सरकार की LIC और पब्लिक सेक्टर बैंकों की हिस्सेदारी बेचने की तैयारी: पूरी जानकारी
भारत सरकार ने हाल ही में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पब्लिक सेक्टर बैंकों) में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना की घोषणा की है। यह कदम विनिवेश (Disinvestment) के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकारी खजाने को मजबूत करना और आर्थिक सुधारों को बढ़ावा देना है। इस लेख में हम इस योजना के विवरण, इसके प्रभाव, और इससे जुड़े विवादों पर चर्चा करेंगे, साथ ही सर्वश्रेष्ठ SEO प्रथाओं का पालन करेंगे।
सरकार की विनिवेश योजना: LIC और पब्लिक सेक्टर बैंक
भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महत्वाकांक्षी विनिवेश लक्ष्य निर्धारित किए हैं। सरकार ने LIC में अपनी हिस्सेदारी को और कम करने की योजना बनाई है, जो पहले ही 2022 में अपने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के माध्यम से आंशिक रूप से सूचीबद्ध हो चुकी है। इसके अलावा, कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, जैसे कि IDBI बैंक, में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को तेज करने की योजना है।
- एलआईसी विनिवेश: सरकार ने हाल ही में LIC में 6.5% हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की है, जिससे लगभग 35,000 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। यह कदम LIC के IPO के बाद दूसरा बड़ा विनिवेश है, जिसने 2022 में 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे।
- IDBI बैंक: वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, IDBI बैंक का विनिवेश दिसंबर 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिसमें वैश्विक स्तर पर 2-3 बड़े बैंकों को शामिल करने की योजना है।
- अन्य बैंक: सरकार अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों जैसे कि बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, और इंडियन ओवरसीज बैंक में भी अपनी हिस्सेदारी कम करने की योजना बना रही है।

विनिवेश का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि विनिवेश से निम्नलिखित लाभ होंगे:
- आर्थिक संसाधन जुटाना: विनिवेश से प्राप्त धन का उपयोग बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए किया जाएगा।
- बाजार दक्षता बढ़ाना: सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में निजी भागीदारी से प्रबंधन और दक्षता में सुधार की उम्मीद है।
- वित्तीय बोझ कम करना: सरकार का सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर वित्तीय बोझ कम होगा, जिससे वह अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान दे सकेगी।
विवाद और आलोचना
विनिवेश की इस नीति को लेकर विपक्ष और कई हितधारकों ने चिंता जताई है। कुछ प्रमुख आलोचनाएं इस प्रकार हैं:
- सार्वजनिक संपत्ति की बिक्री: विपक्ष का आरोप है कि सरकार “राष्ट्रीय संपत्ति” को निजी हाथों में बेच रही है। उदाहरण के लिए, X पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया है कि “LIC, एयर इंडिया, और रेलवे जैसी संपत्तियों को बेचा जा रहा है।”
- एलआईसी पर असर: कुछ X उपयोगकर्ताओं और विपक्षी नेताओं, जैसे कि राहुल गांधी, ने दावा किया है कि एलआईसी का पैसा “पूंजीपतियों” को लाभ पहुंचाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है, जैसे कि अडानी समूह को 5,000 करोड़ रुपये का निवेश।
- नौकरियों और सामाजिक सुरक्षा पर प्रभाव: आलोचकों का कहना है कि विनिवेश से नौकरियों में कमी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर असर पड़ सकता है, क्योंकि LIC जैसे संस्थान सामाजिक कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
LIC और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में विनिवेश के कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं:
- बाजार मूल्यांकन: LIC का बाजार मूल्य 2024 में 177 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन फरवरी 2025 तक इसमें 5.7% की गिरावट देखी गई। विनिवेश की खबरों से शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
- निवेशकों का विश्वास: विनिवेश से निजी और विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ सकता है, लेकिन यह आम जनता के बीच असंतोष का कारण भी बन सकता है।
- आर्थिक विकास: सरकार का दावा है कि विनिवेश से आर्थिक विकास को गति मिलेगी, लेकिन इसका दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि जुटाए गए धन का उपयोग कैसे किया जाता है।

जनता की प्रतिक्रिया
X पर कई पोस्ट्स में जनता की नाराजगी देखी गई है। कुछ उपयोगकर्ताओं ने इसे “राष्ट्र बिक्री” का हिस्सा बताया है, जबकि अन्य ने सरकार पर “आम आदमी की गाढ़ी कमाई” को निजी कंपनियों को सौंपने का आरोप लगाया है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विनिवेश से इन संस्थानों की कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है।
निष्कर्ष
सरकार की LIC और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में हिस्सेदारी बेचने की योजना आर्थिक सुधारों का एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह विवादों से घिरी हुई है। जहां सरकार इसे आर्थिक दक्षता और संसाधन जुटाने का साधन मानती है, वहीं आलोचक इसे राष्ट्रीय संपत्ति की बिक्री के रूप में देखते हैं। इस नीति का भविष्य और इसका अर्थव्यवस्था पर प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार इस प्रक्रिया को कितनी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ लागू करती है।
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