Nagpur News: नागपुर न्यूज़ ₹145.25 करोड़ के फर्जी कर्ज घोटाले के आरोपी रमनराव बोल्ला को बड़ा झटका हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दिया, पूरा मामला क्या बंबई हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, जांच में क्या सामने आया?
नागपुर: 145 करोड़ 25 लाख रुपए केफर्जी कर्ज घोटाले के आरोपी धान्य व्यापारी रमनराव बोल्ला की जमानत अर्जी को बंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने खारिज कर दिया. न्यायाधीश उर्मिला जोशी-फलके ने यह फैसला सुनाया. घोटाले के अन्य आरोपियों में कमोडीटीज मैनेजमेंट सर्विस कंपनी के कर्मचारी प्रवीण मेंढे, आनंद काकड़े, वी.एस. वकालपुडी आदि का समावेश है. पीड़ित किसान रामकृष्ण निंबालकर की शिकायत पर मौदा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संरक्षण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है. बोल्ला को 28 अक्तूबर 2023 को गिरफ्तार किया गया. तब से वह जेल में है.
आरोपियों ने कॉर्पोरेशन, आईडीबीआई व वैश्य बैंक में किसानों के नाम पर 159 कर्ज प्रकरण मंजूर कर आर्थिक घोटाला किया है. जांच में यह जानकारी सामने आई है कि बैंक द्वारा किसानों के खाते में जमा की गई कर्ज की रकम में से 76 करोड़ 47 लाख 21 हजार 147 रुपए बोल्ला व अन्य आरोपियों के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए हैं.
₹145.25 घोटाला करोड़ पूरा मामला क्या है ?
नागपुर के प्रमुख धान्य व्यापारी रमनराव बोल्ला पर ₹145 करोड़ 25 लाख रुपए के फर्जी बैंक कर्ज घोटाले का आरोप है। उन्होंने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज, झूठे स्टॉक रजिस्टर और नकली कंपनियों के माध्यम से बैंकों से भारी-भरकम कर्ज लिया। इस घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद जांच एजेंसियों ने रमनराव को गिरफ्तार किया था।

बंबई हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
बंबई हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में रमनराव ने जमानत की अर्जी दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि:
- यह मामला आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है
- आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य हैं
- वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है या गवाहों को प्रभावित कर सकता है
₹145.25 करोड़ के जांच में क्या सामने आया?
- आरोपी ने बैंकों को फर्जी इनवॉइस और स्टॉक स्टेटमेंट देकर धोखा दिया
- कई शेल कंपनियों का निर्माण कर लेन-देन का दिखावा किया गया
- कर्ज की रकम का प्रयोग व्यापारिक उद्देश्य की बजाय निजी लाभ के लिए हुआ

रमनराव बोल्ला को जमानत न मिलना इस बात का संकेत है कि भारतीय न्यायपालिका अब आर्थिक अपराधों को हल्के में नहीं ले रही। यह फैसला उन सभी के लिए चेतावनी है जो बैंकिंग व्यवस्था के साथ छल करने की कोशिश करते हैं। इस केस की अगली सुनवाई और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।
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