“मुझ पर भरोसा रखें” राधिका यादव ने हत्या से पहले पिता से कही थी ये बात, गुरुग्राम मर्डर केस का पूरा सच

मुझ पर भरोसा रखें राधिका यादव ने हत्या से पहले पिता से कही थी ये बात, गुरुग्राम मर्डर केस का पूरा सच

गुरुग्राम में 25 वर्षीय टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस दिल दहला देने वाली घटना में राधिका के पिता, दीपक यादव, ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से अपनी ही बेटी पर पांच गोलियां दागीं, जिनमें से तीन ने उनके शरीर को भेद दिया। पुलिस के अनुसार, दीपक ने कबूल किया कि उन्होंने गांव वालों के तानों के कारण यह कदम उठाया, जो उन्हें राधिका की कमाई खाने का तंज कसते थे। लेकिन सबसे मार्मिक बात यह है कि राधिका ने अपनी हत्या से पहले अपने पिता से कहा था, “मुझ पर भरोसा रखें।”

राधिका यादव: एक उभरती हुई टेनिस खिलाड़ी

राधिका यादव एक प्रतिभाशाली टेनिस खिलाड़ी और कोच थीं, जिन्होंने अपने दम पर खेल की दुनिया में पहचान बनाई थी। गुरुग्राम में रहने वाली राधिका ने अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत की थी। वह न केवल एक खिलाड़ी थीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी सक्रिय थीं, जहां उनकी रील्स और वीडियो को काफी पसंद किया जाता था। उनकी बढ़ती लोकप्रियता और स्वतंत्रता ने समाज के कुछ लोगों को असहज कर दिया था, जिसका असर उनके पारिवारिक रिश्तों पर भी पड़ा।

“मुझ पर भरोसा रखें”: राधिका की आखिरी अपील

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि राधिका ने अपने पिता दीपक यादव से कई बार कहा था, “मुझ पर भरोसा रखें।” वह अपने पिता को यह समझाने की कोशिश कर रही थीं कि उनकी मेहनत और सफलता परिवार के लिए गर्व की बात है। लेकिन दीपक यादव, जो सामाजिक तानों से परेशान थे, इसे स्वीकार नहीं कर सके। गांव वालों द्वारा बार-बार ताने मारने, जैसे “वह अपनी बेटी की कमाई खाता है,” ने उनके मन में गुस्सा और असुरक्षा भर दी थी। इस मानसिक दबाव ने अंततः एक ऐसी त्रासदी को जन्म दिया, जिसने एक प्रतिभाशाली बेटी को हमेशा के लिए खामोश कर दिया।

मुझ पर भरोसा रखें राधिका यादव ने हत्या से पहले पिता से कही थी ये बात, गुरुग्राम मर्डर केस का पूरा सच
मुझ पर भरोसा रखें राधिका यादव ने हत्या से पहले पिता से कही थी ये बात, गुरुग्राम मर्डर केस का पूरा सच

हत्याकांड की घटना

7 जुलाई 2025 को गुरुग्राम में यह दिल दहलाने वाली घटना घटी। पुलिस के अनुसार, दीपक यादव ने अपनी बेटी राधिका को पीछे से निशाना बनाते हुए अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से पांच गोलियां चलाईं। इनमें से तीन गोलियां राधिका के शरीर को भेद गईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद दीपक ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और अपना गुनाह कबूल किया। उन्होंने बताया कि वह सामाजिक तानों और राधिका की बढ़ती आजादी से परेशान थे। पुलिस ने दीपक को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

सोशल मीडिया और सामाजिक दबाव

राधिका की सोशल मीडिया पर बढ़ती मौजूदगी उनके पिता के लिए परेशानी का कारण बनी। आज के डिजिटल युग में, जहां युवा अपनी पहचान बनाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं, राधिका भी अपनी उपलब्धियों को साझा करती थीं। लेकिन समाज के रूढ़िवादी हिस्सों ने इसे गलत तरीके से लिया। न्यूज़18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राधिका की रील्स और वायरल वीडियो ने समाज के तानों को बढ़ावा दिया, जिसने उनके और उनके पिता के बीच खाई को और गहरा कर दिया।

समाज और परिवार पर सवाल

राधिका यादव की हत्या ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या एक बेटी की सफलता और आजादी इतनी बड़ी गलती है कि उसकी सजा मौत हो? एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में कहा गया कि यह घटना हमें अपने समाज, रिश्तों और सोच पर सवाल उठाने के लिए मजबूर करती है। दीपक यादव ने अपनी बेटी को खो दिया, लेकिन समाज ने भी एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी और स्वतंत्र महिला को खो दिया।

मुझ पर भरोसा रखें राधिका यादव ने हत्या से पहले पिता से कही थी ये बात, गुरुग्राम मर्डर केस का पूरा सच
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इस त्रासदी से सबक

  1. सामाजिक दबाव का सामना: समाज के ताने और रूढ़ियों को नजरअंदाज करने की जरूरत है। परिवार को एक-दूसरे पर भरोसा करना चाहिए।
  2. संवाद की कमी: राधिका और उनके पिता के बीच खुलकर बातचीत की कमी ने इस त्रासदी को जन्म दिया। परिवार में खुले संवाद को बढ़ावा देना जरूरी है।
  3. महिलाओं की स्वतंत्रता: समाज को महिलाओं की स्वतंत्रता और सफलता को स्वीकार करना होगा, न कि उसे तानों का कारण बनाना।
  4. मानसिक स्वास्थ्य: दीपक जैसे लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध होनी चाहिए ताकि सामाजिक दबाव उन्हें हिंसक कदम उठाने के लिए मजबूर न करे।

निष्कर्ष

राधिका यादव की हत्या एक ऐसी त्रासदी है जो हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने समाज और परिवारों में कहां गलती कर रहे हैं। “मुझ पर भरोसा रखें” जैसे शब्द, जो राधिका ने अपने पिता से कहे, अब हमारे लिए एक सबक हैं। हमें अपने घरों में सम्मान, बराबरी और समझ को बढ़ावा देना होगा ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। यह घटना न केवल एक परिवार की हानि है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से हिंसा को बढ़ावा नहीं देता।

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  • flasahsamachar

    मैं संजना डोंगरे, हिंदी ब्लॉगर और कंटेंट क्रिएटर हूं। पिछले 5 सालों से टेक्नोलॉजी, डिजिटल मार्केटिंग और न्यूज़ पर 700+ आर्टिकल्स लिखे हैं। मेरा उद्देश्य है पाठकों तक सरल व भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना।

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