उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में गौरीकुंड के पास केदारनाथ रूट पर एक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलिकॉप्टर में छह लोग सवार थे जिनमें से पांच की मृत्यु हो गई है। Kedarnath Helicopter Crash: केदारनाथ हेलिकॉप्टर हादसा: कौन जिम्मेदार? जानिए पूरी घटना
15 जून 2025 को उत्तराखंड के केदारनाथ में एक दुखद हेलिकॉप्टर हादसे ने देश को और एक ज़टका दिया दिया। आर्यन एविएशन कंपनी का हेलिकॉप्टर, जो गुप्तकाशी से केदारनाथ धाम जा रहा था, गौरीकुंड-सोनप्रयाग के जंगलों में क्रैश हो गया। इस हादसे में सात यात्रियों में से पांच की मौत हो गई, जिसमें एक बच्चा और पायलट शामिल थे। यह चारधाम यात्रा मार्ग पर 40 दिनों में पांचवां हेलिकॉप्टर हादसा था, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
घटना का विवरण:
हादसा सुबह करीब 5:30 बजे हुआ, जब हेलिकॉप्टर सिरसी हेलीपैड से उड़ान भरने के तुरंत बाद बडासू के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जांच में खराब मौसम और खराब दृश्यता को कारण बताया गया। हेलिकॉप्टर का टेल रोटर एक खड़ी कार से टकराया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन पांच लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
जिम्मेदारी का सवाल:
यह हादसा बार-बार होने वाली लापरवाही को उजागर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, केदारनाथ क्षेत्र में हेलिकॉप्टर उड़ानों की निगरानी के लिए अपर्याप्त एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम, खराब मौसम में उड़ान की अनुमति, और पुराने हेलिकॉप्टरों का उपयोग प्रमुख कारण हैं। चारधाम यात्रा के दौरान प्रतिदिन 400 उड़ानें होती हैं, जिससे पायलटों पर दबाव बढ़ता है। 2022 में हुए एक हादसे के बाद UCADA ने DGCA से एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम की मांग की थी,
पिछले कुछ वर्षों में केदारनाथ में कई हेलिकॉप्टर हादसे हो चुके हैं। 2022 में सात लोगों की मौत, 2023 में एक UCADA अधिकारी की मौत, और मई 2025 में गंगोत्री के पास छह लोगों की मौत इसके उदाहरण हैं।

Chief Minister Pushkar Singh orders investigation मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह जांच के आदेश दिए
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन केवल जांच से काम नहीं चलेगा। हेलिकॉप्टरों की नियमित जांच, पायलटों के लिए बेहतर प्रशिक्षण, और मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करना जरूरी है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए सरकार, DGCA, और निजी एविएशन कंपनियों को मिलकर काम करना होगा।

यह हादसा न केवल एक त्रासदी है, बल्कि एक चेतावनी भी है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
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