मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के संबंध अत्यंत तनावपूर्ण हैं, जिसका मुख्य कारण अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला है। इस हमले में 26 लोग मारे गए (25 भारतीय और 1 नेपाली पर्यटक), और भारत ने इसके लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूह ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) को जिम्मेदार ठहराया। पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज किया, जिसके बाद सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक तनाव चरम पर पहुंच गया।
ऑपरेशन सिंदूर (7 मई 2025)
भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर (PoK) में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। भारतीय वायुसेना ने रावलपिंडी, सुक्कुर और रहीम यार खान में पाकिस्तानी वायुसेना ठिकानों पर हमले किए। भारत ने दावा किया कि 150 से अधिक आतंकी मारे गए, जबकि पाकिस्तान ने इसे “नागरिक क्षेत्रों पर हमला” बताया और 60 नागरिकों की मौत का दावा किया।
पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी में भारतीय चौकियों को निशाना बनाया गया। भारत ने 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें आतंकी प्रशिक्षण शिविर, हथियार डिपो और कमांड सेंटर शामिल थे। ये ठिकाने PoK के मुजफ्फराबाद, कोटली और अन्य क्षेत्रों में थे, साथ ही पाकिस्तान के मुख्य भूभाग में रावलपिंडी और सुक्कुर जैसे शहरों में।
भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी वायुसेना के ठिकानों (रावलपिंडी और रहीम यार खान) पर भी हमले किए, क्योंकि भारत का दावा था कि इन ठिकानों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।ऑपरेशन में सटीक लक्ष्यीकरण के लिए ड्रोन, मिराज-2000 और राफेल लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया, साथ ही स्टैंड-ऑफ हथियार जैसे ब्रह्मोस मिसाइलों का उपयोग संभावित था। ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को मजबूत किया और पाकिस्तान के प्रॉक्सी युद्ध को झटका दिया, लेकिन इसके परिणामस्वरूप तनाव, परमाणु विवाद और आर्थिक दबाव बढ़ा। अल्पकाल में, सीमा पर तनाव और कूटनीतिक गतिरोध बना रहेगा। दीर्घकाल में, शांति के लिए दोनों देशों को आतंकवाद, जल संधि और कश्मीर जैसे मुद्दों पर बातचीत करनी होगी, लेकिन वर्तमान में विश्वास की कमी इसे मुश्किल बना रही है।

तनाव के कारण होने वाले परिणाम और प्रभाव
मानवीय नुकसान: कश्मीर में LoC के पास रहने वाले नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। भारत ने दावा किया कि 7 मई को पाकिस्तानी गोलीबारी में 16 लोग मारे गए, जबकि पाकिस्तान ने भारत पर मस्जिदों और नागरिक क्षेत्रों पर हमले का आरोप लगाया।

आर्थिक प्रभाव: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखी गई, और निवेशक सतर्क हैं। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, जो पहले से संकट में है, को और नुकसान हो सकता है।UN और IMF की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत 2025 में 6.3% GDP वृद्धि के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। मजबूत घरेलू मांग और सरकारी खर्च ने स्थिर रोजगार और 4.3% मुद्रास्फीति (RBI के लक्ष्य के भीतर) सुनिश्चित की है।हालांकि, कुछ विश्लेषकों (जैसे जयराम रमेश) ने 2024-25 की दूसरी तिमाही में GDP वृद्धि में कमी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मंदी की ओर इशारा किया, जो ऑपरेशन से पहले की चिंताएं थीं। ऑपरेशन ने इन चिंताओं को बढ़ाया नहीं, क्योंकि भारत की आर्थिक नीतियां इसे संभालने में सक्षम थीं।
ऑपरेशन के बावजूद, भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति मजबूत रही, और यह 2025 में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
खेल और मनोरंजन: भारत में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) और पाकिस्तान में पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) को सुरक्षा कारणों से निलंबित या स्थानांतरित कर दिया गया।
चीन पर असर: पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए गए चीनी हथियारों (जैसे PL-15 मिसाइल और HQ-9) के खराब प्रदर्शन से चीन की हथियार निर्यातक छवि को नुकसान हुआ।
भारत पर प्रभाव
- भारत ने जल प्रबंधन के लिए वैकल्पिक योजनाएं शुरू कीं, जैसे डैम और नहर परियोजनाएं। इससे जम्मू-कश्मीर और पंजाब में सिंचाई और बिजली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जो दीर्घकालिक आर्थिक लाभ देगा।
- अल्पकाल में, इन परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त निवेश और बुनियादी ढांचे की लागत बढ़ी, लेकिन भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति ने इसे संभाल लिया।

भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, जिससे पाकिस्तान की जल आपूर्ति और कृषि पर गंभीर संकट मंडराने लगा। यह कदम पाकिस्तान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को “ध्वस्त” करने की दिशा में है।
भारत के सैन्य खर्च और बजट पर प्रभाव
ऑपरेशन सिंदूर में राफेल, मिराज-2000, और संभवतः ब्रह्मोस मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ, जिससे सैन्य खर्च बढ़ा। नियंत्रण रेखा (LoC) पर अतिरिक्त सैन्य तैनाती और हाई अलर्ट ने भी लागत बढ़ाई। भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और स्वदेशी हथियार (जैसे आकाश मिसाइल, ब्रह्मोस) ने इस खर्च को वहन करने की क्षमता दिखाई।यह खर्च भारत के रक्षा बजट (2025-26 में लगभग 6.2 लाख करोड़ रुपये) के भीतर प्रबंधनीय रहा, लेकिन दीर्घकालिक तनाव से बजट पर दबाव पड़ सकता है।