वैश्विक कूटनीति का महामंच: भारत, रूस और चीन। की तिकड़ी फिर सुर्खियों में ,पुतिन का भारत दौरा: क्या है खास ,SCO शिखर सम्मेलन 2025: मोदी का चीन दौरा,18 अगस्त 2025: भारत-चीन सीमा वार्ता,वैश्विक मंच पर भारत की धमक ,क्या होगा भविष्य?
वैश्विक कूटनीति का महामंच: भारत, रूस और चीन। की तिकड़ी फिर सुर्खियों में
2025 का साल वैश्विक कूटनीति के लिए एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 2025 में भारत दौरे पर आएंगे, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे। इसके साथ ही,
18 अगस्त 2025 को भारत-चीन सीमा विवाद पर अहम वार्ता तय है। यह त्रिकोणीय कूटनीति न केवल भारत-रूस-चीन संबंधों को मजबूती देगी, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है। आइए, इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की पूरी कहानी जानते हैं।
पुतिन का भारत दौरा: क्या है खास?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का 2025 में भारत दौरा कई मायनों में अहम है। यह दौरा भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के तहत होगा, जिसमें सुरक्षा, ऊर्जा, और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। सूत्रों के मुताबिक, पुतिन का यह दौरा दिसंबर 2021 के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा।
- क्यों अहम है यह दौरा?
- भारत-अमेरिका तनाव: अमेरिका ने रूस से तेल खरीद के कारण भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, जिसके बीच पुतिन का दौरा वैश्विक कूटनीति में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।
- ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन: पुतिन ने हाल ही में भारत के आतंकवाद-रोधी कदमों का समर्थन किया था, जिसमें रूस की S-400 मिसाइल सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल ने अहम भूमिका निभाई।
- उर्वरक और ऊर्जा सहयोग: पुतिन ने भारत को अतिरिक्त उर्वरक आपूर्ति की प्रतिबद्धता जताई है, साथ ही आर्क्टिक क्षेत्र में सहयोग और नए न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना पर चर्चा होगी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
यह दौरा न केवल भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा, बल्कि अमेरिका के दबदबे को चुनौती देने वाली नई विश्व व्यवस्था की ओर इशारा करता है। क्या भारत इस कूटनीति का केंद्र बनने जा रहा है?

SCO शिखर सम्मेलन 2025: मोदी का चीन दौरा
31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक चीन के तियानजिन शहर में होने वाला SCO शिखर सम्मेलन वैश्विक मंच पर भारत की मौजूदगी को और मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जो 2018 के बाद उनकी पहली चीन यात्रा होगी।
- चीन का गर्मजोशी भरा स्वागत: चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि यह सम्मेलन एकता और मित्रता का प्रतीक होगा। उन्होंने इसे “दोस्ती का सम्मेलन” करार दिया।
- मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात की संभावना: सूत्रों के मुताबिक, सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हो सकती है, जिसमें सीमा विवाद, व्यापार, और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा होगी।
- SCO का महत्व: 2001 में स्थापित SCO में भारत, चीन, रूस, और अन्य 7 देश शामिल हैं। यह संगठन क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देता है। इस बार 20+ देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख हिस्सा लेंगे।
क्या बदलेगा?
2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव रहा, लेकिन हाल के महीनों में दोनों देशों ने तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। क्या यह सम्मेलन दोनों देशों के बीच नई शुरुआत का आधार बनेगा?

18 अगस्त 2025: भारत-चीन सीमा वार्ता
18 अगस्त 2025 को भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता होगी। इस वार्ता में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी शामिल होंगे।
- क्या है एजेंडा?
- एलएसी पर तनाव कम करना: 2020 की गलवान झड़प के बाद दोनों देशों ने कई क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे हटाया, लेकिन डेपसांग और डेमचोक जैसे क्षेत्रों में गश्त बहाली अभी बाकी है।
- सीमा व्यापार और उड़ानें: सीधी उड़ानों की बहाली और सीमा व्यापार मार्गों को फिर से खोलने पर चर्चा होगी।
- लंबित मुद्दों का समाधान: दोनों देश स्थायी शांति और सीमा विवाद के समाधान की दिशा में कदम उठाने पर विचार करेंगे।
क्यों है यह चर्चा अहम?
2024 में कजान में हुई ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात ने सीमा पर तनाव कम करने की नींव रखी थी। अब 18 अगस्त की वार्ता से दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की उम्मीद है।
वैश्विक मंच पर भारत की धमक
2025 में भारत वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनने जा रहा है। पुतिन का भारत दौरा, मोदी का SCO समिट में हिस्सा लेना, और 18 अगस्त की सीमा वार्ता न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देंगे, बल्कि भारत को वैश्विक शक्ति के रूप में और मजबूत करेंगे।
- भारत-रूस-चीन तिकड़ी (RIC): यह तिकड़ी SCO और ब्रिक्स जैसे मंचों पर अमेरिका के दबदबे को चुनौती दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस नई विश्व व्यवस्था का संतुलनकर्ता बन सकता है।
- अमेरिका पर दबाव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के बीच यह कूटनीतिक सक्रियता भारत की स्वायत्तता को दर्शाती है।
क्या कहते हैं लोग?
सोशल मीडिया पर लोग इस घटनाक्रम को “भारत की कूटनीतिक जीत” करार दे रहे हैं। क्या यह वाकई में वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल देगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं!
क्या होगा भविष्य?
- पुतिन का भारत दौरा: भारत-रूस संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
- SCO शिखर सम्मेलन: भारत-चीन के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।
- 18 अगस्त की वार्ता: सीमा विवाद के समाधान की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।
आप क्या सोचते हैं?
क्या भारत इस त्रिकोणीय कूटनीति से वैश्विक मंच पर नया इतिहास रचेगा? नीचे कमेंट करें और इस खबर को शेयर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस ऐतिहासिक पल के बारे में जान सकें।
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