होम लोन सस्ता, फिर भी 27% तक घटी घरों की बिक्री: क्या हैं कारण?
हाल ही में होम लोन की ब्याज दरों में कमी देखी गई है, जिसके बाद उम्मीद थी कि रियल एस्टेट मार्केट में उछाल आएगा। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, बड़े शहरों में घरों की बिक्री में 27% तक की गिरावट दर्ज की गई है। यह विरोधाभास कई सवाल उठाता है। आखिर क्यों लोग सस्ते होम लोन के बावजूद घर खरीदने से हिचक रहे हैं?
होम लोन ब्याज दरों में कमी
2024 के अंत और 2025 की शुरुआत में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य वित्तीय संस्थानों ने होम लोन की ब्याज दरों में कमी की थी। वर्तमान में, औसत 30-वर्षीय फिक्स्ड-रेट होम लोन की ब्याज दर 6.5% से 7% के बीच है, जो 2023 के 8% के उच्चतम स्तर से काफी कम है। इस कमी से मासिक EMI में काफी राहत मिली है। उदाहरण के लिए, ₹50 लाख के लोन पर 20 साल के लिए 8% ब्याज दर पर EMI ₹41,822 थी, जो अब 6.5% पर घटकर ₹37,289 हो गई है। फिर भी, यह राहत रियल एस्टेट बिक्री को बढ़ाने में नाकाम रही।
घरों की बिक्री में 27% की गिरावट
हाल के आंकड़ों के अनुसार, मुंबई, दिल्ली-NCR, बेंगलुरु, और चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों में आवासीय संपत्तियों की बिक्री में 27% तक की कमी आई है। यह गिरावट तब आई है जब होम लोन की दरें कम हुई हैं, जो सामान्य रूप से मांग को बढ़ाने में मदद करती हैं। लेकिन इस बार, कई कारकों ने मिलकर इस स्थिति को जटिल बना दिया है।

बिक्री में गिरावट के प्रमुख कारण
- उच्च संपत्ति मूल्य: पिछले पांच वर्षों में घरों की कीमतें 50% तक बढ़ी हैं। 2025 की पहली तिमाही में औसत घर की कीमत ₹4.17 लाख थी, जो 2020 की तुलना में ₹1 लाख अधिक है। यह वृद्धि पहली बार घर खरीदने वालों के लिए affordability crisis पैदा कर रही है।
- कम आपूर्ति (Low Inventory): कई शहरों में उपलब्ध घरों की संख्या सीमित है। कम ब्याज दरों के बावजूद, मकान मालिक अपने कम ब्याज दर वाले मौजूदा लोन को छोड़कर नए घर खरीदने या बेचने से हिचक रहे हैं। इससे बाजार में आपूर्ति की कमी हो रही है।
- आर्थिक अनिश्चितता: हाल के महीनों में टैरिफ और व्यापार नीतियों में बदलाव के कारण आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है। इससे उपभोक्ता बड़े निवेश, जैसे घर खरीदने, से बच रहे हैं।
- उच्च जीवन लागत: बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत ने कई परिवारों के बजट को प्रभावित किया है। भले ही EMI कम हो, लेकिन प्रॉपर्टी टैक्स, मेंटेनेंस, और अन्य खर्चों ने खरीदारी को मुश्किल बना दिया है।
- खरीदारों का इंतजार: कई संभावित खरीदार और कम ब्याज दरों की उम्मीद में खरीदारी टाल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के अंत तक ब्याज दरें 6.2% तक गिर सकती हैं, जिसके कारण लोग अभी इंतजार कर रहे हैं।
रियल एस्टेट मार्केट पर प्रभाव
- मांग में कमी: सस्ते लोन के बावजूद, मकानों की मांग में कमी आई है। मॉर्टगेज आवेदनों में भी 2% की गिरावट दर्ज की गई है।
- डेवलपर्स पर दबाव: बिक्री में कमी के कारण डेवलपर्स को अपनी परियोजनाओं के लिए फंडिंग जुटाने में कठिनाई हो रही है। इससे नए प्रोजेक्ट्स में देरी हो सकती है।
- किराये के बाजार पर प्रभाव: कम ब्याज दरों से मल्टी-फैमिली हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे किराये की कीमतें स्थिर हो सकती हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के अंत तक ब्याज दरें और कम हो सकती हैं, जो रियल एस्टेट मार्केट को पुनर्जनन दे सकता है। फैंनी मॅई और नेशनल एसोसिएशन ऑफ होम बिल्डर्स के अनुसार, 2025 के अंत तक 30-वर्षीय ब्याज दर 6.2% से 6.7% के बीच रह सकती है। इसके अलावा, सरकार की किफायती हाउसिंग योजनाएं और डेवलपर्स द्वारा प्रोत्साहन (जैसे मुफ्त रजिस्ट्रेशन या फर्नीचर पैकेज) बिक्री को बढ़ा सकते हैं।

खरीदारों के लिए सुझाव
- बजट बनाएं: मासिक भुगतान, प्रॉपर्टी टैक्स, और अन्य खर्चों को ध्यान में रखकर बजट बनाएं।
- मार्केट रिसर्च: अपने क्षेत्र में उपलब्ध घरों की कीमत और इन्वेंट्री पर नजर रखें। रियल एस्टेट एजेंट की मदद लें।
- फिक्स्ड-रेट लोन: ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए फिक्स्ड-रेट होम लोन चुनें।
- डाउन पेमेंट बढ़ाएं: 20% डाउन पेमेंट करके प्राइवेट मॉर्टगेज इंश्योरेंस (PMI) से बचें।
- रीफाइनेंसिंग पर विचार: अगर आपके पास पहले से हाई-रेट लोन है, तो कम दरों का लाभ उठाने के लिए रीफाइनेंसिंग करें।
निष्कर्ष
होम लोन की ब्याज दरों में कमी के बावजूद, उच्च घर की कीमतें, कम आपूर्ति, और आर्थिक अनिश्चितता ने रियल एस्टेट बिक्री को प्रभावित किया है। खरीदारों को सावधानीपूर्वक योजना बनानी चाहिए और बाजार की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए। जैसे-जैसे ब्याज दरें और कम होंगी और आर्थिक स्थिरता बढ़ेगी, रियल एस्टेट मार्केट में सुधार की उम्मीद है। अभी के लिए, स्मार्ट निर्णय और सही समय का इंतजार करना खरीदारों के लिए फायदेमंद हो सकता है।