बिग प्लान खरीदने की बजाय तेल बेचेगा भारत !
भारत का तेल और गैस क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की दिशा में बढ़ने का “बिग प्लान” हाल के घटनाक्रमों से स्पष्ट है, जहां देश न केवल अपनी तेल आयात निर्भरता को कम करना चाहता है, बल्कि एक प्रमुख तेल निर्यातक के रूप में उभरना चाहता है। हाल के X पोस्ट्स में दावा किया गया है कि अंडमान-निकोबार में 24 ट्रिलियन क्यूबिक फीट के तेल और गैस भंडार की खोज हुई है, और भारत सरकार ने 2027 तक वहां से प्रतिदिन 2.45 लाख बैरल कच्चा तेल निकालने का लक्ष्य रखा है। यह कदम ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत वर्तमान में अपनी 85% से अधिक तेल आवश्यकताओं को आयात करता है, मुख्य रूप से मध्य पूर्व और हाल ही में रूस से।
बिग प्लान से सस्ते कच्चे तेल की खरीद
भारत पहले से ही रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का एक बड़ा निर्यातक है, जो 2023 में 62.59 मिलियन टन ($47.72 बिलियन) के निर्यात के साथ विश्व में 10वें स्थान पर है। रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद, खासकर यूक्रेन संकट के बाद, ने भारत को रिफाइनिंग क्षमता का लाभ उठाने और यूरोप, अमेरिका, और अन्य क्षेत्रों में डीजल, पेट्रोल जैसे उत्पादों को निर्यात करने में सक्षम बनाया है। उदाहरण के लिए, 2023 में यूरोपीय संघ ने भारत से 231,800 बैरल प्रतिदिन रिफाइंड उत्पाद आयात किए, जो 2022 की तुलना में 115% की वृद्धि दर्शाता है। गुजरात के जामनगर और वाडिनार जैसे रिफाइनरी हब, विशेष रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी, इस निर्यात वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

हालांकि, यह रणनीति विवादों से मुक्त नहीं है। कुछ X पोस्ट्स और रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसे रिफाइन कर यूरोप को बेच रहा है, जिसे “लॉन्ड्रोमैट” देश की संज्ञा दी गई है, जो रूसी तेल पर पश्चिमी प्रतिबंधों को अप्रत्यक्ष रूप से कमजोर करता है। इसके बावजूद, भारत के तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे राष्ट्रीय हित में बताया है, यह कहते हुए कि सस्ता तेल खरीदना वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद करता है। साथ ही, भारत अमेरिका जैसे देशों से तेल और गैस आयात बढ़ाने की योजना बना रहा है ताकि आपूर्ति में विविधता लाई जा सके।
भारत कि तेल आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश
आगे बढ़ते हुए, सरकार 100% FDI की अनुमति और नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करके तेल आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है। यदि अंडमान-निकोबार और अन्य क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ता है, तो भारत न केवल अपनी तेल जरूरतों को पूरा कर सकता है, बल्कि सऊदी अरब जैसे पारंपरिक निर्यातकों को टक्कर देते हुए वैश्विक बाजार में एक बड़ा खिलाड़ी बन सकता है। यह “बिग प्लान” भारत को तेल खरीदने से तेल बेचने वाले देश में बदलने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, लेकिन इसके लिए रिफाइनिंग क्षमता, भू-राजनीतिक संतुलन, और पर्यावरणीय जोखिमों का प्रबंधन महत्वपूर्ण होगा।

यह रणनीति भू-राजनीतिक विवादों से भी जुड़ी है, क्योंकि कुछ पश्चिमी देश भारत को रूसी तेल के लिए “लॉन्ड्रोमैट” कहते हैं, जो प्रतिबंधों को अप्रत्यक्ष रूप से कमजोर करता है। फिर भी, तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी इसे राष्ट्रीय हित में बताते हैं, क्योंकि सस्ता तेल वैश्विक कीमतों को स्थिर रखता है।भारत अब अमेरिका जैसे देशों से आयात बढ़ाने और 100% FDI के साथ घरेलू उत्पादन पर जोर दे रहा है।
नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन पर निवेश के साथ, भारत 2030 तक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। यदि यह योजना सफल होती है, तो भारत सऊदी अरब जैसे तेल निर्यातकों को टक्कर दे सकता है। हालांकि, पर्यावरणीय जोखिम, रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार, और वैश्विक बाजार में स्थिरता बनाए रखना इसकी सफलता की कुंजी होगा। क्या आप इस योजना के किसी विशिष्ट पहलू, जैसे निर्यात डेटा या पर्यावरणीय प्रभाव, पर और जानकारी चाहेंगे?