मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सरकार बनाने के दावे को लेकर हाल के घटनाक्रमों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। 28 मई, 2025 को बीजेपी विधायक थोकचोम राधेश्याम सिंह के नेतृत्व में 10 विधायकों ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की और 44 विधायकों के समर्थन का दावा पेश किया, जिसमें 8 बीजेपी विधायक, 1 नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) विधायक, और 1 निर्दलीय शामिल हैं। यह कदम फरवरी 2025 से लागू राष्ट्रपति शासन के बीच आया है, जब पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने मैतेई-कुकी जातीय हिंसा और पार्टी के भीतर असंतोष के कारण इस्तीफा दे दिया था। नीचे इस विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई है, जो एक्स पर पोस्ट, वेब स्रोतों, और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है:
मणिपुर की वर्तमान राजनीतिक स्थिति
मणिपुर की वर्तमान राजनीतिक स्थिति अस्थिर और जटिल बनी हुई है, जो जातीय हिंसा और सत्ता परिवर्तन की अनिश्चितता से प्रभावित है। 13 फरवरी, 2025 से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है, जब पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने मैतेई-कुकी समुदायों के बीच मई 2023 से जारी हिंसा और बीजेपी के भीतर असंतोष के कारण इस्तीफा दे दिया था। इस हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए और हजारों विस्थापित हुए, जिसने शासन को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। बीजेपी, जिसने 2022 के विधानसभा चुनावों में 60 में से 32 सीटें जीती थीं, ने हाल ही में 44 विधायकों के समर्थन का दावा किया है, जिसमें 8 बीजेपी, 1 एनपीपी, और 1 निर्दलीय विधायक शामिल हैं। यह दावा 28 मई, 2025 को राज्यपाल से मुलाकात के बाद सामने आया। हालांकि, मुख्यमंत्री पद के लिए अभी तक कोई सर्वसम्मत उम्मीदवार घोषित नहीं हुआ है, और पार्टी के भीतर मतभेद बने हुए हैं। विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस, बीजेपी पर हिंसा रोकने और शासन में विफलता का आरोप लगाकर दबाव बना रही है। बीजेपी शांति और स्थिरता बहाल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन हिंसा और गठबंधन की अस्थिरता सरकार गठन में बड़ी बाधाएं हैं।
सरकार गठन के दावे का विवरण
- समर्थन का दावा: थोकचोम राधेश्याम सिंह ने कहा कि 44 विधायक, जो 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में बहुमत (31) से अधिक हैं, जनता की इच्छा के अनुसार सरकार बनाने को तैयार हैं। विधानसभा स्पीकर थ. सत्यब्रत ने इन 44 विधायकों से व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से मुलाकात की है, और कोई भी नई सरकार के गठन का विरोध नहीं कर रहा है।
- राज्यपाल की प्रतिक्रिया: विधायकों ने राज्यपाल से “लोकप्रिय सरकार” के गठन की मांग की, और राज्यपाल ने उनकी बात सुनी और जनहित में कार्रवाई शुरू करने का आश्वासन दिया। हालांकि, अंतिम फैसला बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व (पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह) द्वारा लिया जाएगा।
- राजनीतिक गठबंधन: बीजेपी-नेतृत्व वाले गठबंधन में 32 मैतेई विधायक, 3 मणिपुरी मुस्लिम विधायक, और 9 नगा विधायक शामिल हैं, जो कुल 44 विधायकों का समर्थन दर्शाते हैं। शेष 10 विधायक कुकी समुदाय से हैं, जिनमें 7 बीजेपी के बागी, 2 कुकी पीपुल्स अलायंस (केपीए), और 1 निर्दलीय शामिल हैं।
- समयबद्धता: यह दावा पीएम मोदी के 29 मई, 2025 से शुरू होने वाले पूर्वोत्तर दौरे से ठीक पहले आया है, जिसमें वे सिक्किम सहित अन्य राज्यों में रैलियां करेंगे। यह संकेत देता है कि बीजेपी मणिपुर में जल्द से जल्द स्थिर सरकार बनाना चाहती है।

संभावित परिणाम
मणिपुर में बीजेपी के 44 विधायकों के समर्थन के दावे के बाद सरकार गठन की संभावनाएं बढ़ गई हैं, लेकिन कई चुनौतियां बाकी हैं। यदि बीजेपी अपने दावे को साबित कर लेती है और केंद्रीय नेतृत्व (पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह) मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति बना लेता है, तो मणिपुर में जल्द ही नई सरकार बन सकती है। यह कदम 13 फरवरी, 2025 से लागू राष्ट्रपति शासन को समाप्त करेगा और राज्य में राजनीतिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। हालांकि, यदि समर्थन में कमी रहती है या पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री के चयन पर सहमति नहीं बन पाती, तो विधानसभा भंग हो सकती है, जिससे नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं। सबसे बड़ी चुनौती मैतेई-कुकी समुदायों के बीच मई 2023 से जारी जातीय हिंसा को नियंत्रित करना और विश्वास बहाल करना होगा, जिसमें 250 से अधिक लोग मारे गए हैं। नई सरकार को शांति स्थापना, विस्थापित लोगों के पुनर्वास, और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। बीजेपी का यह प्रयास पूर्वोत्तर में उनकी स्थिति को मजबूत करने और जनता के बीच विश्वास बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन सफलता हिंसा के समाधान और गठबंधन की स्थिरता पर निर्भर करेगी।
चुनौतियां

- मुख्यमंत्री का चयन: बीजेपी ने अभी तक मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। कुछ एक्स पोस्ट में एन. बीरेन सिंह के दोबारा सीएम बनने की अटकलें हैं, लेकिन यह पुष्टि नहीं हुई है। पार्टी के भीतर सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती है।
- जातीय तनाव: मैतेई समुदाय मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को अहम मानता है, जबकि कुकी समूह पहाड़ी जिलों के लिए अलग प्रशासन की मांग कर रहे हैं। यह तनाव सरकार गठन को जटिल बनाता है।
- गठबंधन की स्थिरता: एनपीपी और केपीए ने 2023-24 में बीरेन सिंह की सरकार से समर्थन वापस लिया था। वर्तमान में एक एनपीपी विधायक का समर्थन बीजेपी को मिला है, लेकिन गठबंधन की दीर्घकालिक स्थिरता अनिश्चित है।
- सार्वजनिक असंतोष: हिंसा, विस्थापन, और हाल की घटनाओं (जैसे ग्वालटाबी बस घटना) ने जनता में असंतोष बढ़ाया है। मीतेई समूहों जैसे कोकॉमी ने राज्यपाल के खिलाफ नागरिक अवज्ञा आंदोलन शुरू किया है।
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