पटना अस्पताल गोलीबारी: चिराग पासवान ने नीतीश सरकार पर साधा निशाना, कहा- अपराधियों का मनोबल आसमान पर
पटना के पारस अस्पताल में 17 जुलाई 2025 को हुई एक सनसनीखेज गोलीबारी की घटना ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना में पांच सशस्त्र हमलावरों ने एक कैदी, चंदन मिश्रा, जो मेडिकल पैरोल पर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती था, को गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना ने न केवल बिहार की सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर किया, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी। केंद्रीय मंत्री और एनडीए सहयोगी चिराग पासवान ने इस घटना को लेकर नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जद(यू)-बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बिहार में अपराधियों का मनोबल आसमान छू रहा है, और यह घटना कानून-व्यवस्था की बदहाली का स्पष्ट प्रमाण है।
पटना अस्पताल गोलीबारी: क्या हुआ?
पटना के शास्त्री नगर स्थित पारस अस्पताल में सुबह करीब 7:30 बजे पांच अज्ञात हमलावरों ने अस्पताल के आईसीयू में घुसकर चंदन मिश्रा को गोलियों से भून दिया। चंदन मिश्रा, बक्सर जिले का एक कुख्यात अपराधी था, जिसके खिलाफ कई हत्या के मामले दर्ज थे। वह मेडिकल आधार पर 15 दिन की पैरोल पर था और उसका पैरोल 18 जुलाई को समाप्त होने वाला था। सीसीटीवी फुटेज में हमलावरों को हथियारों के साथ अस्पताल में घुसते, चंदन के कमरे में गोलीबारी करते और फिर भागते हुए देखा गया। इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं, क्योंकि हमलावर बिना किसी रोक-टोक के अंदर घुस गए और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।
चिराग पासवान का नीतीश सरकार पर हमला
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता चिराग पासवान ने इस घटना को बिहार में कानून-व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बताया। उन्होंने अपने आधिकारिक X हैंडल पर लिखा, “बिहार में कानून व्यवस्था आज एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। प्रतिदिन हत्याएं हो रही हैं, अपराधियों का मनोबल आसमान पर है। पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली समझ से परे है।” उन्होंने आगे कहा कि पटना के रिहायशी इलाके में स्थित पारस अस्पताल में हुई गोलीबारी इस बात का सबूत है कि अपराधी अब खुलेआम कानून और प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं। चिराग ने उम्मीद जताई कि प्रशासन जल्द ही कड़े कदम उठाएगा ताकि कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।
बिहार में बढ़ता अपराध: चिंता का विषय
पटना अस्पताल में हुई यह घटना बिहार में बढ़ते अपराधों की एक कड़ी मात्र है। हाल के हफ्तों में, बिहार की राजधानी पटना में कई हत्याओं की खबरें सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, इस महीने की शुरुआत में भाजपा नेता और व्यवसायी गोपाल खेमका की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा, राम कृष्णा नगर इलाके में एक अन्य भाजपा नेता विक्रम झा की भी हत्या हुई थी। इन घटनाओं ने बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का मौका दिया है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया, “क्या बिहार में कोई भी कहीं भी सुरक्षित है?”

पुलिस जांच और सियासी बयानबाजी
पटना पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह प्रतीत होता है कि हमला चंदन शेरु गिरोह के सदस्यों द्वारा किया गया था, जो चंदन मिश्रा का प्रतिद्वंद्वी गिरोह है। पुलिस ने यह भी संदेह जताया है कि हमलावरों को अस्पताल की सुरक्षा कर्मियों की मिलीभगत हो सकती है, क्योंकि हथियारों के साथ अस्पताल में प्रवेश करना आसान नहीं है। इस दिशा में भी जांच की जा रही है।
वहीं, इस घटना ने बिहार में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। विपक्षी दल, विशेष रूप से राजद और कांग्रेस, ने नीतीश कुमार सरकार पर कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने इस घटना का सीसीटीवी फुटेज साझा करते हुए कहा कि बिहार में प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं बची है। दूसरी ओर, बिहार के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने इस बढ़ते अपराध को “मौसमी कमी” से जोड़कर एक अजीबोगरीब बयान दिया, जिसकी जमकर आलोचना हो रही है।
बिहार में कानून-व्यवस्था: एक विश्लेषण
बिहार में हाल के महीनों में अपराध की घटनाओं में वृद्धि ने राज्य की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपराधियों के बढ़ते हौसले का कारण पुलिस और प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली, अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, और राजनीतिक अस्थिरता हो सकती है। पटना जैसे बड़े शहर में, जहां अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर भी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही, वहां आम जनता की सुरक्षा का सवाल और भी गंभीर हो जाता है। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इन घटनाओं ने सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं।

निष्कर्ष
पटना के पारस अस्पताल में चंदन मिश्रा की हत्या ने बिहार की कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। चिराग पासवान का यह बयान कि “अपराधियों का मनोबल आसमान पर है” न केवल एक राजनीतिक कटाक्ष है, बल्कि यह बिहार की वर्तमान स्थिति का कड़वा सच भी दर्शाता है। इस घटना ने न केवल नीतीश सरकार को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि यह भी सवाल उठाया है कि क्या बिहार में आम लोग और संवेदनशील स्थान सुरक्षित हैं? पुलिस जांच और सरकार के अगले कदम इस मामले में निर्णायक होंगे।