उत्तराखंड के स्कूलों में अब रोज पढ़े जाएंगे गीता के श्लोक: एक नई पहल

उत्तराखंड के स्कूलों में अब रोज पढ़े जाएंगे गीता के श्लोक: एक नई पहल

उत्तराखंड सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिसके तहत राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में अब प्रतिदिन सुबह की प्रार्थना सभा में श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक पढ़े जाएंगे। यह पहल न केवल विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और आत्मविकास को बढ़ावा देगी, बल्कि प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने का एक अनूठा प्रयास भी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के निर्देश पर शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य संस्कारयुक्त शिक्षा को बढ़ावा देना है।

गीता के श्लोक पढ़ने का महत्व

श्रीमद्भगवद्गीता हिंदू धर्म का एक पवित्र ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जीवन, कर्म, धर्म और आत्मा के रहस्यों की गहन शिक्षा दी है। गीता के श्लोक न केवल आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि मानसिक शांति, धैर्य, और निष्काम कर्म की भावना को भी प्रेरित करते हैं।

  • नैतिक शिक्षा: गीता के श्लोक बच्चों में नैतिकता, कर्तव्यबोध, और सकारात्मक सोच का विकास करते हैं।
  • मानसिक शांति: नियमित पाठ से विद्यार्थियों में तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • सांस्कृतिक जागरूकता: यह पहल भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान को बढ़ावा देती है।

उत्तराखंड सरकार का यह कदम क्यों खास है?

उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखता, बल्कि बच्चों के समग्र विकास पर ध्यान देता है।

  1. शिक्षा और संस्कार का संगम: यह पहल शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में संस्कार और नैतिकता को बढ़ावा देती है।
  2. वैज्ञानिक दृष्टिकोण: श्लोकों के साथ उनके अर्थ को समझाने पर जोर दिया गया है, जिससे बच्चे गीता के वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण को भी समझ सकें।
  3. रामायण और गीता का समावेश: जब तक नया पाठ्यक्रम लागू नहीं होता, तब तक सुबह की प्रार्थना में गीता और रामायण के श्लोक पढ़े जाएंगे।
उत्तराखंड के स्कूलों में अब रोज पढ़े जाएंगे गीता के श्लोक: एक नई पहल
उत्तराखंड के स्कूलों में अब रोज पढ़े जाएंगे गीता के श्लोक: एक नई पहल

इस पहल का कार्यान्वयन

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए हैं कि प्रत्येक दिन कम से कम एक श्लोक को उसके अर्थ सहित पढ़ाया जाए। यह प्रक्रिया सुबह की प्रार्थना सभा में शामिल की गई है, जिससे बच्चों को दिन की शुरुआत प्रेरणादायक और सकारात्मक तरीके से हो।

  • प्रशिक्षण: शिक्षकों को श्लोकों के अर्थ को सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
  • छात्रों की भागीदारी: बच्चों को श्लोक याद करने और उनके अर्थ पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • नया पाठ्यक्रम: भविष्य में गीता और रामायण को स्कूलों के पाठ्यक्रम में औपचारिक रूप से शामिल करने की योजना है।

समाज और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

इस निर्णय को लेकर समाज में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां कुछ लोग इसे भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाला कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे धार्मिक शिक्षा के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम धार्मिक शिक्षा देने के लिए नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।

उत्तराखंड के स्कूलों में अब रोज पढ़े जाएंगे गीता के श्लोक: एक नई पहल
उत्तराखंड के स्कूलों में अब रोज पढ़े जाएंगे गीता के श्लोक: एक नई पहल

गीता के कुछ प्रेरणादायक श्लोक

यहां कुछ गीता के श्लोक दिए गए हैं, जो बच्चों को प्रेरित कर सकते हैं:

  1. कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
    अर्थ: तुम्हें अपने कर्म पर अधिकार है, फल की चिंता मत कर। यह श्लोक बच्चों को निःस्वार्थ कर्म करने की प्रेरणा देता है।
  2. यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
    अर्थ: जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब मैं अवतार लेता हूँ। यह श्लोक बच्चों को धर्म और नैतिकता के महत्व को समझाता है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड सरकार का यह कदम न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान करता है, बल्कि बच्चों को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का एक अनूठा प्रयास है। श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का नियमित पाठ बच्चों में सकारात्मक सोच, धैर्य, और आत्मविश्वास को बढ़ावा देगा। यह पहल निश्चित रूप से भविष्य की पीढ़ियों को एक मजबूत और संस्कारयुक्त आधार प्रदान करेगी।

Author

  • flasahsamachar

    मैं संजना डोंगरे, हिंदी ब्लॉगर और कंटेंट क्रिएटर हूं। पिछले 5 सालों से टेक्नोलॉजी, डिजिटल मार्केटिंग और न्यूज़ पर 700+ आर्टिकल्स लिखे हैं। मेरा उद्देश्य है पाठकों तक सरल व भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना।

Leave a Comment