नितिन गडकरी: ‘दिल्ली पहुंचते ही जाने की सोचता हूं ‘दिल्ली में क्यों नहीं लगता सुकून? जानें बयान का मतलब

नितिन गडकरी: ‘दिल्ली पहुंचते ही जाने की सोचता हूं ‘दिल्ली में क्यों नहीं लगता सुकून? जानें बयान का मतलब,दिल्ली से क्यों है गडकरी की दूरी,गडकरी के बयान का गहरा अर्थ,सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अपने साफ-सुथरे कामकाज और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उनका एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने कहा

“जब मैं दिल्ली पहुंचता हूं, तो सोचने लगता हूं कि मैं यहां से कब जाऊंगा।”

दिल्ली से क्यों है गडकरी की दूरी?

उन्हें घरेलू माहौल और पारिवारिक जीवन ज्यादा प्रिय है।

नागपुर उनका घर है, जहां उन्हें आत्मिक शांति मिलती है।

दिल्ली की राजनीतिक भागदौड़, ट्रैफिक और तनावपूर्ण वातावरण उन्हें रास नहीं आता।

वे कहते हैं, “जहां मन को शांति न मिले, वह जगह कभी प्रिय नहीं बन सकती।”

नितिन गडकरी: 'दिल्ली पहुंचते ही जाने की सोचता हूं 'दिल्ली में क्यों नहीं लगता सुकून? जानें बयान का मतलब

गडकरी के बयान का गहरा अर्थ

  • सार्वजनिक जीवन में रहते हुए भी इंसान के लिए घर और परिवार सबसे अहम होते हैं।
  • दिल्ली भले ही सत्ता का केंद्र हो, लेकिन सुकून की तलाश हर व्यक्ति को होती है।
  • यह बयान राजनीति से अलग इंसानी सोच को उजागर करता है।

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया

कुछ ने कहा – “ईमानदार नेता की यही पहचान है।”

नितिन गडकरी: 'दिल्ली पहुंचते ही जाने की सोचता हूं 'दिल्ली में क्यों नहीं लगता सुकून? जानें बयान का मतलब

नितिन गडकरी का “दिल्ली पहुंचते ही जाने की सोचता हूं” वाला बयान एक नेता के मानवीय पक्ष को सामने लाता है।यह दिखाता है कि कितनी भी बड़ी जिम्मेदारी क्यों न हो, घर, परिवार और आत्मिक शांति हर किसी के लिए जरूरी है।

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  • flasahsamachar

    मेरा नाम Tanmay patil “मैं एक हिंदी न्यूज़ ब्लॉग लिखता हूं, पिछले 2 सालों से ताज़ा खबरें, राजनीति और समाज से जुड़ी सटीक व रोचक जानकारियाँ पाठकों तक पहुँचाने का काम कर रहा हूं।”

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