Zepto-Blinkit: क्या है डार्क स्टोर की असल सच्चाई? सरकार ने उठाया बड़ा कदम,क्या होते हैं डार्क स्टोर,समस्या कहां से शुरू हुई,Blinkit-Zepto पर क्या हुआ सरकार का फैसला,सरकार का कहना है,कंपनियों की सफाई क्या है,डार्क स्टोर मॉडल क्या होगा आगे
नई दिल्ली: भारत में तेजी से बढ़ती क्विक डिलीवरी सेवाओं ने लोगों की जिंदगी आसान बना दी है। Zepto, Blinkit, Swiggy Instamart जैसी कंपनियां 10-15 मिनट में ग्रॉसरी और डेली जरूरत की चीजें घर पहुंचा रही हैं। लेकिन इस तेज़ डिलीवरी के पीछे एक ऐसा सिस्टम काम कर रहा है, जिसे कहा जाता है – डार्क स्टोर (Dark Store)
क्या होते हैं डार्क स्टोर?
डार्क स्टोर दरअसल छोटे-छोटे गोदाम (Warehouses) होते हैं जो रिहायशी इलाकों में बनाए जाते हैं। यहां से सामान सीधे कस्टमर के पते पर भेजा जाता है। ये दुकानें आम लोगों के लिए खुली नहीं होतीं — यानी यहां सिर्फ ऑनलाइन ऑर्डर की पैकिंग और डिलीवरी होती है।
डार्क स्टोर 3 मुख्य उद्देश्य:
- क्विक डिलीवरी
- लोकल कस्टमर को टारगेट करना
- कम समय में ऑर्डर पूरा करना

समस्या कहां से शुरू हुई?
हाल ही में कई रिहायशी कॉलोनियों में डार्क स्टोर खोलने को लेकर स्थानीय लोगों ने शिकायतें दर्ज करवाईं। इनसे होने वाली समस्याएं हैं:
ट्रैफिक और जाम की स्थिति
डिलीवरी ब्वॉयज़ की भीड़
लगातार शोरगुल
अवैध पार्किंग
सुरक्षा को लेकर चिंता
Blinkit-Zepto पर क्या हुआ सरकार का फैसला?
महाराष्ट्र FDA ने जून 2025 में Blinkit और Zepto के कुछ डार्क स्टोर्स की खाद्य बिजनेस लाइसेंस न होने और गंदे, अस्वच्छ परिस्थितियों के चलते तत्काल सस्पेंशन कर दिया। Blinkit के पुणे, Balewadi वाले स्टोर को Food Safety Act के तहत बंद कर दिया गया, जबकि Zepto के मुंबई के Dharavi स्टोर पर भी गंभीर फ़ूड सेफ्टी उल्लंघनों के कारण लाइसेंस निलंबित किया गया। दोनों कंपनियों को सुधारात्मक कार्रवाई करने के बाद फिर से संचालन की अनुमति दी गई
सरकार का कहना है:
“रिहायशी इलाकों में व्यवसायिक गतिविधि बिना अनुमति के नहीं चल सकती।”

कंपनियों की सफाई क्या है?
Zepto और Blinkit जैसे ब्रांड्स का कहना है कि वे अपने संचालन को सभी नगर निगम नियमों के अनुसार चला रहे हैं।
- लोकल रोजगार दे रही हैं
- ट्रैफिक मैनेजमेंट के उपाय कर रही हैं
- डिलीवरी के समय स्लॉट बदलने पर विचार कर रही हैं
डार्क स्टोर मॉडल क्या होगा आगे?
ज़ोनिंग रेगुलेशन का पालन करना होगा
लाइसेंस और परमिट लेने होंगे
ट्रैफिक और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बदलाव करने होंगे
क्विक डिलीवरी ने जहां ग्राहकों को राहत दी है, वहीं इससे जुड़े डार्क स्टोर्स अब सवालों के घेरे में हैं। सरकार का कदम ग्राहकों और आम जनता — दोनों के हित में माना जा सकता है।