाणिकता को स्थानीय पुलिस स्टेशन में सत्यापित करें।
- पैसे ट्रांसफर न करें: किसी भी “वेरिफिकेशन” या “ऑडिट” के लिए पैसे ट्रांसफर करने से बचें।
- परिवार या दोस्तों से सलाह: संदिग्ध कॉल्स के बारे में तुरंत परिवार या दोस्तों से चर्चा करें।
- साइबर क्राइम हेल्पलाइन: भारत में साइबर क्राइम की शिकायत के लिए 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
- जागरूकता: डिजिटल अरेस्ट स्कैम के बारे में समाचार और सरकारी अलर्ट्स पढ़ें।
निष्कर्ष
रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ. शुकदेव नंदी से 1.29 करोड़ रुपये की ठगी का यह मामला डिजिटल अरेस्ट स्कैम के बढ़ते खतरे को दर्शाता है। यूपी STF की कार्रवाई से चार आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए जागरूकता और मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों की जरूरत है। नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध कॉल या धमकी की तुरंत शिकायत करनी चाहिए। ताजा अपडेट्स के लिए साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) और विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर नजर रखें।
साइबर अपराध से सावधान रहें, सुरक्षित रहें!