अडानी ग्रुप ने बेची 20% हिस्सेदारी, शेयरों में 6% उछाल: पूरी जानकारी

अडानी ग्रुप ने बेची 20% हिस्सेदारी, शेयरों में 6% उछाल: पूरी जानकारी

अडानी ग्रुप, भारत का एक प्रमुख औद्योगिक समूह, एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में, समूह ने अपनी FMCG संयुक्त उद्यम कंपनी, अडानी विल्मर लिमिटेड (AWL) में 20% हिस्सेदारी बेची है, जिसके बाद इसके शेयरों में 6% की उछाल देखी गई। इस हिस्सेदारी को सिंगापुर की विल्मर इंटरनेशनल ने खरीदा है, जो भारत में खाद्य तेल और FMCG क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी है। यह सौदा अडानी ग्रुप की रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपने गैर-प्रमुख व्यवसायों से बाहर निकलकर बुनियादी ढांचा और ऊर्जा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

हिस्सेदारी बिक्री का विवरण

अडानी ग्रुप ने अपनी सहायक कंपनी अडानी कमोडिटीज LLP के माध्यम से अडानी विल्मर लिमिटेड में 20% हिस्सेदारी बेची है। इस सौदे में 17.54 करोड़ शेयर (13.5% हिस्सेदारी) की बिक्री शामिल थी, साथ ही एक ग्रीन शू विकल्प के तहत अतिरिक्त 8.44 करोड़ शेयर (6.5% हिस्सेदारी) बेचने का प्रावधान था। इस ऑफर फॉर सेल (OFS) की कीमत 275 रुपये प्रति शेयर निर्धारित की गई थी, जो बाजार मूल्य से 15% कम थी। इस सौदे से अडानी ग्रुप ने 4,850 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

इसके अतिरिक्त, अडानी एंटरप्राइजेज ने दिसंबर 2024 में घोषणा की थी कि वह अडानी विल्मर से पूरी तरह बाहर निकल रही है। इस प्रक्रिया के तहत, शेष 31% हिस्सेदारी को विल्मर इंटरनेशनल को 305 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर बेचा जाएगा, जिससे कुल सौदा मूल्य 18,817 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

शेयरों में 6% उछाल का कारण

हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा के बाद, अडानी विल्मर के शेयरों में 6% की उछाल देखी गई। यह उछाल निवेशकों के बीच बढ़ते विश्वास को दर्शाता है, क्योंकि यह सौदा अडानी ग्रुप की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और इसके बुनियादी ढांचा व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति का हिस्सा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस सौदे से अडानी ग्रुप को 2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की नकदी प्राप्त होगी, जिसका उपयोग वह अपने हवाई अड्डों, सड़कों, डेटा सेंटरों और हरित ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश के लिए करेगा।

हालांकि, कुछ समय पहले अडानी विल्मर के शेयरों में 9% तक की गिरावट देखी गई थी, जब हिस्सेदारी बिक्री की शुरुआती घोषणा हुई थी। लेकिन बाजार ने इस सौदे को सकारात्मक रूप से लिया, जिसके परिणामस्वरूप शेयरों में तेजी आई।

अडानी ग्रुप की रणनीति

अडानी ग्रुप का यह कदम उनकी पोर्टफोलियो को सुव्यवस्थित करने की रणनीति का हिस्सा है। समूह ने हाल के वर्षों में अपने बुनियादी ढांचा और ऊर्जा व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए गैर-प्रमुख क्षेत्रों से बाहर निकलने का फैसला किया है। अडानी विल्मर, जो फॉर्च्यून ब्रांड के तहत खाद्य तेल, गेहूं का आटा, दाल, चावल और चीनी का उत्पादन करता है, भारत में FMCG क्षेत्र में एक प्रमुख नाम है। लेकिन अडानी ग्रुप अब अपने संसाधनों को हवाई अड्डों, बंदरगाहों, हरित ऊर्जा, और डेटा सेंटरों जैसे क्षेत्रों में केंद्रित करना चाहता है।

इसके अलावा, यह सौदा अडानी ग्रुप के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नियमों का पालन करने का एक हिस्सा है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के अनुसार, बड़ी कंपनियों को कम से कम 25% शेयर सार्वजनिक निवेशकों के पास होने चाहिए। इस सौदे के बाद, अडानी विल्मर में प्रमोटरों की हिस्सेदारी 74.37% हो गई है, और शेष 25.63% सार्वजनिक शेयरधारकों के पास है।

अडानी ग्रुप ने बेची 20% हिस्सेदारी, शेयरों में 6% उछाल: पूरी जानकारी
अडानी ग्रुप ने बेची 20% हिस्सेदारी, शेयरों में 6% उछाल: पूरी जानकारी

विल्मर इंटरनेशनल की भूमिका

सिंगापुर की विल्मर इंटरनेशनल, जो अडानी विल्मर में पहले से ही एक संयुक्त उद्यम भागीदार थी, अब इस सौदे के बाद कंपनी में 68% हिस्सेदारी की मालिक होगी। विल्मर का इरादा अडानी विल्मर को भारत के FMCG बाजार में और मजबूत करने का है। कंपनी अपनी वैश्विक ब्रांड्स को भारतीय बाजार में लाने और खाद्य तेल और अन्य FMCG उत्पादों की व्यापक वितरण नेटवर्क का लाभ उठाने की योजना बना रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि विल्मर ITC जैसी रणनीति अपनाएगा, जिसमें वह अपने मुख्य व्यवसाय का उपयोग करके अन्य FMCG श्रेणियों में विस्तार करेगा।

बाजार और निवेशकों पर प्रभाव

इस सौदे ने न केवल अडानी विल्मर के शेयरों को प्रभावित किया, बल्कि अडानी ग्रुप की अन्य कंपनियों, जैसे अडानी एंटरप्राइजेज, के शेयरों में भी सकारात्मक हलचल देखी गई। अडानी एंटरप्राइजेज ने हाल ही में 400 करोड़ रुपये में एयर वर्क्स इंडिया में 85.1% हिस्सेदारी हासिल की, जिससे विमानन MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर, और ओवरहॉल) क्षेत्र में उसकी उपस्थिति मजबूत हुई। इसके अलावा, अडानी एंटरप्राइजेज ने Q4 FY25 में 752% की शुद्ध लाभ वृद्धि दर्ज की, जो मुख्य रूप से अडानी विल्मर में हिस्सेदारी बिक्री से प्राप्त असाधारण लाभ के कारण थी।

निवेशकों के लिए यह सौदा अडानी ग्रुप की वित्तीय स्थिरता और रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने चिंता जताई है कि अडानी विल्मर की बिक्री वृद्धि में कमी (-11.9% FY23-24 में) और ROCE (रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड) में गिरावट (15% से 10%) कंपनी की भविष्य की लाभप्रदता पर सवाल उठा सकती है।

अडानी ग्रुप ने बेची 20% हिस्सेदारी, शेयरों में 6% उछाल: पूरी जानकारी
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निष्कर्ष

अडानी ग्रुप द्वारा अडानी विल्मर में 20% हिस्सेदारी की बिक्री और शेयरों में 6% की उछाल भारतीय शेयर बाजार में एक महत्वपूर्ण घटना है। यह सौदा न केवल अडानी ग्रुप की रणनीति को दर्शाता है, बल्कि भारत के FMCG क्षेत्र में विल्मर इंटरनेशनल की बढ़ती महत्वाकांक्षा को भी उजागर करता है। निवेशकों के लिए, यह सौदा अडानी ग्रुप की कंपनियों में निवेश के अवसरों और जोखिमों का मूल्यांकन करने का एक मौका है।

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  • flasahsamachar

    मैं संजना डोंगरे, हिंदी ब्लॉगर और कंटेंट क्रिएटर हूं। पिछले 5 सालों से टेक्नोलॉजी, डिजिटल मार्केटिंग और न्यूज़ पर 700+ आर्टिकल्स लिखे हैं। मेरा उद्देश्य है पाठकों तक सरल व भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना।

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