डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल (20 जनवरी 2025 से शुरू) में ईरान के खिलाफ अधिकतम दबाव नीति को फिर से लागू किया है, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना, उसके क्षेत्रीय प्रभाव को कम करना, और आतंकवाद को समर्थन देने वाली गतिविधियों को सीमित करना है।ट्रंप ने 2018 में अपने पहले कार्यकाल में ईरान के साथ 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका को बाहर कर लिया था, जिसके बाद ईरान ने यूरेनियम संवर्धन की सीमाओं को तोड़ना शुरू किया। 2025 तक, ईरान के पास 60% तक संवर्धित यूरेनियम का भंडार है, जो हथियार-ग्रेड (90%) के करीब है।2025 में ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौते के लिए बातचीत को प्राथमिकता दी है, लेकिन साथ ही सैन्य कार्रवाई और प्रतिबंधों की धमकी भी दी है। उनकी चेतावनियाँ मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, हूती विद्रोहियों को समर्थन, और अमेरिकी हितों के खिलाफ कथित खतरों पर केंद्रित हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई बार कड़ी चेतावनियाँ दी
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल (20 जनवरी 2025 से शुरू) में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई बार कड़ी चेतावनियाँ दी हैं, जो उनकी “अधिकतम दबाव” नीति का हिस्सा हैं। 5 फरवरी 2025 को, ट्रंप ने एक राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति ज्ञापन (NSPM) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें ईरान के परमाणु हथियार विकसित करने के सभी रास्तों को बंद करने और आर्थिक दबाव बढ़ाने का निर्देश दिया गया। उन्होंने 30 मार्च 2025 को NBC न्यूज़ को दिए साक्षात्कार में कहा कि यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं करता, तो वह “ऐसी बमबारी का सामना करेगा, जैसी पहले कभी नहीं देखी गई।” ट्रंप ने मांग की है कि ईरान सभी यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह बंद करे और अमेरिकी निरीक्षकों को परमाणु स्थलों तक अभूतपूर्व पहुंच दे। 2 मई 2025 को, उन्होंने Truth Social पर ईरान से तेल खरीदने वाले देशों, विशेष रूप से चीन, पर सेकेंडरी टैरिफ की धमकी दी, क्योंकि ईरान 60% तक संवर्धित यूरेनियम का भंडार रखता है, जो हथियार-ग्रेड (90%) के करीब है। 4 जून 2025 को, ट्रंप ने दावा किया कि वह रूस की मध्यस्थता से परमाणु समझौते के करीब हैं, लेकिन ईरान ने उनकी मांगों को “अपर्याप्त” बताया। ईरानी नेता अयातुल्ला खामनेई ने संवर्धन को “अधिकार” करार देते हुए ट्रंप की धमकियों को खारिज किया। यह तनाव मध्य पूर्व में अस्थिरता और इज़रायल के साथ तनाव को बढ़ा रहा है, जो परमाणु स्थलों पर हमले की योजना बना रहा है। ट्रंप की चेतावनियाँ कूटनीति और सैन्य कार्रवाई के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश को दर्शाती हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल ईरान के साथ परमाणु वार्ता की स्थिति
- 2025 में वार्ता: ट्रंप ने ओमान और इटली की मध्यस्थता से ईरान के साथ परमाणु वार्ता शुरू की। पांच दौर की बातचीत (अंतिम दौर मई 2025 में रोम में) हुई, लेकिन यूरेनियम संवर्धन और प्रतिबंध हटाने पर असहमति बनी रही।
- मई 2025: ट्रंप ने दावा किया कि वह एक समझौते के “बہت करीब” हैं, जिसमें अमेरिकी निरीक्षकों को ईरान के परमाणु स्थलों तक अभूतपूर्व पहुंच मिलेगी। ईरान ने कहा कि वह संवर्धन पर रोक लगाने को तैयार है, बशर्ते अमेरिका जमे हुए ईरानी फंड्स को रिलीज़ करे और नागरिक उपयोग के लिए संवर्धन का अधिकार माने।
- मुख्य विवाद: अमेरिका चाहता है कि ईरान सभी संवर्धन बंद करे, जबकि ईरान कम-स्तरीय संवर्धन (3.67% तक) का अधिकार चाहता है।

डोनाल्ड ट्रंप ने हूती विद्रोहियों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर दी चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने हूती विद्रोहियों के क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है, इसे उनकी “अधिकतम दबाव” नीति का हिस्सा माना जाता है। 17 मार्च 2025 को, ट्रंप ने Truth Social पर कहा कि यमन में हूती विद्रोहियों के हर हमले को “ईरान के हथियारों और नेतृत्व” से जोड़ा जाएगा, और इसके लिए ईरान को “गंभीर परिणाम” भुगतने होंगे। हूती, जो ईरान समर्थित शिया विद्रोही हैं, ने लाल सागर में इज़रायली और पश्चिमी जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिससे वैश्विक व्यापार में 12% हिस्सेदारी वाले बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में व्यवधान उत्पन्न हुआ। ये हमले 2023 में इज़रायल-हमास युद्ध के बाद बढ़े, जिसमें हूतियों ने गाजा में इज़रायल की कार्रवाइयों के खिलाफ हमले किए। ट्रंप ने ईरान से हूतियों को समर्थन बंद करने की मांग की, चेतावनी दी कि अन्यथा सैन्य कार्रवाई होगी। ईरान ने इन हमलों में प्रत्यक्ष भूमिका से इनकार किया, लेकिन उसका सैन्य समर्थन हूतियों की शक्ति को बढ़ाता है। इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है, विशेष रूप से सऊदी अरब और इज़रायल के साथ, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है।

ईरान की प्रतिक्रिया डोनाल्ड ट्रंप के दबाव नीति पर
- 10 फरवरी 2025: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने ट्रंप पर पाखंड का आरोप लगाया, कहा कि वह “बातचीत की बात करते हैं, लेकिन साथ ही इस्लामिक गणराज्य को घुटनों पर लाने की साजिश करते हैं।” उन्होंने अमेरिका द्वारा इज़रायल को समर्थन देने की आलोचना की।
- 4 जून 2025: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने अमेरिका की यूरेनियम संवर्धन रोकने की मांग को खारिज किया, कहा कि “यूरेनियम संवर्धन हमारा अधिकार है।” उन्होंने ट्रंप की धमकियों को “बुद्धिमानी या सम्मानजनक” नहीं माना।
- 5 जून 2025: ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी, अली शमखानी, ने कहा कि अमेरिका का नवीनतम प्रस्ताव “अपर्याप्त” है, क्योंकि इसमें प्रतिबंध हटाने का कोई उल्लेख नहीं है। ईरान ने एक जवाबी प्रस्ताव तैयार करने की बात कही।

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