उत्पत्ति और पृष्ठभूमि
JN.1 वैरिएंट, ओमिक्रॉन BA.2.86 (जिसे अनौपचारिक रूप से “पिरोला” कहा जाता है) का एक उप-वंश (sub-lineage) है, जिसे पहली बार अगस्त 2023 में डेनमार्क में पहचाना गया था। यह वैरिएंट अपनी तेजी से फैलने की क्षमता और प्रतिरक्षा से बचने (immune evasion) की विशेषता के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा दिसंबर 2023 में “वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट” (VOI) के रूप में वर्गीकृत किया गया। JN.1 में लगभग 30 उत्परिवर्तन (mutations) हैं, विशेष रूप से स्पाइक प्रोटीन में एक विशिष्ट L455S उत्परिवर्तन, जो इसे अन्य वैरिएंट्स की तुलना में अधिक संक्रामक बनाता है। यह BA.2.86 से केवल एक या दो उत्परिवर्तनों में भिन्न है, लेकिन ये बदलाव इसे और अधिक कुशलता से फैलने में सक्षम बनाते हैं। 2024 की शुरुआत तक, JN.1 संयुक्त राज्य अमेरिका में 60-93% कोविड मामलों और वैश्विक स्तर पर अधिकांश मामलों का कारण बन गया था। हाल के महीनों में, इसके उप-वंश LF.7 और NB.1.8 ने एशिया में तेजी से प्रसार किया है।

वर्तमान प्रसार और स्थिति
2025 में, JN.1 और इसके उप-वंश (LF.7 और NB.1.8) ने एशिया, विशेष रूप से सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग, थाईलैंड, और भारत में कोविड-19 मामलों में वृद्धि को प्रेरित किया है। भारत में, 19 मई 2025 तक 257 सक्रिय मामले दर्ज किए गए, जिनमें केरल (69 मामले), महाराष्ट्र (44 मामले), और तमिलनाडु (34 मामले) सबसे अधिक प्रभावित हैं। मुंबई में हाल ही में दो कोविड-संबंधित मौतें दर्ज की गईं, दोनों रोगियों को गंभीर सह-रोग (comorbidities) थे। सिंगापुर में मई 2025 के पहले सप्ताह में मामलों में 28% की वृद्धि देखी गई, और हॉन्गकॉन्ग में टेस्ट पॉजिटिविटी दर 6.21% से बढ़कर 13.66% हो गई। चीन में फरवरी 2024 में JN.1 के कारण 358 गंभीर मामले और 22 मौतें दर्ज की गईं। WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि कमजोर होती प्रतिरक्षा (waning immunity), सामाजिक मेलजोल में वृद्धि, और निवारक उपायों में ढील के कारण है।
लक्षण
JN.1 वैरिएंट के लक्षण अन्य ओमिक्रॉन उप-वंशों के समान हैं, लेकिन कुछ मामलों में अधिक थकान और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएँ (जैसे दस्त) देखी गई हैं। सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
- बुखार (Fever)
- गले में खराश (Sore throat)
- सूखी खांसी (Dry cough)
- नाक बहना या बंद नाक (Runny or congested nose)
- सिरदर्द (Headache)
- थकान और अत्यधिक कमजोरी (Fatigue and exhaustion)
- स्वाद या गंध की हानि (Loss of taste or smell, हालांकि यह डेल्टा वैरिएंट की तुलना में कम आम है)
- कुछ मामलों में भूख की कमी और लगातार मतली (Loss of appetite and nausea)
- यूके के स्वास्थ्य अधिकारियों ने चिंता और नींद में कठिनाई (anxiety and trouble sleeping) को भी नए लक्षणों के रूप में बताया है।

अधिकांश मामले हल्के हैं और घर पर आराम व हाइड्रेशन से ठीक हो जाते हैं, लेकिन बुजुर्ग, कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग, और सह-रोगों (जैसे मधुमेह, हृदय रोग) से पीड़ित व्यक्तियों में जटिलताओं का जोखिम अधिक है। लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 2-14 दिनों के भीतर दिखाई देते हैं, औसतन 3-5 दिन में।
निवारण और उपचार
- टीकाकरण: वर्तमान कोविड-19 टीके (जैसे XBB.1.5 आधारित बूस्टर) JN.1 के खिलाफ गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करते हैं, हालांकि प्रतिरक्षा से बचने की इसकी क्षमता के कारण पूर्ण सुरक्षा सीमित हो सकती है। विशेषज्ञ बूस्टर डोज़ की सलाह देते हैं, खासकर उच्च जोखिम वाले समूहों के लिए।
- निवारक उपाय:
- भीड़-भाड़ वाली जगहों पर N-95 मास्क पहनें।
- बार-बार हाथ धोना या सैनिटाइज़ करना।
- बीमार लोगों से दूरी बनाए रखना।
- खराब वेंटिलेशन वाले स्थानों से बचना।
- लक्षण दिखने पर तुरंत टेस्ट करवाएँ और आइसोलेट करें।
- उपचार: JN.1 के लिए उपचार अन्य कोविड वैरिएंट्स के समान है, जिसमें शामिल हैं:
- हल्के मामलों में घर पर आराम और हाइड्रेशन।
- गंभीर मामलों में एंटीवायरल दवाएँ (जैसे Paxlovid) और ऑक्सीजन थेरेपी।
- Paxlovid को लक्षण शुरू होने के 5 दिनों के भीतर लेना प्रभावी है।
- भारत में सलाह: स्वास्थ्य मंत्रालय ने निगरानी बढ़ा दी है, और दिल्ली, केरल, और महाराष्ट्र में सलाह जारी की गई है कि फ्लू जैसे लक्षणों वाले लोग भीड़ से बचें और टेस्ट करवाएँ।
प्रभाव और जोखिम
JN.1 की उच्च संक्रामकता इसे चिंता का विषय बनाती है, क्योंकि यह टीकाकरण और पूर्व संक्रमण से प्राप्त प्रतिरक्षा को आंशिक रूप से बायपास कर सकता है। हालांकि, WHO और CDC के अनुसार, यह अन्य वैरिएंट्स की तुलना में अधिक गंभीर बीमारी का कारण नहीं बनता। भारत में, अधिकांश मामले हल्के हैं, और अस्पताल में भर्ती की दर कम है। फिर भी, कमजोर समूहों (बुजुर्ग, सह-रोग वाले लोग) में गंभीर बीमारी का जोखिम बना रहता है। X पर कुछ यूजर्स ने चेतावनी दी है कि JN.1 मानव प्रतिरक्षा को कमजोर कर सकता है, लेकिन यह दावा वैज्ञानिक रूप से पुष्ट नहीं है। भारत में, टीकाकरण की दर और बूस्टर डोज़ की कमी (कई लोगों ने आखिरी टीका एक साल पहले लिया) ने इस वृद्धि को बढ़ावा दिया है।