रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर! डॉलर के मुकाबले 88.73 पर बंद, वीज़ा फीस बढ़ोतरी और FII आउटफ्लो से बढ़ा दबाव
भारतीय मुद्रा रुपया मंगलवार को भारी गिरावट के साथ इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 45 पैसे टूटकर 88.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इस तेज़ गिरावट के पीछे कई बड़े कारण सामने आए हैं, जिनमें अमेरिका की वीज़ा फीस बढ़ोतरी, विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक दबाव अहम हैं।
रुपए में इतनी गिरावट क्यों आई?
1. अमेरिकी वीज़ा फीस बढ़ोतरी
हाल ही में अमेरिका ने वीज़ा फीस में बढ़ोतरी की है, जिससे भारतीय आईटी और सर्विस सेक्टर पर असर पड़ा है। इससे डॉलर की मांग अचानक बढ़ गई, जिसने रुपए पर दबाव डाला।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Outflows)
पिछले कुछ हफ्तों से विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाज़ार से पैसा निकाल रहे हैं। लगातार हो रही बिकवाली से डॉलर की मांग और बढ़ गई और रुपया कमजोर हुआ।
3. कच्चे तेल की ऊँची कीमतें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊँचाई पर बनी हुई हैं। भारत आयात पर निर्भर है, ऐसे में तेल खरीदने के लिए अधिक डॉलर की ज़रूरत पड़ती है। इसका सीधा असर रुपये की वैल्यू पर हुआ।
4. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्ती
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों में बढ़ोतरी से डॉलर और मज़बूत हुआ है। इससे रुपया दबाव में आया और गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों और आम जनता पर असर
- आयात महंगा होगा: इलेक्ट्रॉनिक सामान, कच्चा तेल, विदेशी दवाइयाँ और मशीनरी की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- विदेश यात्रा महंगी: डॉलर महंगा होने से विदेश यात्रा का खर्च बढ़ जाएगा।
- विदेश में पढ़ाई पर असर: स्टूडेंट्स को शिक्षा और फीस के लिए ज्यादा रुपए चुकाने होंगे।
- शेयर मार्केट पर दबाव: रुपये की कमजोरी से विदेशी निवेशक और दूरी बना सकते हैं।

सरकार और रिज़र्व बैंक की चुनौती
रुपए की गिरावट को थामने के लिए RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) लगातार विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन डॉलर की तेज़ी और वैश्विक हालात ने स्थिति को और कठिन बना दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को नीतिगत सुधार और विदेशी निवेश आकर्षित करने पर ध्यान देना होगा।
निष्कर्ष
भारतीय रुपया 88.73 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद होकर अब तक का सबसे निचला स्तर छू चुका है। वीज़ा फीस बढ़ोतरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगे कच्चे तेल ने मिलकर इस गिरावट को और तेज़ किया है। आने वाले दिनों में सरकार और RBI की नीतियाँ ही तय करेंगी कि रुपया संभलेगा या और गिरेगा।