पायलट राजवीर सिंह चौहान उत्तराखंड हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए भारतीय सेना में 15 साल से अधिक की सेवा की
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में रविवार, 15 जून 2025 को सुबह हुए एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में सात लोगों की मौत हो गई, जिसमें पायलट राजवीर सिंह चौहान भी शामिल थे। इस हादसे ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। राजवीर सिंह चौहान, जो जयपुर के शास्त्री नगर के निवासी थे, ने भारतीय सेना में 15 साल से अधिक समय तक सेवा दी थी और विभिन्न इलाकों में उड़ान मिशनों में उनकी व्यापक विशेषज्ञता थी।
पायलट राजवीर सिंह चौहान का प्रोफाइल
राजवीर सिंह चौहान (37) ने अक्टूबर 2024 से आर्यन एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ पायलट के रूप में काम शुरू किया था। वे बेल 407 हेलिकॉप्टर के कप्तान थे, जो चारधाम यात्रा के लिए केदारनाथ से गुप्तकाशी जा रहा था, जब यह हादसा गौरीकुंड के पास हुआ। उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, चौहान ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से रिटायरमेंट लिया था। सेना में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने विभिन्न प्रकार के हेलिकॉप्टरों और उनके रखरखाव में प्रशिक्षण प्राप्त किया था। वे जटिल सैन्य अभियानों को संचालित करने, जोखिम मूल्यांकन, और संसाधन प्रबंधन में कुशल थे। उनकी विशेषज्ञता विभिन्न इलाकों में उड़ान मिशनों को संभालने तक फैली हुई थी, जो उन्हें एक अनुभवी और कुशल पायलट बनाती थी।

पायलट राजवीर सिंह चौहान हेलिकॉप्टर दुर्घटना का विवरण
हादसा रविवार सुबह करीब 5:20 बजे हुआ, जब आर्यन एविएशन का बेल 407 हेलिकॉप्टर केदारनाथ धाम से गुप्तकाशी के लिए उड़ान भरने के बाद गौरीकुंड के पास जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलिकॉप्टर में सात लोग सवार थे, जिनमें पायलट चौहान, एक मंदिर समिति कर्मचारी, और महाराष्ट्र के जायसवाल परिवार के तीन सदस्य शामिल थे।
उत्तराखंड के पुलिस महानिरीक्षक (कानून और व्यवस्था) नीलेश भारने ने बताया कि हेलिकॉप्टर का संपर्क उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही टूट गया, और यह दुर्घटना का शिकार हो गया। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू की गई है, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, खराब मौसम और कम दृश्यता संभावित कारण हो सकते हैं।

दुर्घटना में सभी सात लोगों की मौत हो गई, और शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण उनकी पहचान में कठिनाई हो रही है। उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (UCADA) ने बयान जारी कर कहा कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। शवों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट किए जाएंगे, जिसके बाद उन्हें परिजनों को सौंपा जाएगा।
पायलट राजवीर सिंह चौहान पर बचाव कार्य और सरकारी प्रतिक्रिया
हादसे की सूचना मिलते ही राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), सेना, और स्थानीय पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, “केदारनाथ के पास गौरीकुंड में हुए हेलिकॉप्टर हादसे में कुछ लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है। स्थानीय प्रशासन और अन्य बचाव दलों को राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। मैं बाबा केदार से सभी यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करता हूं।” उन्होंने हेलिकॉप्टर संचालन के लिए कड़े मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने के भी निर्देश दिए।

पायलट राजवीर सिंह चौहान हेलिकॉप्टर दुर्घटना पर नेताओं और परिजनों की प्रतिक्रिया
हादसे की खबर मिलते ही चौहान के परिजनों और दोस्तों ने उनके शास्त्री नगर स्थित आवास पर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ट्वीट कर दुख व्यक्त किया, “केदारनाथ में हेलिकॉप्टर दुर्घटना के कारण राजस्थान के पायलट और अन्य श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है। बाबा केदार दिवंगत आत्माओं को अपने चरणों में स्थान दें और शोकग्रस्त परिवारों को यह आघात सहन करने की शक्ति प्रदान करें।” पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा, “केदारनाथ के पास हेलिकॉप्टर दुर्घटना में जयपुर निवासी पायलट राजवीर सिंह चौहान सहित सात लोगों की मृत्यु अत्यंत दुखद है। मेरी गहरी संवेदनाएं शोकग्रस्त परिवारों के साथ हैं।”
राजस्थान के कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन राठौर ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा, “जयपुर के पायलट लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) राजवीर सिंह चौहान की केदारनाथ जाते समय हेलिकॉप्टर दुर्घटना में असामयिक मृत्यु अत्यंत दुखद है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें और परिवार को इस कठिन समय में शक्ति प्रदान करें।”
पायलट राजवीर सिंह चौहान का निजी जीवन
सूत्रों के अनुसार, राजवीर सिंह चौहान हाल ही में जुड़वां बच्चों के पिता बने थे। उनके पिता गोविंद सिंह को उनके सहकर्मी से हादसे की जानकारी मिली। परिवार और दोस्तों के बीच उनकी मृत्यु की खबर ने शोक की लहर दौड़ा दी। चौहान के अनुभव और समर्पण को उनके सहकर्मियों और सेना में उनके साथ काम करने वालों ने हमेशा सराहा था।
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