जेल में छापा पड़ा तो कैदी ने निगल लिया मोबाइल: शिवमोग्गा जेल में चौंकाने वाली घटना, जानें पूरा मामला
कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले की हाई-सिक्योरिटी जेल से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जेल में छापेमारी के दौरान एक कैदी ने पकड़े जाने के डर से मोबाइल फोन निगल लिया। बाद में डॉक्टरों ने सर्जरी कर उसके पेट से फोन निकाला। इस घटना ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना का विवरण
24 जून 2025 को शिवमोग्गा की हाई-सिक्योरिटी जेल में 30 वर्षीय कैदी दौलत उर्फ गुंडा ने पेट में तेज दर्द की शिकायत की। पूछताछ में उसने बताया कि उसने कुछ निगल लिया था। जब उसे सरकारी मैकगन अस्पताल ले जाया गया, तो एक्स-रे में खुलासा हुआ कि उसके पेट में 3 इंच लंबा और 1 इंच चौड़ा मोबाइल फोन था। डॉक्टरों ने 8 जुलाई 2025 को सर्जरी कर फोन को सफलतापूर्वक निकाला और इसे सीलबंद लिफाफे में जेल अधिकारियों को सौंप दिया।
कैसे पहुंचा मोबाइल जेल में?
जेल प्रशासन के अनुसार, हाई-सिक्योरिटी जेल में मोबाइल फोन जैसे प्रतिबंधित सामान की मौजूदगी गंभीर सुरक्षा चूक को दर्शाती है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है। शक है कि जेल कर्मचारियों की मिलीभगत या लापरवाही के कारण मोबाइल फोन जेल के अंदर पहुंचा। सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है, और जेल स्टाफ से पूछताछ चल रही है।

जेल में मोबाइल: बार-बार होने वाली समस्या
यह पहली बार नहीं है जब जेल में मोबाइल फोन से संबंधित घटनाएं सामने आई हैं। उदाहरण के लिए:
- अजमेर हाई-सिक्योरिटी जेल (2022): बाथरूम की टाइल के नीचे मोबाइल और चार्जर बरामद हुआ।
- एटा जिला जेल (2015): तिहरे हत्याकांड के आरोपी के पास मोबाइल और चार सिम मिलने पर कैदियों और जेल स्टाफ के बीच हिंसक झड़प हुई।
- बेगूसराय जेल (2015): डीएम और एसपी की छापेमारी में कैदियों के पास मोबाइल और अन्य प्रतिबंधित सामान बरामद हुए।
ये घटनाएं जेलों में सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में मोबाइल फोन का उपयोग अपराधियों द्वारा बाहर की दुनिया से संपर्क बनाए रखने, अपराधों की योजना बनाने, और रंगदारी मांगने के लिए किया जाता है।
पुलिस और जेल प्रशासन की कार्रवाई
जेल अधिकारी रंगनाथ पी ने तुंगानगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की, जिसके बाद पुलिस ने कैदी दौलत के खिलाफ मामला दर्ज किया। जांच में निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है:
- मोबाइल फोन जेल के अंदर कैसे पहुंचा?
- क्या जेल कर्मचारियों की मिलीभगत थी?
- क्या पहले भी ऐसी घटनाएं छिपाई गई हैं?
- जेल में सीसीटीवी और अन्य सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता।
पुलिस और जेल प्रशासन की संयुक्त टीम अब सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
जेलों में मोबाइल फोन की समस्या के कारण
जेलों में मोबाइल फोन की मौजूदगी के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
- कर्मचारियों की लापरवाही: अपर्याप्त तलाशी और निगरानी के कारण प्रतिबंधित सामान जेल में पहुंच जाता है।
- मिलीभगत: कुछ मामलों में जेल कर्मचारी रिश्वत लेकर कैदियों को मो Hawkins
- पुरानी तकनीक: कई जेलों में पुराने स्कैनर और जैमर का उपयोग होता है, जो अब अप्रभावी हो चुके हैं।

सुधार के लिए सुझाव
इस घटना ने जेल सुधारों की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है। कुछ सुझाव हैं:
- आधुनिक तकनीक: जेलों में उन्नत जैमर और मेटल डिटेक्टर लगाए जाएं।
- नियमित तलाशी: कैदियों और बैरकों की नियमित और आकस्मिक तलाशी।
- कर्मचारी प्रशिक्षण: जेल स्टाफ को बेहतर प्रशिक्षण और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- सीसीटीवी निगरानी: सभी क्षेत्रों में प्रभावी सीसीटीवी कवरेज और रियल-टाइम मॉनिटरिंग।
- कानूनी कार्रवाई: मोबाइल लाने वाले कर्मचारियों और कैदियों पर सख्त कार्रवाई।
निष्कर्ष
शिवमोग्गा जेल की इस घटना ने एक बार फिर जेलों में सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है। कैदी दौलत द्वारा मोबाइल निगलने की यह विचित्र घटना न केवल हैरान करने वाली है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जेलों में प्रतिबंधित सामान को रोकने के लिए और सख्त कदम उठाने की जरूरत है। पुलिस और जेल प्रशासन की जांच से उम्मीद है कि इस मामले की तह तक पहुंचा जाएगा।