HMPV के कारण चीन की स्थिति
चीन में 2024 के अंत और 2025 की शुरुआत में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) के मामलों में तेज वृद्धि के कारण स्वास्थ्य संकट की स्थिति उत्पन्न हुई है। बीजिंग, चोंगकिंग, गुआंगदोंग और उत्तरी चीन के कई क्षेत्रों में इस श्वसन वायरस के मामले सामने आए हैं, जिसके चलते अस्पतालों में मरीजों की भीड़ और कुछ जगहों पर बेड की कमी की खबरें मिली हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भीड़भरे अस्पताल और गंभीर स्थिति का दावा किया गया, हालांकि कुछ स्थानीय नागरिकों, जैसे डालियान के एक भारतीय नागरिक राजू नायक ने, सामान्य स्थिति की बात कही। चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने सर्दियों में श्वसन रोगों की निगरानी के लिए एक पायलट सर्विलांस सिस्टम शुरू किया है और दावा किया है कि स्थिति नियंत्रण में है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने भी कहा कि चीन में यात्रा करना सुरक्षित है। फिर भी, अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट में आपातकाल और श्मशान घाटों में भीड़ की बात कही गई, जिसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, HMPV का प्रकोप मौसमी है और कोविड-19 जैसा गंभीर नहीं, लेकिन घनी आबादी और कमजोर निगरानी प्रणाली इसके प्रसार को बढ़ावा दे रही है।

चीन में HMPV के बार-बार फैलने के कारण
चीन में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) जैसे श्वसन वायरस के बार-बार फैलने के पीछे कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण है चीन की घनी आबादी, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों जैसे बीजिंग और गुआंगदोंग में, जहां लोग एक-दूसरे के निकट संपर्क में रहते हैं, जिससे वायरस का हवा या सतहों के माध्यम से फैलना आसान हो जाता है। इसके अलावा, वेट मार्केट्स, जहां जंगली और पालतू जानवरों का निकट संपर्क होता है, वायरस के मानवों में प्रसार का एक बड़ा जोखिम पैदा करते हैं। अपर्याप्त स्वच्छता मानक और कमजोर सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली भी वायरस के प्रकोप को नियंत्रित करने में बाधा डालती है। बड़े पैमाने पर शहरीकरण और जंगलों की कटाई जैसे पारिस्थितिक परिवर्तनों ने जानवरों और मनुष्यों के बीच संपर्क को बढ़ाया है, जिससे नए वायरस के उभरने की संभावना बढ़ जाती है। सर्दियों का मौसम, जब HMPV जैसे श्वसन वायरस अधिक सक्रिय होते हैं, भी चीन में इसके प्रसार को बढ़ावा देता है। इन कारकों के संयोजन से चीन बार-बार वायरल प्रकोपों का केंद्र बन रहा है, जैसा कि 2024-25 में HMPV के मामलों में वृद्धि से स्पष्ट है।
HMPV वायरस क्या है?
ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) एक श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाला वायरस है, जो न्यूमोवायरिडे परिवार से संबंधित है और पहली बार 2001 में नीदरलैंड्स में खोजा गया था। यह वायरस मुख्य रूप से सर्दियों और शुरुआती वसंत में सक्रिय होता है, जिसके कारण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण जैसे खांसी, बुखार, नाक बहना, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ उत्पन्न हो सकते हैं। गंभीर मामलों में, यह निमोनिया या ब्रोंकाइटिस का कारण बन सकता है, विशेष रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में। HMPV हवा के माध्यम से, खांसने-छींकने से निकलने वाली बूंदों, या दूषित सतहों के संपर्क से फैलता है। वर्तमान में इसके लिए कोई विशिष्ट टीका या एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है, और उपचार में लक्षणों को कम करने के लिए सहायक चिकित्सा, जैसे ऑक्सीजन थेरेपी और बुखार नियंत्रण, शामिल है। चीन में 2024-25 की सर्दियों में HMPV के मामलों में वृद्धि देखी गई, जिससे स्वास्थ्य संकट की स्थिति उत्पन्न हुई, हालांकि विशेषज्ञ इसे कोविड-19 जैसे गंभीर खतरे के रूप में नहीं मानते।

लक्षण: HMPV के लक्षणों में शामिल हैं:
- खांसी
- बुखार
- नाक बहना या बंद होना
- गले में खराश
- सांस लेने में तकलीफ (गंभीर मामलों में)
- कुछ मामलों में ब्रोंकाइटिस, निमोनिया या अस्थमा जैसे लक्षण
जोखिम समूह: यह वायरस विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है।

Table of Contents
HMPV का खतरा और बचाव
- खतरे का स्तर: विशेषज्ञों का कहना है कि HMPV कोविड-19 की तरह घातक नहीं है। यह एक सामान्य श्वसन वायरस है, जो सर्दियों में अधिक फैलता है। गंभीर मामलों में निमोनिया या ब्रोंकाइटिस हो सकता है, लेकिन ज्यादातर मामले हल्के होते हैं।
- इलाज:
- बचाव के उपाय:
- ICMR का शोध: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, फरवरी 2025 के बाद HMPV का प्रभाव कम हो सकता है। केवल 1% मामलों में गंभीर जटिलताएं देखी गई हैं।
HMPV के कारण वैश्विक चिंता और भारत में प्रभाव
ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) के बढ़ते मामलों, विशेष रूप से चीन में इसके प्रकोप के कारण वैश्विक चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह श्वसन वायरस तेजी से फैल सकता है और बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में गंभीर श्वसन रोग जैसे निमोनिया और ब्रोंकाइटिस का कारण बन सकता है। भारत में, जनवरी 2025 तक 17 मामले सामने आए हैं, जिनमें बेंगलुरु, अहमदाबाद, मुंबई, तमिलनाडु, और पुडुचेरी शामिल हैं, विशेष रूप से शिशुओं और छोटे बच्चों में। भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आश्वासन दिया है कि HMPV कोई नया वायरस नहीं है और कोविड-19 जैसी महामारी का खतरा नहीं है, क्योंकि यह 2001 से वैश्विक रूप से मौजूद है और ज्यादातर मामले हल्के होते हैं। फिर भी, भारत में कर्नाटक, महाराष्ट्र, और दिल्ली जैसे राज्यों ने निगरानी बढ़ा दी है और मास्क पहनने, हाथ धोने और भीड़ से बचने जैसे निवारक उपायों की सलाह दी है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) स्थिति पर नजर रख रहे हैं, और विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, सोशल मीडिया पर अतिरंजित दावों ने जनता में कुछ घबराहट पैदा की है, जिसे स्वास्थ्य अधिकारियों ने शांत करने की कोशिश की है।

भ्रामक जानकारी और सावधानी
- कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में HMPV को कोविड-19 जैसी महामारी बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे सामान्य श्वसन वायरस माना है।
- एक भारतीय नागरिक, राजू नायक, ने चीन के डालियान से वीडियो साझा कर बताया कि वहां स्थिति सामान्य है और अस्पतालों में कोई असामान्य भीड़ नहीं है।
- WHO ने अभी तक HMPV को लेकर कोई आपातकाल घोषित नहीं किया है। https://www.who.int/