ईरान ने हाइफा में अडानी के 4.2 बिलियन डॉलर के बंदरगाह को नष्ट कर दिया- विश्व ने हमले की निंदा की, पाकिस्तान ने समर्थन जताया
15 जून 2025 यह दावा वायरल हुआ कि ईरान ने इज़रायल के हाइफा बंदरगाह पर हमला कर अडानी समूह की 4.2 बिलियन डॉलर की कार्गो सुविधा को नष्ट कर दिया। साथ ही, यह भी कहा गया कि विश्व ने इस हमले की निंदा की, जबकि पाकिस्तान ने इसका समर्थन किया। हालांकि, विश्वसनीय स्रोतों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा भ्रामक और अतिशयोक्तिपूर्ण प्रतीत होता है। नीचे इस मामले का विस्तृत विश्लेषण और तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं।
हाइफा बंदरगाह इज़रायल का एक रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह है, जो भूमध्य सागर के तट पर स्थित है। यह इज़रायल के आयात-निर्यात का लगभग 30% हिस्सा संभालता है। अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) ने 2023 में इज़रायली कंपनी गडोट ग्रुप के साथ जॉइंट वेंचर में इस बंदरगाह की 70% हिस्सेदारी 1.2 बिलियन डॉलर में खरीदी थी।
यह सौदा 2054 तक बंदरगाह के संचालन की ज़िम्मेदारी देता है, जिसमें अडानी की हिस्सेदारी 70% और गडोट की 30% है। यह बंदरगाह अडानी पोर्ट्स के कुल कार्गो वॉल्यूम का लगभग 2-3% और राजस्व का 5% योगदान देता है।हाल ही में, इज़रायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। 13 जून 2025 को इज़रायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमला किया, जिसमें ईरान के कई सैन्य कमांडर और वैज्ञानिक मारे गए। जवाब में, ईरान ने 14 जून को इज़रायल के हाइफा बंदरगाह और आसपास की तेल रिफाइनरी पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया।

ईरान ने हाइफा में अडानी का 4.2 बिलियन डॉलर का बंदरगाह को नुकसान का दावा गलत
ईरान द्वारा 14 जून 2025 को इज़रायल के हाइफा बंदरगाह पर किए गए हमले के बाद सोशल मीडिया, विशेष रूप से X पर, यह दावा वायरल हुआ कि अडानी समूह की 4.2 बिलियन डॉलर की कार्गो सुविधा पूरी तरह नष्ट हो गई। हाइफा बंदरगाह, जिसमें अडानी की 70% हिस्सेदारी है, को कोई संरचनात्मक नुकसान नहीं हुआ, और यह सामान्य रूप से संचालित हो रहा है।
हमले में कुछ शार्पनेल बंदरगाह के रासायनिक टर्मिनल और पास की तेल रिफाइनरी पर गिरे, लेकिन कोई हताहत या बड़ा नुकसान नहीं हुआ। अडानी ने बंदरगाह में 1.2 बिलियन डॉलर का निवेश किया था, न कि 4.2 बिलियन, जिससे यह दावा अतिशयोक्तिपूर्ण और भ्रामक साबित होता है। X पर वायरल पोस्ट्स में अतिशयोक्ति और राजनीतिक प्रचार की मंशा देखी गई, जो तथ्यों पर आधारित नहीं है।

तेल रिफाइनरी को नुकसान
- ईरान के हमले में हाइफा के पास एक तेल रिफाइनरी को मामूली नुकसान की खबरें हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। यह रिफाइनरी अडानी समूह के स्वामित्व में नहीं है।
- हाइफा में इज़रायल की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी और नौसैनिक अड्डा भी निशाने पर था, लेकिन अडानी के बंदरगाह से इनका सीधा संबंध नहीं है।
ईरान ने हाइफा में अडानी के 4.2 बिलियन डॉलर के बंदरगाह को विश्व की निंदा और पाकिस्तान का समर्थन
ईरान द्वारा 14 जून 2025 को इज़रायल के हाइफा बंदरगाह पर किए गए हमले के बाद, सोशल मीडिया पर यह दावा वायरल हुआ कि विश्व ने इस हमले की निंदा की, जबकि पाकिस्तान ने इसका समर्थन किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर, विश्व समुदाय की ओर से इस हमले पर कोई स्पष्ट और एकजुट निंदा सामने नहीं आई है, संभवतः क्योंकि हमले का प्रभाव सीमित था और अडानी समूह के बंदरगाह को कोई नुकसान नहीं हुआ।
इसके विपरीत, इज़रायल के 13 जून 2025 को ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमले की निंदा कई देशों, जैसे रूस, चीन, कतर, इराक, और ओमान ने की थी, इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी क्षेत्र में सैन्य तनाव कम करने की अपील की थी।

पाकिस्तान के समर्थन के दावे के संबंध में, कुछ समाचार स्रोतों और X पोस्ट्स में उल्लेख है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और विदेश मंत्री इशाक दार ने ईरान के साथ एकजुटता जताई। पाकिस्तान ने इज़रायल के हमलों की निंदा करते हुए ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने का आह्वान किया। हालांकि, ईरान के हाइफा हमले के लिए पाकिस्तान के स्पष्ट समर्थन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान और ईरान के बीच ऐतिहासिक तनाव, जैसे 2024 में बलूचिस्तान में हमले, इस दावे को संदिग्ध बनाते हैं। यह दावा X पर अतिशयोक्ति और प्रचार से प्रेरित प्रतीत होता है, जो क्षेत्रीय तनाव का लाभ उठाकर भ्रामक सूचना फैलाने का प्रयास हो सकता है।