मोबाइल नंबर रिवोकेशन लिस्ट (MNRL) और डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) का उपयोग
क्या है बदलाव?
- मोबाइल नंबर रिवोकेशन लिस्ट (MNRL): यह एक डेटाबेस है जिसे NPCI और टेलीकॉम ऑपरेटर्स मिलकर बनाए रखते हैं। इसमें उन मोबाइल नंबरों की जानकारी होती है जो निष्क्रिय (90 दिनों तक उपयोग न होने पर) या रीसाइकल्ड (किसी नए ग्राहक को पुन: आवंटित) हो चुके हैं। MNRL का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यूपीआई ट्रांजैक्शन्स गलत या पुराने नंबरों से प्रभावित न हों, जिससे धोखाधड़ी और ट्रांजैक्शन त्रुटियाँ कम हों।
- डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP): यह एक AI और डेटा एनालिटिक्स आधारित प्लेटफॉर्म है जो संदिग्ध गतिविधियों और जोखिम भरे मोबाइल नंबरों की पहचान करता है। DIP बैंकों और यूपीआई ऐप्स को रीयल-टाइम में जोखिम विश्लेषण प्रदान करता है, ताकि संभावित धोखाधड़ी को रोका जा सके।
- नया नियम (1 अप्रैल 2025 से लागू): NPCI ने बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSPs), और थर्ड-पार्टी ऐप्स (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) को निर्देश दिया है कि वे अपने यूपीआई डेटाबेस को MNRL और DIP का उपयोग करके साप्ताहिक रूप से अपडेट करें।
- इसके तहत, निष्क्रिय या रीसाइकल्ड मोबाइल नंबरों से जुड़े यूपीआई आईडी को निष्क्रिय या हटाया जाएगा।
- अगर कोई मोबाइल नंबर 90 दिनों तक निष्क्रिय रहता है (टेलीकॉम नियमों के अनुसार), तो उसे MNRL में शामिल किया जाएगा, और उससे जुड़ा यूपीआई खाता स्वचालित रूप से निष्क्रिय हो सकता है।
नया सुरक्षा नियम: जोखिम भरे नंबरों पर ट्रांजैक्शन ब्लॉक (30 जून 2025)
क्या है बदलाव?
- नया नियम: 30 जून 2025 से, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) एक नया सुरक्षा नियम लागू करेगा, जिसके तहत जोखिम भरे या संदिग्ध मोबाइल नंबरों से होने वाले यूपीआई ट्रांजैक्शन्स को ब्लॉक किया जा सकता है।
- प्रक्रिया:NPCI का डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) और अन्य AI-आधारित टूल्स का उपयोग करके मोबाइल नंबरों की रीयल-टाइम जाँच की जाएगी।
- यदि कोई मोबाइल नंबर धोखाधड़ी, संदिग्ध गतिविधियों, या बार-बार गलत ट्रांजैक्शन्स से जुड़ा पाया जाता है, तो उससे संबंधित यूपीआई ट्रांजैक्शन को सिस्टम स्वचालित रूप से अस्वीकार कर देगा।
- यह नियम विशेष रूप से उन नंबरों पर लागू होगा जो मोबाइल नंबर रिवोकेशन लिस्ट (MNRL) में शामिल हैं या जिनका इतिहास जोखिम भरा माना जाता है।

उद्देश्य:
यूपीआई प्लेटफॉर्म पर धोखाधड़ी (जैसे फिशिंग, अनधिकृत ट्रांजैक्शन्स) को कम करना। गलत अकाउंट में पैसे ट्रांसफर होने की समस्या को रोकना। यूपीआई सिस्टम की विश्वसनीयता और उपयोगकर्ता भरोसे को बढ़ाना।
कैसे काम करेगा?
ट्रांजैक्शन शुरू होने से पहले, यूपीआई सिस्टम मोबाइल नंबर की जाँच करेगा। अगर नंबर जोखिम भरा पाया जाता है (उदाहरण के लिए, बार-बार असफल ट्रांजैक्शन्स, धोखाधड़ी की शिकायतें, या रीसाइकल्ड नंबर), तो ट्रांजैक्शन ब्लॉक हो जाएगा, और यूजर को सूचना मिलेगी।
यूजर्स पर प्रभाव:
अगर आपका मोबाइल नंबर संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ा है या लंबे समय तक निष्क्रिय रहा है, तो आपके यूपीआई ट्रांजैक्शन्स असफल हो सकते हैं। नए यूजर्स, जिन्हें रीसाइकल्ड नंबर आवंटित हुए हैं, को यूपीआई रजिस्ट्रेशन में दिक्कत हो सकती है।
यूपीआई सर्कल और अन्य नए फीचर्स
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई सर्कल (UPI Circle) फीचर 19 अगस्त 2024 को लॉन्च किया, जो प्राइमरी यूजर्स को अपने बैंक खाते को अधिकतम पांच सेकेंडरी यूजर्स (जैसे परिवार, दोस्त, या कर्मचारी) के साथ साझा करने की अनुमति देता है। यह दो प्रकार की डेलिगेशन प्रदान करता है: पूर्ण डेलिगेशन, जिसमें सेकेंडरी यूजर बिना अतिरिक्त अनुमति के 15,000 रुपये मासिक और 5,000 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तक खर्च कर सकता है, और आंशिक डेलिगेशन, जिसमें प्राइमरी यूजर को यूपीआई पिन के साथ ट्रांजैक्शन को मंजूरी देनी होती है। यह फीचर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो बैंक खाता नहीं रखते या डिजिटल लेनदेन में असहज हैं, जैसे बुजुर्ग या नाबालिग। प्राइमरी यूजर क्यूआर कोड, यूपीआई आईडी, या कॉन्टैक्ट लिस्ट के जरिए सेकेंडरी यूजर को जोड़ सकता है, और ट्रांजैक्शन सीमाएँ निर्धारित कर सकता है। अन्य नए फीचर्स में यूपीआई लाइट की वॉलेट सीमा 2,000 से बढ़ाकर 5,000 रुपये, यूपीआई 123Pay की ट्रांजैक्शन सीमा 5,000 से 10,000 रुपये, और यूपीआई एटीएम शामिल हैं, जो क्यूआर कोड स्कैन करके बिना कार्ड के नकदी निकासी की सुविधा देता है। ऑटो टॉप-अप और वॉयस-बेस्ड पेमेंट्स ने भी छोटे लेनदेन को आसान बनाया है।

कलेक्ट पेमेंट्स पर प्रतिबंध
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई (UPI) पर “कलेक्ट पेमेंट्स” फीचर को सीमित करने का फैसला किया है ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी को कम किया जा सके। 1 अप्रैल 2025 से, यह सुविधा केवल बड़े और सत्यापित मर्चेंट्स तक सीमित होगी। व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) कलेक्ट पेमेंट्स की सीमा 2,000 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है। इस कदम का उद्देश्य अनधिकृत कलेक्ट रिक्वेस्ट्स के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रोकना है, जो अक्सर फर्जी अनुरोधों के रूप में सामने आती हैं। उद्योग अनुमानों के अनुसार, कलेक्ट पेमेंट्स कुल मर्चेंट ट्रांजैक्शन्स का केवल 3% हिस्सा हैं, क्योंकि बड़े मर्चेंट्स अब डायरेक्ट यूपीआई इंटीग्रेशन का उपयोग करते हैं। यूजर्स को सलाह दी जाती है कि वे केवल विश्वसनीय स्रोतों से कलेक्ट रिक्वेस्ट्स स्वीकार करें और अपने यूपीआई ऐप को अपडेट रखें। यह नियम यूपीआई की सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ाने में मदद करेगा।
ट्रांजैक्शन लिमिट में बदलाव
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने यूपीआई ट्रांजैक्शन्स की सीमाओं में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सामान्य यूपीआई ट्रांजैक्शन्स की दैनिक सीमा 1 लाख रुपये है, लेकिन विशिष्ट क्षेत्रों के लिए सीमाएँ बढ़ाई गई हैं। 16 सितंबर 2024 से, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, टैक्स पेमेंट्स, IPOs, और RBI रिटेल डायरेक्ट स्कीम्स के लिए प्रति ट्रांजैक्शन सीमा 5 लाख रुपये है। कैपिटल मार्केट्स, बीमा, और विदेशी प्रेषण के लिए सीमा 2 लाख रुपये है। यूपीआई लाइट की वॉलेट सीमा 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये और प्रति ट्रांजैक्शन सीमा 500 रुपये से 1,000 रुपये की गई है। यूपीआई 123Pay (फीचर फोन यूजर्स के लिए) की प्रति ट्रांजैक्शन सीमा 5,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये की गई है। प्रति दिन अधिकतम 20 ट्रांजैक्शन्स की सीमा लागू है, लेकिन कुछ बैंकों में यह सीमा 10 हो सकती है, जैसे SBI। बैंकों के पास अपनी दैनिक सीमा (25,000 से 1 लाख रुपये) निर्धारित करने की स्वतंत्रता है। इन बदलावों का उद्देश्य बड़े लेनदेन को सुविधाजनक और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना है। यूजर्स को अपने बैंक की विशिष्ट सीमाओं की जाँच करनी चाहिए।

यूजर्स के लिए सुझाव
यूपीआई यूजर्स को नए नियमों और बदलावों के अनुरूप अपने लेनदेन को सुरक्षित और सुचारू रखने के लिए कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए। सबसे पहले, अपने बैंक और यूपीआई ऐप में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को हमेशा सक्रिय और अपडेट रखें, क्योंकि निष्क्रिय या रीसाइकल्ड नंबरों से ट्रांजैक्शन रुक सकते हैं। अपने यूपीआई ऐप (जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm) को नवीनतम वर्जन में अपडेट करें ताकि नए सुरक्षा फीचर्स और नियमों का लाभ मिल सके। संदिग्ध कलेक्ट रिक्वेस्ट्स या अनजान लिंक्स से बचें, और केवल विश्वसनीय स्रोतों से भुगतान स्वीकार करें। नियमित रूप से अपनी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री की जाँच करें ताकि किसी भी अनधिकृत गतिविधि का तुरंत पता चल सके। यूपीआई पिन को गोपनीय रखें और किसी के साथ साझा न करें। अगर ट्रांजैक्शन ब्लॉक होता है या कोई समस्या आती है, तो तुरंत अपने बैंक या यूपीआई ऐप के कस्टमर केयर से संपर्क करें। छोटे लेनदेन के लिए यूपीआई लाइट का उपयोग करें और नई सीमाओं (जैसे 5,000 रुपये) का लाभ उठाएँ। इन सावधानियों से यूपीआई अनुभव सुरक्षित और निर्बाध रहेगा।