पाकिस्तान की पासपोर्ट रैंकिंग में जबरदस्त सुधार, भारत के लिए चिंता की बात – यहां देखिए पूरी लिस्ट,पाकिस्तान की बड़ी छलांग,भारत को झटका – फिसली रैंकिंग,टॉप 10 सबसे ताकतवर पासपोर्ट 2025 Henley Passport Index के अनुसार,पाकिस्तान की प्रगति का कारण क्या है,भारत के लिए चेतावनी का संकेत,
नई दिल्ली: ग्लोबल पासपोर्ट रैंकिंग 2025 की ताजा रिपोर्ट सामने आते ही पाकिस्तान में जश्न का माहौल बन गया है। हेनले पासपोर्ट इंडेक्स (Henley Passport Index) द्वारा जारी इस लिस्ट में पाकिस्तान की रैंकिंग में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है, जबकि भारत की स्थिति पिछली बार के मुकाबले थोड़ी कमजोर हुई है। यह रिपोर्ट दुनियाभर के पासपोर्ट की ताकत को निर्धारित करती है कि कौन से देश के नागरिक कितने देशों में वीजा फ्री या वीजा ऑन अराइवल सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
पाकिस्तान की बड़ी छलांग
पाकिस्तान ने इस साल पासपोर्ट रैंकिंग में 5 अंकों की बढ़त हासिल की है। अब पाकिस्तानी नागरिक 40 देशों में बिना वीजा या वीजा ऑन अराइवल के यात्रा कर सकते हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
- पाकिस्तान की नई रैंकिंग: 94वां स्थान
- पिछले साल की रैंकिंग: 99वां स्थान

भारत को झटका – फिसली रैंकिंग
वहीं दूसरी ओर, भारत की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय पासपोर्ट अब 57 देशों में वीजा-फ्री या वीजा ऑन अराइवल एक्सेस देता है, जो पहले 60 हुआ करता था।
- भारत की नई रैंकिंग: 85वां स्थान
- पिछली रैंकिंग: 81वां स्थान
यह गिरावट कई देशों के वीजा पॉलिसी में बदलाव और वैश्विक डिप्लोमैटिक समीकरणों में भारत की मौजूदा स्थिति से जोड़ी जा रही है।
टॉप 10 सबसे ताकतवर पासपोर्ट 2025 (Henley Passport Index के अनुसार)
| रैंक | देश का नाम | वीजा फ्री/ |
| 1 | जापान | 193 |
| 2 | सिंगापुर | 192 |
| 3 | जर्मनी | 191 |
| 4 | दक्षिण कोरिया | 190 |
| 5 | स्पेन | 189 |
| 6 | फिनलैंड | 189 |
| 7 | इटली | 188 |
| 8 | फ्रांस | 188 |
| 9 | स्वीडन | 187 |
| 10 | नीदरलैंड | 187 |
पाकिस्तान की प्रगति का कारण क्या है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में कई अफ्रीकी और मध्य एशियाई देशों के साथ वीजा समझौते किए हैं। इसके अलावा, चीन और खाड़ी देशों के साथ बढ़ती नजदीकियां भी इस प्रगति में सहायक रही हैं।

भारत के लिए चेतावनी का संकेत
जहां एक ओर पाकिस्तान अपने पासपोर्ट की ताकत बढ़ाने में सफल रहा है, वहीं भारत को इस दिशा में दोबारा से रणनीति बनाने की जरूरत है। वीजा समझौतों, वैश्विक डिप्लोमेसी और कांसुलर संबंधों को मजबूत कर भारत फिर से अपनी रैंकिंग में सुधार ला सकता है।