PM मोदी के योगदान: 15 हज़ार से ज़्यादा लोगों के साथ योग और नेकती पत्र की प्रेरणा

PM मोदी के योगदान: 15 हज़ार से ज़्यादा लोगों के साथ योग और नेकती पत्र की प्रेरणा

योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का योगदान अभूतपूर्व रहा है। 2014 में संयुक्त राष्ट्र में उनके प्रस्ताव के बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। PM मोदी ने न केवल योग को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया, बल्कि इसे जन-जन तक पहुँचाने के लिए सामूहिक योग कार्यक्रमों का आयोजन किया।

2022 में कर्नाटक के मैसूर में 15 हज़ार से ज़्यादा लोगों के साथ योग करने से लेकर विशाखापट्टनम में लाखों लोगों के साथ योग सत्र तक, उनके प्रयासों ने योग को एक वैश्विक आंदोलन बनाया। यह लेख PM मोदी के योग को बढ़ावा देने वाले कार्यों और उनके प्रेरणादायी नेकती पत्र (नैतिक संदेश) पर केंद्रित है।

PM मोदी और योग: एक वैश्विक आंदोलन

PM मोदी ने योग को न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का साधन बनाया, बल्कि इसे वैश्विक शांति और एकता का प्रतीक भी स्थापित किया। उनके नेतृत्व में योग ने विश्व स्तर पर नई ऊँचाइयाँ छुई हैं।

1. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की स्थापना

  • प्रस्ताव और स्वीकृति: 27 सितंबर 2014 को, PM मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा। 11 दिसंबर 2014 को 177 देशों के समर्थन से यह प्रस्ताव स्वीकार हुआ।
  • वैश्विक प्रभाव: 191 देशों में 1,300 से अधिक स्थानों पर 2,000 से ज़्यादा योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो योग की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाते हैं।
  • 2025 में विशाखापट्टनम: 11वें योग दिवस पर, PM मोदी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 3 लाख लोगों और 40 देशों के राजनयिकों के साथ योग किया। इस आयोजन ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, जिसमें 50 लाख से ज़्यादा योग प्रमाणपत्र बाँटे गए।

2. 15 हज़ार से ज़्यादा लोगों के साथ योग

  • मैसूर, 2022: PM मोदी ने कर्नाटक के मैसूर पैलेस मैदान में 15 हज़ार से ज़्यादा लोगों के साथ सामूहिक योग प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, “योग किसी व्यक्ति मात्र के लिए नहीं, संपूर्ण मानवता के लिए है।” इस आयोजन की थीम ‘मानवता के लिए योग’ थी, जो योग के सार्वभौमिक महत्व को दर्शाती है।
  • प्रेरणादायी संदेश: PM मोदी ने योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर देते हुए कहा, “जब हम योग को जीने लगेंगे, तब योग दिवस हमारे लिए स्वास्थ्य, सुख, और शांति का जश्न मनाने का माध्यम बन जाएगा।”

3. योग को जन आंदोलन बनाने की अपील

  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण: PM मोदी ने योग की वैज्ञानिकता को आधुनिक चिकित्सा पद्धति में शामिल करने पर बल दिया। देश के बड़े मेडिकल संस्थान योग पर शोध कर रहे हैं, जिससे इसकी वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ रही है।
  • विशाखापट्टनम में संदेश: 2025 में, उन्होंने कहा, “योग सीमाओं, पृष्ठभूमि, उम्र या शारीरिक क्षमता से परे सभी के लिए है। यह मानवता को स्वास्थ्य, सद्भाव और चेतना में जोड़ता है।”
  • आंध्र प्रदेश की पहल: आंध्र प्रदेश सरकार ने ‘योग आंध्र अभियान’ शुरू किया, जिसका लक्ष्य 10 लाख लोगों की रोजाना योग करने वाली कम्युनिटी बनाना है।

PM मोदी के नेकती पत्र: योग के नैतिक संदेश

PM मोदी ने योग को न केवल शारीरिक व्यायाम के रूप में, बल्कि नैतिकता और मानवता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। उनके नेकती पत्र (नैतिक संदेश) योग के माध्यम से समाज और विश्व में शांति और एकता को बढ़ावा देते हैं।

PM मोदी के योगदान: 15 हज़ार से ज़्यादा लोगों के साथ योग और नेकती पत्र की प्रेरणा
PM मोदी के योगदान: 15 हज़ार से ज़्यादा लोगों के साथ योग और नेकती पत्र की प्रेरणा

1. शांति और संतुलन का संदेश

  • वैश्विक तनाव में योग की भूमिका: 2025 के योग दिवस पर, PM मोदी ने कहा, “दुर्भाग्य से आज पूरी दुनिया किसी न किसी तनाव से गुजर रही है। अशांति और अस्थिरता बढ़ रही है। ऐसे में योग हमें शांति की दिशा दिखाता है।”
  • सामाजिक और वैश्विक शांति: उन्होंने योग को समाज, राष्ट्र, और विश्व में शांति लाने वाला बताया। “योग हमारे लिए शांति लाता है। यह हमारे समाज और विश्व में शांति लाता है।”

2. ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ की थीम

  • 2025 की थीम: इस वर्ष की थीम ‘Yoga for One Earth, One Health’ ने योग को पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य से जोड़ा। पीएम मोदी ने इसे ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के भारतीय दर्शन से जोड़ते हुए कहा, “यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक दिशा है।”
  • प्रकृति के साथ सामंजस्य: विशाखापट्टनम के समुद्र तट पर 3 लाख लोगों के योग सत्र ने प्रकृति और प्रगति के मिश्रण को दर्शाया।

3. समावेशिता और सादगी

  • सभी के लिए योग: PM मोदी ने योग की सादगी पर जोर देते हुए कहा, “योग के लिए बस एक योगा मैट और थोड़ी सी जगह चाहिए।” इसे घर, कार्यस्थल, या समूह में किया जा सकता है।
  • समावेशी दृष्टिकोण: उन्होंने कहा, “योग कॉपीराइट, पेटेंट और रॉयल्टी भुगतान से मुक्त है। यह किसी भी उम्र और तंदुरुस्ती के स्तर पर किया जा सकता है।”

योग के माध्यम से भारत की वैश्विक पहचान

  • वैश्विक मंच पर योग: न्यूयॉर्क, लंदन, टोक्यो, और पेरिस जैसे शहरों में योग की तस्वीरें शांति, स्थिरता, और संतुलन का संदेश देती हैं।
  • गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में योग सत्र और विशाखापट्टनम में 3 लाख लोगों का योग प्रदर्शन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।
  • आदिवासी और दिव्यांग भागीदारी: विशाखापट्टनम में 2,000 से ज़्यादा आदिवासी छात्रों ने 108 मिनट तक सूर्य नमस्कार किया, और तेलंगाना में 3,000 दिव्यांगों ने योग शिविर में भाग लिया।
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PM मोदी के योगदान: 15 हज़ार से ज़्यादा लोगों के साथ योग और नेकती पत्र की प्रेरणा

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को एक वैश्विक जन आंदोलन बनाया है, जो स्वास्थ्य, शांति, और एकता का प्रतीक है। मैसूर में 15 हज़ार से ज़्यादा लोगों के साथ योग से लेकर विशाखापट्टनम में 3 लाख लोगों के साथ विश्व रिकॉर्ड तक, उनके प्रयासों ने योग को हर

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    मैं संजना डोंगरे, हिंदी ब्लॉगर और कंटेंट क्रिएटर हूं। पिछले 5 सालों से टेक्नोलॉजी, डिजिटल मार्केटिंग और न्यूज़ पर 700+ आर्टिकल्स लिखे हैं। मेरा उद्देश्य है पाठकों तक सरल व भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना।

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