244 फर्जी कंपनियों ने उड़ाए ₹524 करोड़.राजस्थान में जीएसटी टैक्स चोरी की अंतरराज्यीय गैंग का खुलासा,जांच में क्या-क्या मिले,2024-25 में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने 2.23 लाख करोड़ रुपए की,ऐसे करते थे टैक्स की चोरी,कड़ी दर कड़ी खुल रही साजिश,कंप्यूटर सेंटर में बनते थे फर्जी दस्तावेज
जीएसटी इनपुट और इनपुट पास ऑन के नाम पर देशभर में फैली टैक्स चोरी की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है. इस खुलासे ने सिस्टम की जड़ों को झकझोर कर रख दिया है. जांच में सामने आया कि जोधपुर के ई-मित्र संचालक प्रवीण पंवार और उसके साथी सद्दाम हुसैन ने देश के 22 राज्यों में फर्जी फर्म बनाकर 524 करोड़ रुपए की जीएसटी बोरी को अंजाम दिया
पुलिस और सेंट्रल जीएसटी विभाग की संयुक्त कार्रवाई में अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. आरोपी सरकारी सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर देशभर में टैक्स चोरी का नेटवर्क चला रहे थे. मुख्य आरोपी प्रवीण पंवार और सद्दाम हुसैन बीस से तीस हजार रुपए के बदले फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे ये दस्तावेज आगे उन लोगों को दिए जाते थे, जो फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर करोड़ों की टैक्स चोरी करते थे आरोपियों के पास नकली मोहरें थीं, जिनसे वे पैन कार्ड तैयार करते, बैंक खाते खुलवाते और ई-बिल बनाते थे. पूछताछ में सामने आया कि इस नेटवर्क ने 22 राज्यों में फर्जी फर्म बनाकर जीएसटी इनपुट क्लेम और पास ऑन का खेल खेला. इन फर्मों के जरिए हवाला लेनदेन, कैसीनो में पैसा भेजना और इनवॉयस के जतिः जीएसटी रिफंड लेना जैसी गतिविधियां होती थी.
जांच में क्या-क्या मिले
- 244 फर्जी फर्म बनाए गए थे कई राज्यों में 152 रजिस्ट्रेशन पहले ही रह हो चुका है
- 44 फर्मों की पहचान ई-मेल और पैनकार्ड से हुई
- 196 फमों को तकनीक डाटा से ट्रैक किया गया
- 8 फर्म रजिस्टर्ड पते पर अस्तित्व में नहीं मिली

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2024-25 में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने 2.23 लाख करोड़ रुपए की
- 278 करोड़ रुपए के क्लेम ले लिए थे
- 246 करोड़ रुपए की इनपुट पास ऑन की
- 30 हजार के लालच में बना दी फर्जी दुनिया
- 22 राज्यों में फैला था नेटवर्क और हवाला
गिरोह ने इन राज्यों में बनाईं फर्जी फर्म
गिरोह ने आंध्रप्रदेश, आसाम, बिहार, दिल्ली, छत्तीसगढ़, दमन व दीव, गोवा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिसा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडू, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड व पश्चिम बंगाल में गड़बड़ी की,
आरोपियों से मिली अफसरों की सील
पुलिस ने इस प्रकरण में ईमित्र संचालक प्रवीण पंवार, सद्दाम हुसैन, किशनसिंह, रणवीर सिंह, गजेंद्रसिंह, चैलाराम और अमित भाटी को गिरफ्तार किया गया है. प्रवीण के पास कई राजपत्रित अधिकारियों की सील मिली है. वह लंबे समय से इनका इस्तेमाल कर रहा था.

ऐसे करते थे टैक्स की चोरी
पुलिस के अनुसार यह गिरोह अपने पास नकली स्टांप रखता था, जिसका इस्तेमाल जाली पैन कार्ड बनाने के लिए किया जाता था. फर्जी आधार कार्ड, पेन कार्ड, फर्जी फर्म, बैंक खाता और ई-मेल आईडी से ये जीएसटी की चोरी करते थे. आरोपी इन दस्तावेज का इस्तेमाल करके वे बैंक खाते खोलते थे और जीएसटी-पंजीकृत फर्मों में लेनदेन दिखाते थे.
कड़ी दर कड़ी खुल रही साजिश
पुलिस ने इस मामले में 13 जून को मसुरिया क्षेत्र से प्रवीण और सद्दाम को पकड़ा. 9 दिन की रिमांड में लेकर की गई पूछताछ के दौरान और भी नाम सामने आए. किरात सिंह, रणवीर सिंह, गजेंद्र सिंह, चेलाराम और अमित भाटी को भी पकड़ा गया.पुलिस को पूछताछ में पता चला कि अमित फजीसौल तैयार करता था और दस्तावेजों को वैध बनानेका काम करता था. पुलिस अब मोधाडल डाटा औरडिजिटल दस्तावेज की जांच कर रही है. आशंका हैकि टैक्स चोरी की राशि और भी अधिक हो सकतीहै. इस पूरे मामले में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करजिस शातिर तरीके से फर्जीवाड़ा किया गया, वहदेशभर की एजेंसियों के लिए बड़ा चैलेंज है
कंप्यूटर सेंटर में बनते थे फर्जी दस्तावेज
पुलिस उपायुक्त राजर्षि राज वर्मा ने बताया कि जोधपुर के मसूरिया इलाके में एक ई-मित्र और कंप्यूटर सेंटर में तैयार किए जा रहे फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेजों की जांच से घोटाले का पता चला है. आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार कर रहे थे, जिनका इस्तेमाल फर्जी जीएसटी पंजीकरण और कर चोरी के लिए किया जा रहा था. इन दस्तावेजों का इस्तेमाल अन्य अवैध गतिविधियों में भी किया जा रहा था. इस पूरे प्रकरण में चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका सामने आ रही है, जल्दी उन तक पहुंचा जाएगा.