मंदी की ओर बढ़ रहा ज्वेलरी सेक्टर? सुस्त पड़ी बड़ी कंपनियों की सेल्स: जानें पूरा हाल
भारत में ज्वेलरी सेक्टर, जो हमेशा से अपनी चमक और ग्राहकों की भीड़ के लिए जाना जाता है, इन दिनों मंदी की मार झेल रहा है। हाल के महीनों में बड़ी ज्वेलरी कंपनियों जैसे टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स, और सेंको गोल्ड की बिक्री में सुस्ती देखी गई है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, बढ़ती सोने की कीमतें, और बदलते उपभोक्ता रुझानों ने इस सेक्टर को प्रभावित किया है। इस लेख में हम ज्वेलरी सेक्टर की मौजूदा स्थिति, मंदी के कारण, और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
ज्वेलरी सेक्टर में मंदी के संकेत
हालिया खबरों के अनुसार, ज्वेलरी सेक्टर में बिक्री की गति धीमी पड़ रही है। टाइटन कंपनी ने अपनी तिमाही अपडेट में बताया कि इस साल की पहली तिमाही में नए ग्राहकों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं हुई। इसी तरह, कल्याण ज्वेलर्स और सेंको गोल्ड की ग्रोथ भी सुस्त रही। उदाहरण के लिए:
- टाइटन कंपनी: ज्वेलरी सेगमेंट में 25% की रेवेन्यू वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन लाइक-टू-लाइक (L2L) बिक्री केवल 15% रही।
- कल्याण ज्वेलर्स: 38% की रेवेन्यू वृद्धि के बावजूद समान स्टोर बिक्री वृद्धि (SSSG) केवल 21% रही।
- सेंको गोल्ड: तिमाही अपडेट अभी प्रतीक्षित है, लेकिन बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इसकी ग्रोथ भी अपेक्षाकृत कम रही।
इसके अलावा, सूरत में आयोजित ‘CARATS’ डायमंड एक्सपो जैसे बड़े आयोजनों का आकार भी इस बार छोटा किया गया, जो इस सेक्टर में मंदी का स्पष्ट संकेत है।

मंदी के प्रमुख कारण
ज्वेलरी सेक्टर में सुस्ती के कई कारण हैं, जो न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव डाल रहे हैं:
- सोने की कीमतों में उछाल: हाल ही में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं, जो 3000 डॉलर प्रति औंस को पार कर गईं। भारत में भी सोने की कीमतों में 14% की वृद्धि दर्ज की गई। इस वजह से उपभोक्ता महंगे गहनों की खरीदारी से कतरा रहे हैं।
- वैश्विक व्यापार युद्ध: अमेरिका और अन्य देशों के बीच चल रहे व्यापार युद्ध और टैरिफ नीतियों ने वैश्विक मांग को प्रभावित किया है। खासकर डायमंड सेक्टर में विदेशी मांग में भारी गिरावट देखी गई है।
- लैब-ग्रो डायमंड्स की बढ़ती लोकप्रियता: किफायती और पर्यावरण-अनुकूल लैब-ग्रो डायमंड्स की मांग बढ़ रही है, जिसने पारंपरिक हीरे और सोने के गहनों की बिक्री पर असर डाला है।
- आर्थिक अनिश्चितता: वैश्विक और घरेलू स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, जैसे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और मुद्रास्फीति, ने उपभोक्ताओं के खर्च करने की क्षमता को सीमित कर दिया है।
- बदलते उपभोक्ता रुझान: आज के युवा ग्राहक फैशन ज्वेलरी और किफायती विकल्पों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिससे प्रीमियम ज्वेलरी की मांग कम हो रही है।
बड़ी कंपनियों का हाल
ज्वेलरी सेक्टर की प्रमुख कंपनियों पर मंदी का असर साफ दिखाई दे रहा है:
- टाइटन कंपनी: टाइटन के शेयरों में हाल ही में 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी ने बाजार बंद होने के बाद अपने तिमाही अपडेट में बिक्री में सुस्ती की बात स्वीकारी।
- पीसी ज्वेलर: हालांकि पीसी ज्वेलर ने पहली तिमाही में 80% की रेवेन्यू वृद्धि दर्ज की और कर्ज मुक्त होने का लक्ष्य रखा, लेकिन यह अपवाद है। कंपनी के शेयरों में 15% की उछाल के बावजूद, सेक्टर की समग्र स्थिति चिंताजनक है।
- कनानी इंडस्ट्रीज: डायमंड स्टडेड ज्वेलरी में विशेषज्ञता रखने वाली इस कंपनी ने पिछले पांच वर्षों में -8.06% की खराब बिक्री वृद्धि दर्ज की, जो सेक्टर की चुनौतियों को दर्शाता है।
सूरत का हीरा उद्योग: मंदी की मार
सूरत, जो दुनिया के हीरा व्यापार का केंद्र माना जाता है, भी मंदी से अछूता नहीं रहा। ‘CARATS’ डायमंड एक्सपो में इस बार कम प्रदर्शक और छोटे पैमाने पर आयोजन देखा गया। विदेशी मांग में कमी और लैब-ग्रो डायमंड्स की बढ़ती लोकप्रियता ने सूरत के हीरा उद्योग को प्रभावित किया है। हजारों कारीगर बेरोजगारी की कगार पर हैं।

भविष्य की संभावनाएं
हालांकि मौजूदा स्थिति चिंताजनक है, लेकिन कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं:
- त्योहारी सीजन: भारत में आगामी त्योहारी सीजन, जैसे दिवाली और शादी के मौसम, ज्वेलरी की मांग को बढ़ा सकता है।
- नए रुझान: कंपनियां अब हल्के वजन वाले और किफायती गहनों पर ध्यान दे रही हैं, जो युवा ग्राहकों को आकर्षित कर सकते हैं।
- डिजिटल मार्केटिंग: ऑनलाइन बिक्री और डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से कंपनियां नए ग्राहकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
- निर्यात में सुधार: यदि वैश्विक व्यापार युद्ध कम होता है, तो डायमंड और ज्वेलरी निर्यात में सुधार हो सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए सुझाव
- बजट के अनुसार खरीदारी: सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, निवेश से पहले बाजार का विश्लेषण करें।
- लैब-ग्रो डायमंड्स: किफायती और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों पर विचार करें।
- ऑनलाइन खरीदारी: विश्वसनीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदारी करें, जहां छूट और ऑफर उपलब्ध हो सकते हैं।
- गुणवत्ता की जांच: हॉलमार्क और सर्टिफिकेशन की जांच करें ताकि आपको सही गुणवत्ता मिले।
निष्कर्ष
ज्वेलरी सेक्टर में मौजूदा मंदी निश्चित रूप से चिंता का विषय है, लेकिन यह स्थायी नहीं हो सकती। सोने की कीमतों में वृद्धि, वैश्विक व्यापार युद्ध, और बदलते उपभोक्ता रुझानों ने इस सेक्टर को प्रभावित किया है। फिर भी, त्योहारी सीजन और कंपनियों की नई रणनीतियां इस सेक्टर को फिर से चमक दे सकती हैं। उपभोक्ताओं को सावधानीपूर्वक निवेश करने और बाजार के रुझानों पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।
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