सीट 11A जीवन रक्षक बनी विश्वास कुमार रमेश के लिए, विश्वास कुमार रमेश, जो 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान दुर्घटना में एकमात्र जीवित बचे, सीट 11A पर बैठे थे, जो बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर के इकॉनमी क्लास के पहले रो में इमरजेंसी एग्जिट के पास एक विंडो सीट थी। इस सीट की स्थिति ने उनकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सीट 11A की स्थिति
विश्वास कुमार रमेश की जान बचाने में उनकी सीट 11A की स्थिति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर के इकॉनमी क्लास के पहले रो में इमरजेंसी एग्जिट के ठीक बगल में थी। यह सीट, जो आमतौर पर यात्रियों द्वारा कम पसंद की जाती है क्योंकि इसमें खिड़की छोटी होती है या दृश्य सीमित होता है, रमेश के लिए जीवन रक्षक साबित हुई। 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए विमान हादसे में, फ्लाइट AI171 टेकऑफ के 30 सेकंड बाद मेहगनीनगर के पास एक हॉस्टल से टकरा गई। विमान के टूटने पर रमेश की सीट उस हिस्से में थी, जो सीधे प्रभावित नहीं हुआ, और इमरजेंसी एग्जिट के पास होने के कारण उन्हें बाहर निकलने का रास्ता मिला। सीट के सामने खाली जगह ने उन्हें रेंगकर छेद के माध्यम से बाहर निकलने में मदद की। एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, इमरजेंसी एग्जिट के पास की सीटें आपात स्थिति में तेजी से निकलने का अवसर देती हैं, बशर्ते निकास जाम न हो। रमेश की त्वरित प्रतिक्रिया और सीट 11A की रणनीतिक स्थिति ने मिलकर उनके बचाव को संभव बनाया, जिसे अब “मिरेकल सीट” के रूप में जाना जा रहा है।

सीट 11A को लेकर विशेषज्ञों की राय
एविएशन सेफ्टी विशेषज्ञों के अनुसार, विश्वास कुमार रमेश का सीट 11A पर बैठना, जो इमरजेंसी एग्जिट के ठीक बगल में थी, उनकी जान बचाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि इमरजेंसी एग्जिट के पास की सीटें आपात स्थिति में तेजी से बाहर निकलने का अवसर प्रदान करती हैं, क्योंकि ये निकास बिंदु नजदीक होते हैं। हालांकि, वे यह भी चेतावनी देते हैं कि सभी दुर्घटनाओं में ऐसी सीटें सुरक्षित नहीं होतीं, क्योंकि इमरजेंसी एग्जिट जाम हो सकते हैं या दुर्घटना की प्रकृति के कारण उपयोग में न आ सकें। रमेश की सीट के सामने खाली जगह ने उन्हें रेंगकर बाहर निकलने के लिए पर्याप्त स्थान दिया। विशेषज्ञों ने रमेश की त्वरित प्रतिक्रिया की भी सराहना की, जिसने उनकी जान बचाने में सहायता की। कुल मिलाकर, सीट 11A की रणनीतिक स्थिति और रमेश की सजगता ने इस चमत्कारी बचाव को संभव बनाया।

सीट 11A पर बैठे रमेश की त्वरित प्रतिक्रिया
विश्वास कुमार रमेश की त्वरित प्रतिक्रिया ने सीट 11A पर बैठे होने के साथ मिलकर उनकी जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाई। 12 जून 2025 को अहमदाबाद में एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद, रमेश ने पाया कि उनकी सीट के पास विमान का हिस्सा टूट गया था, जिससे एक छोटा छेद दिखाई दिया। उन्होंने तुरंत अपनी सीट बेल्ट खोली और अपने पैरों से उस छेद को धक्का देकर रेंगकर बाहर निकल गए। उनकी सीट के सामने खाली जगह ने उन्हें यह जोखिम भरा कदम उठाने में मदद की। रमेश ने बताया कि उन्हें लगा था कि वे मर चुके हैं, लेकिन उनकी सजगता और तेज निर्णय लेने की क्षमता ने उन्हें जीवित रहने का मौका दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी आपात स्थिति में इतनी जल्दी प्रतिक्रिया करना असाधारण है, और यह रमेश की मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है। उनकी इस त्वरित प्रतिक्रिया ने “मिरेकल सीट 11A” की कहानी को और भी प्रेरणादायक बना दिया।

चोटें और बचाव: रमेश को सीने, आँखों और पैरों में चोटें आईं, लेकिन उनकी स्थिति गंभीर नहीं थी। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाया और एम्बुलेंस से अहमदाबाद के सिविल अस्पताल ले जाया गया। वहां उनकी स्थिति स्थिर बताई गई, और डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें जल्द ही डिस्चार्ज किया जा सकता है।
दुखद नुकसान: रमेश अपने भाई अजय के साथ यात्रा कर रहे थे, जो विमान में किसी दूसरी रो में बैठे थे। दुर्भाग्यवश, अजय इस हादसे में नहीं बचे। रमेश ने अस्पताल से अपने परिवार को फोन कर बताया कि वह ठीक हैं, लेकिन अपने भाई के बारे में अनिश्चितता ने उन्हें और उनके परिवार को दुखी किया।
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