ई-टिकट दलाली रैकेट का भंडाफोड़: IRCTC तत्काल टिकट घोटाले में बड़ा खुलासा, 60 सेकंड में बुकिंग का दावा
भारतीय रेलवे की तत्काल टिकट बुकिंग प्रणाली में एक बार फिर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और अन्य जांच एजेंसियों ने हाल ही में एक ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो अवैध सॉफ्टवेयर और फर्जी आधार-वेरिफाइड IRCTC अकाउंट्स का उपयोग करके महज 60 सेकंड में तत्काल टिकट बुक करने का दावा करता था। इस घोटाले ने न केवल आम यात्रियों को परेशान किया, बल्कि उनकी निजी जानकारी को भी खतरे में डाल दिया। इस लेख में हम इस रैकेट के काम करने के तरीके, इसके प्रभाव, और रेलवे की कार्रवाई के बारे में विस्तार से बताएंगे।
ई-टिकट दलाली रैकेट का खुलासा
हाल ही में इंडिया टुडे की OSINT टीम ने टेलीग्राम और व्हाट्सएप पर सक्रिय एक ऑनलाइन रैकेट की पहचान की, जो IRCTC के सिस्टम में खामियों का फायदा उठाकर तत्काल टिकट बुक करता था। यह रैकेट बॉट्स, ऑटोमैटिक ब्राउजर एक्सटेंशन, और फर्जी आधार-वेरिफाइड अकाउंट्स का उपयोग करके 60 सेकंड से भी कम समय में टिकट बुक करने का दावा करता था। इस रैकेट के एजेंट्स अंतरराष्ट्रीय फोन नंबरों का उपयोग करके अपनी पहचान छिपाते थे और आधार-वेरिफाइड IRCTC यूजर आईडी को मात्र 360 रुपये में बेच रहे थे।
2025 में भोपाल और जमशेदपुर जैसे शहरों में RPF ने इस रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। भोपाल में 19 वर्षीय शाहबाज खान को गिरफ्तार किया गया, जिसने 22 फर्जी आईडी का उपयोग करके 1.62 लाख रुपये के 75 ई-टिकट बनाए थे। वहीं, जमशेदपुर के आदित्यपुर में आकाश राज नामक व्यक्ति को पकड़ा गया, जिसके पास से 31 हजार रुपये से अधिक के 10 लाइव तत्काल टिकट और 1 लाख रुपये से अधिक के 28 पुराने टिकट बरामद हुए।

रैकेट का काम करने का तरीका
यह रैकेट अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करता था, जिसमें शामिल हैं:
- बॉट्स और सॉफ्टवेयर: Dragon, JETX, Ocean, Black Turbo जैसे सॉफ्टवेयर का उपयोग करके टिकट बुकिंग को स्वचालित किया जाता था। ये सॉफ्टवेयर IRCTC सिस्टम को धोखा देने के लिए डिज़ाइन किए गए थे।
- फर्जी आधार आईडी: रैकेट के ऑपरेटर आधार-वेरिफाइड IRCTC अकाउंट्स को सस्ते दामों पर बेचते थे, जिससे टिकट बुकिंग आसान हो जाती थी।
- टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स: ‘Jai Shree Ram Bhai Tatkal Materials’ जैसे व्हाट्सएप ग्रुप्स और टेलीग्राम चैनल्स के जरिए बुकिंग डिटेल्स साझा की जाती थीं। ‘View-once’ फीचर का उपयोग करके जानकारी को गुप्त रखा जाता था।
- VPS और प्रॉक्सी IP: अपनी पहचान छिपाने के लिए एजेंट्स वर्चुअल प्राइवेट सर्वर (VPS) और प्रॉक्सी IP का उपयोग करते थे।
आम यात्रियों पर प्रभाव
इस रैकेट का सबसे बड़ा नुकसान आम यात्रियों को हुआ, जो ट्रेन टिकट बुक करने के लिए IRCTC की वेबसाइट या ऐप पर निर्भर हैं। बॉट्स और ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर के कारण सिस्टम ओवरलोड हो जाता था, जिससे वास्तविक यूजर्स को टिकट बुक करने में मुश्किल होती थी। इसके अलावा, इन सॉफ्टवेयरों के जरिए यूजर्स की निजी जानकारी, जैसे लॉगिन डिटेल्स और आधार डेटा, चोरी होने का खतरा था।
रेलवे की कार्रवाई और नए नियम
रेलवे ने इस रैकेट को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं:
- नए नियम: 1 जुलाई 2025 से तत्काल टिकट बुकिंग के लिए आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया। इससे फर्जी अकाउंट्स के उपयोग पर रोक लगाने में मदद मिली।
- ऑपरेशन उपलभ्द: RPF ने ‘ऑपरेशन उपलभ्द’ के तहत देशभर में टिकट दलालों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी। हाल ही में बांकुडा, दुर्गापुर, और कृष्णानगर में कई टिकट दलालों को गिरफ्तार किया गया।
- AI तकनीक: रेलवे अब सीट आवंटन के लिए AI तकनीक का उपयोग कर रहा है, जिससे बुकिंग प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया जा सके।

पहले भी हुए हैं ऐसे खुलासे
यह पहली बार नहीं है जब ई-टिकट दलाली रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। 2020 में RPF ने गुलाम मुस्तफा नामक व्यक्ति को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया था, जिसके पास ANMS सॉफ्टवेयर और 2400 बैंक अकाउंट्स थे। इस रैकेट के तार पाकिस्तान, बांग्लादेश, और दुबई से जुड़े होने का संदेह था। 2018 में भी जबलपुर में 10 लाख रुपये के 700 ई-टिकट बरामद किए गए थे।
यात्रियों के लिए सुझाव
- आधिकारिक प्लेटफॉर्म का उपयोग करें: टिकट बुकिंग के लिए केवल IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का उपयोग करें।
- टिकट की जांच करें: बुकिंग के बाद टिकट पर स्टेशन कोड और PNR नंबर की जांच करें ताकि फर्जी टिकट से बचा जा सके।
- सतर्क रहें: अनजान सोर्स से टिकट न खरीदें और अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें।
- करंट टिकट का विकल्प: इमरजेंसी में करंट टिकट बुकिंग का उपयोग करें, जो ट्रेन रवाना होने से चार घंटे पहले उपलब्ध होती है।

निष्कर्ष
ई-टिकट दलाली रैकेट का भंडाफोड़ भारतीय रेलवे और यात्रियों के लिए एक बड़ी जीत है। हालांकि, यह रैकेट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। रेलवे और जांच एजेंसियों को और सख्ती से कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि आम यात्रियों को कंफर्म टिकट आसानी से मिल सके। यात्रियों को भी सतर्क रहकर अपनी यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना चाहिए।