संजय दत्त के घर पहुंचा अबू सलेम, वैन में थे AK47 और ग्रेनेड! उज्ज्वल निकम ने बताई पूरी कहानी,क्या था पूरा मामला,संजय दत्त का क्या रोल था,उज्ज्वल निकम का बयान क्यों है अहम,1993 बम धमाकों का बैकग्राउंड,
नई दिल्ली: 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले में एक बार फिर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। मशहूर अभियोजक उज्ज्वल निकम ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि कुख्यात गैंगस्टर अबू सलेम, AK47 और ग्रेनेड से भरी वैन लेकर बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त के घर पहुंचा था।
क्या था पूरा मामला?
उज्ज्वल निकम के अनुसार, साल 1993 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों से कुछ ही दिन पहले, अबू सलेम खुद वैन से हथियार लेकर संजय दत्त के बांद्रा स्थित बंगले पर गया था। वैन में 3 AK47 राइफलें, 9 मैगजीन, 450 कारतूस और कुछ ग्रेनेड मौजूद थे।
संजय दत्त का क्या रोल था?
रिपोर्ट्स के अनुसार, संजय दत्त ने खुद यह स्वीकार किया था कि उसने ‘शौक’ में एक AK47 अपने पास रखी थी। हालांकि, संजय का दावा था कि उसका आतंकवाद या धमाकों से कोई लेना-देना नहीं था। बाद में, टाडा कोर्ट ने उन्हें अवैध हथियार रखने का दोषी पाया और उन्हें 5 साल की सजा सुनाई गई।

उज्ज्वल निकम का बयान क्यों है अहम?
उज्ज्वल निकम इस केस में मुख्य सरकारी वकील रहे हैं। उनका यह खुलासा उस समय की सच्चाई को उजागर करता है जब बॉलीवुड, अंडरवर्ल्ड और आतंकवाद के बीच का कनेक्शन चर्चा में था। उन्होंने कहा कि अगर संजय दत्त ने समय रहते पुलिस को जानकारी दी होती, तो शायद धमाकों को रोका जा सकता था।
1993 बम धमाकों का बैकग्राउंड
12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सिलसिलेवार धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
यह हमला भारत के इतिहास में सबसे भीषण आतंकी हमलों में से एक माना जाता है।
इस हमले की साजिश दाऊद इब्राहिम और टाइगर मेमन ने रची थी।
क्यों ज़रूरी है यह जानना?यह मामला सिर्फ एक फिल्मी अभिनेता का नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और अपराध के आपसी संबंधों का आइना है। उज्ज्वल निकम जैसे वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ द्वारा सामने लाई गई बातें हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि जब मशहूर हस्तियां भी अंडरवर्ल्ड के संपर्क में आ जाएं, तो उसका असर कितना गहरा हो सकता है।

अबू सलेम द्वारा संजय दत्त के घर हथियार पहुंचाना केवल एक ‘शौक’ नहीं था, बल्कि एक गंभीर आपराधिक साजिश का हिस्सा था। उज्ज्वल निकम का यह बयान न सिर्फ कानूनी रूप से अहम है, बल्कि समाज को जागरूक करने के लिए भी बेहद ज़रूरी है।