इनकम टैक्स बिल 2025: क्या LLP को देना होगा 18.5% टैक्स? पूरी जानकारी
इनकम टैक्स बिल 2025 को लेकर भारत में व्यापक चर्चा हो रही है, खासकर व्यापारियों और साझेदारी फर्मों के बीच। लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) के लिए यह सवाल उठ रहा है कि क्या नए इनकम टैक्स बिल के लागू होने पर उन्हें 18.5% की दर से टैक्स देना होगा।
इनकम टैक्स बिल 2025: एक अवलोकन
इनकम टैक्स बिल 2025, भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण विधेयक है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होने की संभावना है। यह बिल वर्तमान इनकम टैक्स एक्ट 1961 को प्रतिस्थापित करने के लिए लाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रणाली को सरल बनाना, करदाताओं के लिए अनुपालन को आसान करना, और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। इस बिल में व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), साझेदारी फर्मों, और LLP जैसे व्यवसायों के लिए टैक्स दरों और नियमों में कई बदलाव प्रस्तावित हैं।

LLP और 18.5% टैक्स दर: क्या है सच्चाई?
लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) भारत में छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों के लिए एक लोकप्रिय व्यवसाय संरचना है। यह साझेदारी और कंपनी के बीच का मिश्रण है, जो सीमित दायित्व और लचीले प्रबंधन की सुविधा प्रदान करता है। इनकम टैक्स बिल 2025 के संदर्भ में, यह चर्चा हो रही है कि क्या LLP को 18.5% की दर से टैक्स देना होगा।
वास्तव में, 18.5% टैक्स दर का उल्लेख वैकल्पिक न्यूनतम कर (Alternate Minimum Tax – AMT) के संदर्भ में किया गया है। यह टैक्स उन LLP और साझेदारी फर्मों पर लागू होता है, जिनकी समायोजित कुल आय (Adjusted Total Income) ₹20 लाख से अधिक है, और उनकी सामान्य कर देनदारी (Regular Tax Liability) समायोजित कुल आय के 18.5% से कम है। इसका मतलब है कि यदि LLP की कर देनदारी सामान्य दरों के तहत 18.5% से कम है, तो उसे AMT के तहत 18.5% टैक्स देना होगा।
AMT की गणना और लागू होने की शर्तें
- लागू होने की स्थिति: AMT उन LLP पर लागू होता है जो नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत नहीं हैं। यदि LLP ने नई कर व्यवस्था को चुना है, तो AMT के प्रावधान लागू नहीं होंगे।
- समायोजित कुल आय: यह आयकर अधिनियम के तहत कुछ विशिष्ट कटौतियों और समायोजनों के बाद गणना की जाती है।
- अधिभार और उपकर: AMT के साथ-साथ लागू अधिभार (Surcharge) और स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर (Health and Education Cess) भी जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि LLP की कुल आय ₹1 करोड़ से अधिक है, तो 12% अधिभार लागू हो सकता है, और 4% स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर सभी मामलों में लागू होगा।

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इनकम टैक्स बिल 2025 के अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान
इनकम टैक्स बिल 2025 में LLP और अन्य करदाताओं के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं:
- नई टैक्स व्यवस्था: नई टैक्स व्यवस्था के तहत व्यक्तियों और HUF के लिए टैक्स स्लैब को सरल बनाया गया है। हालांकि, यह व्यवस्था LLP पर सीधे लागू नहीं होती, लेकिन LLP के भागीदारों की व्यक्तिगत आय पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
- टैक्स छूट की सीमा: नई व्यवस्था में ₹12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है, और वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ यह सीमा ₹12.75 लाख तक हो जाती है।
- डिजिटल जांच: नए बिल के तहत, टैक्स चोरी की जांच में आयकर अधिकारी LLP के डिजिटल खातों, जैसे ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स, तक पहुंच सकते हैं। यह प्रावधान टैक्स अनुपालन को और सख्त करने के लिए है।
- स्टार्टअप्स के लिए छूट: 1 अप्रैल 2030 से पहले शुरू होने वाले स्टार्टअप्स को 10 में से 3 वर्षों के लिए 100% मुनाफे पर टैक्स छूट मिल सकती है, जो LLP संरचना में स्टार्टअप्स के लिए लाभकारी हो सकता है।
LLP के लिए टैक्स प्लानिंग: कैसे करें बचत?
LLP को टैक्स देनदारी को कम करने के लिए निम्नलिखित रणनीतियों पर विचार करना चाहिए:
- नई टैक्स व्यवस्था का चयन: यदि AMT लागू होने की संभावना है, तो LLP नई टैक्स व्यवस्था का चयन कर सकती है, जिसमें AMT के प्रावधान लागू नहीं होते।
- कटौतियों का लाभ: धारा 80C, 80CCC, और 80CCD के तहत निवेश और खर्चों पर कटौतियां ली जा सकती हैं, जैसे कि EPF, PPF, और NPS में निवेश।
- होम लोन कटौती: यदि LLP के भागीदारों ने होम लोन लिया है, तो धारा 24(b) के तहत ब्याज पर कटौती का दावा किया जा सकता है।
- टैक्स विशेषज्ञ से सलाह: एक अनुभवी टैक्स सलाहकार की मदद से LLP अपनी टैक्स देनदारी को अनुकूलित कर सकती है।
निष्कर्ष
इनकम टैक्स बिल 2025 के तहत LLP को 18.5% टैक्स दर केवल तभी देनी होगी, जब उनकी समायोजित कुल आय ₹20 लाख से अधिक हो और सामान्य कर देनदारी 18.5% से कम हो। यह दर वैकल्पिक न्यूनतम कर (AMT) के रूप में लागू होती है। LLP के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपनी टैक्स देनदारी की सही गणना करें और नई टैक्स व्यवस्था के लाभों का मूल्यांकन करें। इसके अलावा, डिजिटल जांच और अन्य नए प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, LLP को अपने टैक्स अनुपालन को मजबूत करना चाहिए।
अधिक जानकारी के लिए, आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (www.incometax.gov.in) पर जाएं या किसी टैक्स विशेषज्ञ से संपर्क करें।