भारत में पहला स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप, जिसे “मेड-इन-इंडिया” चिप के रूप में जाना जाता है, 2025 के अंत तक लॉन्च होने की उम्मीद है। यह भारत के आत्मनिर्भर भारत पहल और सेमीकंडक्टर मिशन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करना है।
चिप का प्रकार और उपयोग
भारत का पहला स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप, जो 28-90 नैनोमीटर (nm) तकनीक पर आधारित है, विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह चिप उच्च प्रदर्शन और कॉम्पैक्ट ट्रांजिस्टर डिज़ाइन प्रदान करती है, जिससे एक चिप पर अधिक ट्रांजिस्टर फिट हो सकते हैं, जो इसे ऊर्जा-कुशल और शक्तिशाली बनाता है। इसका उपयोग ऑटोमोटिव उद्योग में इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वचालित ड्राइविंग सिस्टम, दूरसंचार में 5G उपकरण, बिजली क्षेत्र में स्मार्ट ग्रिड सिस्टम, और रेलवे में सिग्नलिंग और नियंत्रण प्रणालियों के लिए होगा। इसके अलावा, माइंडग्रोव टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित ‘सिक्योर आईओटी’ सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) स्मार्ट उपकरणों, जैसे IoT-आधारित घरेलू उपकरण, सुरक्षा प्रणालियाँ, और औद्योगिक स्वचालन के लिए उपयुक्त है। ये चिप्स भारतीय मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) को स्वदेशी तकनीक अपनाने में सक्षम बनाएँगी, जिससे आयात निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थिति हासिल करेगा। यह तकनीकी प्रगति रक्षा, अंतरिक्ष, और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे स्मार्टफोन और लैपटॉप में भी योगदान देगी।

चिप का उत्पादन स्थान:
- धोलेरा, गुजरात: टाटा समूह और ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्प (PSMC) के सहयोग से धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (SIR) में भारत का पहला सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इस संयंत्र से दिसंबर 2026 तक चिप उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
- सानंद, गुजरात: माइक्रोन टेक्नोलॉजी द्वारा एक चिप असेंबली और टेस्टिंग सुविधा स्थापित की जा रही है, जो दिसंबर 2024 तक चिप उत्पादन शुरू कर सकती है। इस संयंत्र में 2.75 अरब डॉलर (लगभग 22,540 करोड़ रुपये) का निवेश होगा, जिसमें माइक्रोन 825 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी, और शेष राशि केंद्र और गुजरात सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी।
- जगिरोआद, असम: टाटा समूह असम के मोरिगांव में एक और सेमीकंडक्टर सुविधा स्थापित कर रहा है, जो प्रतिदिन 4.83 करोड़ चिप्स का उत्पादन करेगा। यह संयंत्र 2026 तक “मेड इन इंडिया, मेड इन असम” चिप्स का उत्पादन शुरू करेगा।
भारत का चिप निवेश और सरकारी समर्थन:
भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए 76,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।माइक्रोन की सानंद सुविधा को मॉडिफाइड असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) स्कीम के तहत मंजूरी दी गई है, जिसमें कुल परियोजना लागत का 50% केंद्र सरकार और 20% गुजरात सरकार द्वारा वित्तीय सहायता दी जाएगी।टाटा समूह और PSMC की धोलेरा परियोजना में 1.54 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है, जो वेदांता और फॉक्सकॉन के संयुक्त उद्यम का हिस्सा है।सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 50% तक की वित्तीय सहायता की घोषणा की है।
भारत की प्रमुख कंपनियाँ और सहयोग:
- टाटा समूह: धोलेरा और असम में संयंत्र स्थापित करने के लिए ताइवान की PSMC के साथ साझेदारी।
- माइक्रोन टेक्नोलॉजी: सानंद में चिप असेंबली और टेस्टिंग सुविधा।
- वेदांता और फॉक्सकॉन: धोलेरा में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण इकाई।
- सहस्र सेमीकंडक्टर्स: भारत की पहली सेमीकंडक्टर उत्पादन कंपनी के रूप में चिप्स का उत्पादन शुरू कर चुकी है।
- माइंडग्रोव टेक्नोलॉजीज: स्वदेशी SoC ‘सिक्योर आईओटी’ विकसित कर रही है।

भारत के चिप का लिए महत्व और प्रभाव:
- आर्थिक प्रभाव: भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन से स्मार्टफोन, लैपटॉप, चिकित्सा उपकरण, और गेमिंग हार्डवेयर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतें कम होंगी। यह भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक भरोसेमंद भागीदार बनाएगा।
- आयात पर निर्भरता में कमी: वर्तमान में भारत अपनी सभी चिप्स का आयात करता है, लेकिन स्वदेशी उत्पादन से ताइवान, चीन, और दक्षिण कोरिया पर निर्भरता कम होगी।
- रोजगार सृजन: इन परियोजनाओं से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। उदाहरण के लिए, माइक्रोन का सानंद संयंत्र 5,000 प्रत्यक्ष और 15,000 अप्रत्यक्ष नौकरियाँ पैदा करेगा।
- वैश्विक स्थिति: भारत का लक्ष्य 2026 तक 64 अरब डॉलर के सेमीकंडक्टर बाजार तक पहुँचना है, जिसमें 19% की वार्षिक वृद्धि दर का अनुमान है।
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भारत के लिए चुनौतियाँ
भारत में पहली मेड-इन-इंडिया सेमीकंडक्टर चिप के विकास और उत्पादन में कई चुनौतियाँ हैं। सबसे बड़ी चुनौती है चिप निर्माण की जटिल प्रक्रिया, जिसमें 400-500 चरण शामिल हैं। किसी एक चरण में त्रुटि से करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता की आवश्यकता है, जो भारत में अभी सीमित है। दूसरी चुनौती संसाधनों की उपलब्धता है, जैसे शुद्ध जल, निर्बाध बिजली आपूर्ति, और पैलेडियम जैसे विशेष धातु, जो मुख्य रूप से रूस जैसे देशों से आयात किए जाते हैं। इसके अलावा, भारत में उन्नत फैब्रिकेशन सुविधाओं का अभाव रहा है; ISRO और DRDO के पास सीमित फैब्स हैं, जो केवल रक्षा और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए हैं। कुशल कार्यबल की कमी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी चुनौती है। इनके बावजूद, टाटा, माइक्रोन, और सरकार के सहयोग से भारत इन बाधाओं को पार करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
भारत के लिए चिप की उत्पादन क्षमता:
धोलेरा संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन 50,000 वेफर स्टार्ट्स होगी, जो मुख्य रूप से निर्यात आवश्यकताओं को पूरा करेगा।सानंद में माइक्रोन की सुविधा DRAM और NAND चिप्स का उत्पादन करेगी, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करेगी।असम का संयंत्र प्रतिदिन 4.83 करोड़ चिप्स का उत्पादन करेगा, जो भारत की सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा।