पुरानी गाड़ियों पर बैन सही नहीं: CSE ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल यहां पढ़ें पूरा मामला,क्या है मामला,CSE ने क्या कहा,मध्यम वर्ग पर असर,पर्यावरण के लिए सही रास्ता क्या?
नई दिल्ली: जुलाई 2025 – भारत में पुरानी प्राइवेट गाड़ियों पर बैन को लेकर चल रही चर्चा के बीच सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) ने सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। CSE का कहना है कि सिर्फ वाहन की उम्र के आधार पर बैन लगाना विज्ञान और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से सही नहीं है।
क्या है मामला?
भारत सरकार ने हाल ही में एक प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत 15 साल से ज्यादा पुरानी प्राइवेट गाड़ियों पर स्वचालित रूप से प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है, चाहे वे गाड़ियां अच्छी कंडीशन में क्यों न हों। इस फैसले का उद्देश्य प्रदूषण कम करना बताया गया है।लेकिन CSE ने इस फैसले को न केवल अव्यावहारिक बताया है, बल्कि यह भी कहा है कि इससे मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

CSE ने क्या कहा?
CSE की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा:
- “सिर्फ गाड़ी की उम्र देखकर उसकी वैधता तय करना तर्कसंगत नहीं है। अगर वाहन अच्छी हालत में है और प्रदूषण मानकों पर खरा उतरता है, तो उसे जबरन हटाना बेकार की नीति है।”
- वाहनों की फिटनेस जांच को प्राथमिकता दे,
- गाड़ियों की इंस्पेक्शन सिस्टम को मजबूत बनाए,
- और कंडीशन आधारित पॉलिसी लागू करे।
मध्यम वर्ग पर असर
- हर 5-7 साल में नई गाड़ी नहीं खरीद सकते,
- और जिनकी पुरानी गाड़ियां अभी भी ठीक से काम कर रही हैं।
CSE का कहना है कि यह नीति सामाजिक और आर्थिक असमानता को बढ़ा सकती है।

पर्यावरण के लिए सही रास्ता क्या?
- पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सिस्टम को सख्त किया जाए,
- फिटनेस टेस्टिंग सिस्टम को पारदर्शी बनाया जाए
- स्क्रैपिंग नीतियों को स्वैच्छिक और इंसेंटिव आधारित किया जाए।