20 करोड़ के कर्ज से दबे एक ही परिवार के 7 लोगों ने दी जान

पंचकूला में कर्ज के बोझ तले दबे परिवार की दुखद कहानी

हरियाणा: के पंचकूला में 26 मई 2025 को एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने न केवल स्थानीय समुदाय को बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। एक ही परिवार के सात सदस्यों प्रवीण मित्तल, उनकी पत्नी रीना, उनके माता-पिता, और तीन बच्चों (दो बेटियों और एक बेटे) ने सेक्टर-27 के पास एक कार में जहर खाकर सामूहिक आत्महत्या कर ली। इस दुखद घटना के पीछे की वजह थी 15 से 20 करोड़ रुपये का भारी कर्ज, जिसने इस परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया। यह घटना समाज में कर्ज के बढ़ते बोझ और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही जैसे गंभीर मुद्दों पर सवाल उठाती है।

प्रवीण मित्तल, मूल रूप से हिसार के बरवाला के निवासी, कभी एक सफल स्क्रैप कारोबारी थे। लगभग 12 साल पहले वे पंचकूला में बस गए थे और हिमाचल प्रदेश के बद्दी में उनकी एक स्क्रैप फैक्ट्री थी। उनके पास फ्लैट, गाड़ियां और एक सुखी परिवार था। लेकिन कारोबार में घाटे और बढ़ते कर्ज ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया। बैंक ने उनकी फैक्ट्री, दो फ्लैट और गाड़ियां जब्त कर लीं, जिसके बाद प्रवीण को जीविका के लिए टैक्सी चलाने जैसा काम शुरू करना पड़ा। उनके रिश्तेदारों के अनुसार, प्रवीण पर 20 करोड़ रुपये का कर्ज था, और उन्हें लगातार धमकियां भी मिल रही थीं। 2020 से 2023 तक यह परिवार देहरादून में रहा, जहां प्रवीण ने टूर एंड ट्रैवल्स का व्यवसाय शुरू करने की कोशिश की, लेकिन वह भी घाटे में चला गया। आर्थिक तंगी और सामाजिक अलगाव ने उनके मानसिक दबाव को और बढ़ा दिया। हाल ही में वे पंचकूला के सकेतड़ी गांव में किराए के मकान में रह रहे थे। इस दौरान उनके रिश्तेदारों और पड़ोसियों को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि परिवार इतनी बड़ी परेशानियों से जूझ रहा है, क्योंकि वे सामाजिक रूप से शांत और सामान्य व्यवहार रखते थे।

पुलिस जांच और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

पंचकूला पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की। घटनास्थल पर मिले सुसाइड नोट और प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला माना। सुसाइड नोट में प्रवीण मित्तल ने स्पष्ट रूप से लिखा था, “हम बैंक से करप्ट हो चुके हैं,” और अपने चचेरे भाई संदीप अग्रवाल से अंतिम संस्कार करने का अनुरोध किया था। इस नोट ने पुलिस को जांच की दिशा दी, जिसमें कर्ज और उससे जुड़े दबावों को प्रमुख कारण माना गया।
पुलिस ने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए। इनमें उस कार को शामिल किया गया, जिसमें परिवार ने जहर खाया था, और कार के अंदर मिले अवशेष, जैसे उल्टी के निशान और जहर की खाली शीशियां। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया ताकि मृत्यु के सटीक कारण और जहर के प्रकार की पुष्टि हो सके। फॉरेंसिक विशेषज्ञों को यह जांच करने का जिम्मा सौंपा गया कि क्या यह जहर परिवार ने स्वयं खरीदा था या इसे किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा प्रदान किया गया था। पुलिस ने प्रवीण के फोन रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की भी जांच शुरू की ताकि यह पता लगाया जा सके कि कर्ज की राशि कितनी थी और किन-किन व्यक्तियों या संस्थानों से यह कर्ज लिया गया था। इसके अलावा, पुलिस ने परिवार के रिश्तेदारों और पड़ोसियों से पूछताछ की। रिश्तेदारों ने बताया कि प्रवीण को हाल के महीनों में धमकियां मिल रही थीं, जिसके बारे में उन्होंने ज्यादा खुलकर बात नहीं की थी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या ये धमकियां निजी साहूकारों या किसी अन्य पक्ष से थीं। स्थानीय पुलिस अधीक्षक ने एक बयान में कहा, “हम सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं, और जल्द ही फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर स्थिति और स्पष्ट होगी।” पुलिस ने यह भी सुनिश्चित किया कि जांच में पारदर्शिता बनी रहे और परिवार के साथ न्याय हो।

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बागेश्वर धाम की कथा और अंतिम निर्णय

घटना से ठीक पहले, प्रवीण और उनका परिवार पंचकूला में आयोजित बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री की हनुमंत कथा में शामिल हुआ था। सुसाइड नोट में प्रवीण ने लिखा, “हम बैंक से करप्ट हो चुके हैं,” और अपने चचेरे भाई संदीप अग्रवाल से अंतिम संस्कार का अनुरोध किया। कथा के बाद देहरादून लौटते समय परिवार ने कार में जहर खाकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली। घटनास्थल का दृश्य भयावह था—सभी ने जहर खाने के बाद उल्टियां की थीं। एक स्थानीय निवासी, पुनीत राणा, ने बताया कि प्रवीण कार से बाहर निकले और सड़क किनारे बैठकर बोले, “हम कर्ज में डूब गए हैं, मैंने जहर खा लिया है, मैं पांच मिनट में मर जाऊंगा।” इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई।

कर्ज और मानसिक स्वास्थ्य: एक गंभीर चेतावनी

यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस गहरे संकट को दर्शाती है जो कर्ज के बोझ तले दबे लोग अनुभव करते हैं। भारत में कर्ज लेना आसान हो सकता है, लेकिन इसे चुकाना कई बार असंभव-सा लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कर्ज के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है। परिवारों को आर्थिक संकट में सहायता प्रदान करने के लिए काउंसलिंग और कर्ज पुनर्गठन जैसे उपायों की जरूरत है। इसके अलावा, बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपनी नीतियों में पारदर्शिता और लचीलापन लाने की आवश्यकता है ताकि लोग कर्ज के जाल में फंसने से बच सकें। पंचकूला की यह घटना एक चेतावनी है कि आर्थिक संकट और सामाजिक दबाव लोगों को कितना तोड़ सकते हैं। प्रवीण मित्तल और उनके परिवार की कहानी समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम अपने आसपास के लोगों की परेशानियों को समझ पाते हैं? क्या हमारी व्यवस्था ऐसी है जो जरूरतमंदों को सहारा दे सके? इस त्रासदी से हमें यह सीख लेने की जरूरत है कि मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक सहायता के लिए बेहतर संसाधन और जागरूकता जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।

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  • flasahsamachar

    मेरा नाम Tanmay patil “मैं एक हिंदी न्यूज़ ब्लॉग लिखता हूं, पिछले 2 सालों से ताज़ा खबरें, राजनीति और समाज से जुड़ी सटीक व रोचक जानकारियाँ पाठकों तक पहुँचाने का काम कर रहा हूं।”

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